
आरा/भोजपुर बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया और बड़ा राजनीतिक-सामाजिक मोड़ ले लिया है। इस बहुचर्चित कथित पुलिस मुठभेड़ प्रकरण में अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर की एंट्री हो गई है। बाबा के एक बयान ने न सिर्फ बिहार पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पूरे मामले को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।मृतक भरत भूषण तिवारी को “सनातन और हिंदुत्व के लिए आवाज उठाने वाला युवा” बताते हुए बाबा बागेश्वर ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव पहुंचेंगे और पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। उनके इस ऐलान के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है।
“अपराधी भी हो तो सजा कोर्ट देगी, पुलिस नहीं”
भरत भूषण तिवारी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा बागेश्वर ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया—
“यदि कोई व्यक्ति अपराधी भी हो, तो उसे सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है। पुलिस को नहीं। यदि किसी ने आत्मसमर्पण कर दिया है, तो उसके बाद उसकी जान लेना कानून के शासन और मानवाधिकारों के खिलाफ है।”
बाबा का यह बयान सीधे-सीधे पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान और न्यायपालिका सर्वोच्च हैं। ऐसे में किसी भी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का फैसला अदालत करती है, न कि बंदूक।उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर भरत भूषण तिवारी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?

कौन था भरत भूषण तिवारी?
भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी 32 वर्षीय भरत भूषण तिवारी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय माने जाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार वह क्षेत्र में भ्रष्टाचार, जमीन विवाद, भू-माफियाओं की गतिविधियों और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाते थे। फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी अच्छी खासी पहचान थी। कई मुद्दों पर उनके वीडियो वायरल होते रहते थे। यही वजह है कि उनकी मौत के बाद मामला केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनचर्चा और जनभावना से जुड़ गया।
पुलिस की कहानी क्या कहती है?
भोजपुर पुलिस का दावा है कि भरत भूषण तिवारी के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें वह कथित तौर पर हथियार लहराते और धमकी भरे बयान देते दिखाई दे रहे थे। पुलिस के अनुसार इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए टीम भेजी गई थी। इसी दौरान कथित मुठभेड़ हुई, जिसमें भरत भूषण तिवारी के पैर में गोली लगी।पुलिस का कहना है कि घायल अवस्था में उन्हें पहले आरा सदर अस्पताल ले जाया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।पुलिस इसे वैधानिक कार्रवाई और मुठभेड़ की घटना बता रही है।
परिजनों का आरोप— “सरेंडर के बाद मारी गई गोली”
दूसरी तरफ भरत भूषण तिवारी के परिजन और ग्रामीण पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं।परिवार का आरोप है कि भरत ने फेसबुक लाइव के माध्यम से खुद को पुलिस के सामने सरेंडर करने की बात कही थी। उनका दावा है कि आत्मसमर्पण के बाद भी उन्हें निशाना बनाया गया और पूरी घटना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी।परिजनों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुका था तो फिर मुठभेड़ की नौबत कैसे आई?यही सवाल अब पूरे मामले की सबसे बड़ी कड़ी बन गया है।
बाबा के दौरे से बढ़ेगा दबाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबा बागेश्वर के इस मामले में आने से प्रशासन और पुलिस पर दबाव बढ़ सकता है।देशभर में करोड़ों अनुयायियों वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। अब यदि वह स्वयं बिलौटी गांव पहुंचते हैं और परिवार से मुलाकात करते हैं तो यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ सकता है।स्थानीय लोगों का भी मानना है कि बाबा के हस्तक्षेप के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज होगी।
सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल
भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई दे रहा है।एक पक्ष पुलिस की कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे संदिग्ध एनकाउंटर बताते हुए न्यायिक जांच की मांग कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—
क्या भरत भूषण तिवारी ने वास्तव में सरेंडर किया था?
यदि किया था तो फिर गोली क्यों चली?
क्या मुठभेड़ की पूरी घटना का स्वतंत्र जांच एजेंसी से परीक्षण होना चाहिए?
इन सवालों के जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हैं।
अब सबकी नजर जांच पर
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल भोजपुर या बिहार तक सीमित नहीं रह गया है। बाबा बागेश्वर की एंट्री के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को सही बता रही है, तो दूसरी ओर परिजन इसे सुनियोजित हत्या करार दे रहे हैं। ऐसे में सच क्या है, इसका फैसला केवल निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही कर सकती है।फिलहाल पूरे बिहार की निगाहें बाबा बागेश्वर के प्रस्तावित भोजपुर दौरे और इस मामले में आगे होने वाली जांच पर टिकी हुई हैं। क्योंकि अब सवाल सिर्फ भरत भूषण तिवारी की मौत का नहीं, बल्कि कानून, न्याय और मानवाधिकारों पर जनता के भरोसे का भी है।
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