राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से अपील, बोलीं- स्टार वही जो रोशनी फैलाए

Editorial
7 Min Read

नई दिल्ली 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि फिल्मी सितारों की लोकप्रियता केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके व्यवहार, संदेश और सार्वजनिक छवि का बच्चों और युवाओं पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय कलाकारों को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों के विज्ञापन और प्रचार से बचना चाहिए।22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति ने सिनेमा जगत की उपलब्धियों की सराहना की। इसी दौरान उन्होंने फिल्म कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी बात रखी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक संबोधन में उन्होंने कहा कि लोकप्रिय फिल्म कलाकारों में देशवासियों, खासकर युवाओं को प्रभावित करने की बड़ी क्षमता होती है।

युवाओं पर पड़ता है सितारों की बातों का असर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जब सफल फिल्म कलाकार अनुशासित जीवनशैली के लाभों के बारे में बात करते हैं तो बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उनका अनुसरण करते हैं। इसी प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लोकप्रिय कलाकारों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का एंडोर्समेंट नहीं करने का अनुरोध किया।उन्होंने अपने संदेश को एक प्रभावशाली पंक्ति के साथ सामने रखा— “Star वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं।” राष्ट्रपति की यह टिप्पणी समारोह के दौरान दिए गए उनके संबोधन का हिस्सा थी और उन्होंने इसे किसी एक कलाकार का नाम लिए बिना व्यापक रूप से फिल्म जगत के सामने रखा।राष्ट्रपति के इस बयान के बाद फिल्मी सितारों की ब्रांड एंडोर्समेंट और उनकी सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों में भी इसे सेलिब्रिटी विज्ञापनों से जुड़े व्यापक सवालों के संदर्भ में देखा गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से अपील
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से अपील

लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में लोकप्रिय कलाकारों की भूमिका को केवल फिल्मों और मनोरंजन तक सीमित नहीं माना। उनका कहना था कि बड़े कलाकारों की पहुंच समाज के एक बड़े वर्ग तक होती है। खास तौर पर युवा वर्ग फिल्मी सितारों की जीवनशैली और सार्वजनिक संदेशों से प्रभावित हो सकता है।यही वजह है कि किसी लोकप्रिय कलाकार की ओर से दिए गए स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े संदेशों का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। राष्ट्रपति ने इसी सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कलाकारों से अपील की कि वे ऐसे उत्पादों के प्रचार से बचें जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।यह अपील ऐसे समय में सामने आई है जब सेलिब्रिटी ब्रांड एंडोर्समेंट को लेकर सार्वजनिक और नियामकीय स्तर पर भी चर्चा होती रही है। हालांकि राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में किसी विशेष अभिनेता, ब्रांड या कंपनी का नाम नहीं लिया।

फिल्म इंडस्ट्री के कामगारों का भी उठाया मुद्दा

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति ने सिर्फ कलाकारों की लोकप्रियता और विज्ञापन से जुड़े मुद्दे पर बात नहीं की। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की क्रिएटिव इकोनॉमी में योगदान देने वाले मजदूरों, छोटे कलाकारों, सहायकों और संघर्षरत लोगों के सम्मान तथा सामाजिक सुरक्षा की जरूरत पर भी जोर दिया।उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में पर्दे पर नजर आने वाले कलाकारों के साथ बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी काम करते हैं, जिनका योगदान दर्शकों को दिखाई नहीं देता। इन सभी लोगों के योगदान को सम्मान मिलना चाहिए और उनके प्रति संवेदनशीलता फिल्म उद्योग की कार्य संस्कृति का हिस्सा बननी चाहिए।राष्ट्रपति ने पुरस्कार पाने वाले कलाकारों से यह भी कहा कि वे अपनी टीम के उन सभी सदस्यों तक भी अपनी सराहना पहुंचाएं, जिनके योगदान से उनकी फिल्म तैयार हुई और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।

भारतीय सिनेमा के भविष्य पर जताया भरोसा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सिनेमा की गुणवत्ता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में बन रही अच्छी फिल्मों को देखकर उनका विश्वास और मजबूत हुआ है कि भारतीय फिल्में गुणवत्ता के विश्वस्तरीय मानक स्थापित करेंगी।72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में भारतीय सिनेमा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। समारोह में वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए गए। वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग को दादासाहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

‘स्टारडम’ से आगे सामाजिक संदेश पर जोर

राष्ट्रपति की अपील का मुख्य केंद्र यही रहा कि लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। किसी कलाकार की पहचान केवल उसके अभिनय या स्टारडम से नहीं बनती, बल्कि समाज पर उसके प्रभाव से भी जुड़ती है।स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के प्रचार को लेकर राष्ट्रपति ने कलाकारों से सावधानी बरतने का अनुरोध किया। उन्होंने यह संदेश किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाकर नहीं, बल्कि लोकप्रिय कलाकारों और पूरे फिल्म जगत के लिए एक व्यापक अपील के रूप में दिया।उनकी पंक्ति “स्टार वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं” सोशल मीडिया और समाचार रिपोर्टों में भी चर्चा का विषय बनी।राष्ट्रपति का यह संदेश फिल्मी सितारों की लोकप्रियता, युवाओं पर उनके प्रभाव और सार्वजनिक जीवन में उनकी जिम्मेदारी के बीच संबंध को रेखांकित करता है। साथ ही उन्होंने भारतीय सिनेमा से जुड़े पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा।72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन पुरस्कार और उपलब्धियों के साथ-साथ जिम्मेदार स्टारडम, स्वस्थ जीवनशैली और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हर व्यक्ति के सम्मान पर केंद्रित रहा। उनका संदेश साफ था कि बड़ी लोकप्रियता के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी आती है और कलाकारों की पहुंच का इस्तेमाल सकारात्मक संदेशों के लिए किया जा सकता है।

Read on:http://आजमगढ़ में चार मौतें: पत्नी, दो पुजारी और बेटे की मौत, आरोपी एनकाउंटर में ढेर

Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment