Meta पर बड़ा आरोप: किशोरों के हानिकारक कंटेंट देखने के आंकड़े 400 गुना ज्यादा होने का दावा, कंपनी ने आरोप नकारे

Editorial
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नई दिल्ली सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) एक बार फिर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर विवादों में घिर गई है। अमेरिका में कंपनी के खिलाफ चल रहे मुकदमे के दौरान मेटा के पूर्व कर्मचारी और व्हिसलब्लोअर आर्टुरो बेजार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, इंस्टाग्राम पर किशोरों के हानिकारक और परेशान करने वाले कंटेंट के संपर्क में आने की वास्तविक स्थिति कंपनी के सार्वजनिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा थी।बेजार के दावे के अनुसार, मेटा की आंतरिक रिसर्च और सार्वजनिक रूप से पेश किए गए आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर सामने आया। कुछ मामलों में किशोरों के नकारात्मक ऑनलाइन अनुभव कंपनी के आधिकारिक आंकड़ों से 100 से 400 गुना तक अधिक पाए गए। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।

मेटा के आंकड़ों पर उठे सवाल

अमेरिका में चल रही कानूनी कार्रवाई के दौरान बेजार ने मेटा की सुरक्षा व्यवस्था और उसके आंकड़ों को लेकर अपनी गवाही दी। उनका कहना है कि कंपनी द्वारा किशोरों के ग्राफिक या हिंसक कंटेंट के संपर्क में आने का जोखिम बेहद कम बताया गया था, जबकि आंतरिक सर्वेक्षणों में तस्वीर अलग दिखाई दी।बेजार के मुताबिक, कंपनी की सार्वजनिक रिपोर्टिंग मुख्य रूप से उन घटनाओं को रिकॉर्ड करती थी जो उसकी निर्धारित नीतियों का उल्लंघन करती थीं। दूसरी तरफ, उनके शोध में यूजर्स से सीधे यह पूछा गया कि उन्हें प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते समय किस तरह के नकारात्मक अनुभवों का सामना करना पड़ा।इस अंतर के कारण ऑनलाइन सुरक्षा को मापने के तरीके पर सवाल खड़े हुए हैं।

सिर्फ नीति उल्लंघन ही समस्या नहीं

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी कंटेंट का किशोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना जरूरी नहीं कि वह मेटा की किसी नीति का स्पष्ट उल्लंघन करता हो। बेजार के शोध के मुताबिक, किशोरों को ऑनलाइन बदमाशी, उत्पीड़न और अन्य परेशान करने वाली परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, भले ही संबंधित सामग्री कंपनी की मौजूदा नीतियों के तहत हटाने योग्य न हो।यही वजह है कि बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर टेक कंपनियों की जिम्मेदारी पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों के बीच यह सवाल भी उठता रहा है कि प्लेटफॉर्म केवल नियम तोड़ने वाले कंटेंट को हटाने तक सीमित रहें या यूजर्स के अनुभव और मानसिक सुरक्षा को भी अपनी नीतियों का हिस्सा बनाएं।

29 अमेरिकी राज्यों ने मेटा के खिलाफ खोला मोर्चा

मेटा के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में अमेरिका के कई राज्य शामिल हैं। आरोप है कि कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म के युवाओं पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभावों की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद प्लेटफॉर्म के ऐसे फीचर्स जारी रहे जो यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने में मदद करते हैं।मामले में पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन, लगातार नोटिफिकेशन और अंतहीन स्क्रॉलिंग जैसे फीचर्स भी चर्चा में हैं। राज्यों का आरोप है कि इन डिजाइन विकल्पों से कम उम्र के यूजर्स प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।इसके अलावा कंपनी पर कम उम्र के बच्चों के डेटा से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अदालत में कानूनी बहस जारी है और इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

200 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेटा के खिलाफ 200 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही अदालत से कंपनी के प्लेटफॉर्म के डिजाइन और संचालन में बदलाव कराने की मांग भी की गई है।यदि अदालत मेटा के खिलाफ फैसला देती है तो कंपनी को आर्थिक नुकसान के अलावा अपने कुछ प्रमुख प्लेटफॉर्म फीचर्स और सुरक्षा नीतियों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।मामले की तुलना अमेरिका में अतीत में बड़ी कंपनियों के खिलाफ हुई कानूनी लड़ाइयों से भी की जा रही है। हालांकि, अंतिम परिणाम अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।

मेटा ने आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर, मेटा ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसके खिलाफ पेश किए गए सबूतों को सही संदर्भ में नहीं देखा गया है। मेटा का दावा है कि वह बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर लगातार काम कर रही है और प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है।कंपनी के मुताबिक, उसकी न्यूनतम आयु संबंधी नीतियों का पालन नहीं करने वाले कई कम उम्र के अकाउंट्स को हटाया गया है। मेटा का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा और प्राइवेसी को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए उपाय किए जा रहे हैं।

आगे क्या होगा?

मेटा के खिलाफ यह मुकदमा टेक्नोलॉजी कंपनियों की जिम्मेदारी और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाली सुनवाई में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से भी सवाल-जवाब होने की संभावना है।अब अदालत को यह तय करना होगा कि मेटा पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कंपनी की नीतियों तथा प्लेटफॉर्म डिजाइन का किशोर यूजर्स पर क्या प्रभाव पड़ा। इस मामले का फैसला केवल मेटा के लिए ही नहीं, बल्कि दुनियाभर की सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।मेटा पर लगे ताजा आरोपों ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए कितने जिम्मेदार हैं। व्हिसलब्लोअर के 400 गुना तक अधिक आंकड़ों के दावे ने मामले को और गंभीर बना दिया है, लेकिन अंतिम स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल मेटा आरोपों से इनकार कर रही है और अपनी सुरक्षा नीतियों का बचाव कर रही है।

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