उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को ‘स्कूल चलो अभियान-2026’ के द्वितीय चरण का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को विस्तार से सामने रखा। सीएम का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा, जहां उन्होंने न केवल शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा की, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की मुख्य धुरी बताते हुए एक स्पष्ट संदेश भी दिया।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निर्धारित समय से करीब सवा घंटे की देरी से पहुंचे। उनका विमान सरसावा एयरपोर्ट पर उतरा, जिसके बाद वे सीधे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। बारिश के बावजूद महाराज सिंह डिग्री कॉलेज मैदान में भारी संख्या में लोग जुटे रहे। भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी उत्सुकता के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। देरी के बावजूद पूरे माहौल में ऊर्जा और उत्साह बना रहा।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अच्छी शिक्षा ही अच्छे नागरिक, कुशल डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, शिक्षक और जनप्रतिनिधि तैयार करती है। यदि शिक्षा मजबूत होगी तो समाज स्वतः मजबूत होगा और राष्ट्र विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।सीएम ने वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए ‘स्कूल चलो अभियान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है, ताकि कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित न रहे। उन्होंने इसे केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बताया जिसे अब जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। केवल 36 प्रतिशत विद्यालय ही मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त थे। अधिकतर स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय, रसोईघर और चारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। इससे बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था और कई बच्चे स्कूल छोड़ने को मजबूर थे।

इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ शुरू किया। इस अभियान के तहत सभी विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से सुधार कार्य किए गए। हर स्कूल में बालक और बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और मिड-डे मील की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश के अधिकतर विद्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस हो चुके हैं, जिससे शिक्षा का वातावरण बेहतर हुआ है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा से वंचित रह जाना केवल किसी एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की क्षति है। आज का बच्चा ही कल का डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, उद्यमी और नेतृत्वकर्ता बनेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि हर बच्चा स्कूल पहुंचे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे।उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे ‘स्कूल चलो अभियान’ को एक जनआंदोलन का रूप दें। अगले 15 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर हर घर तक पहुंचने और बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार लगातार बेसिक शिक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। हर विद्यालय में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शिक्षकों को टैबलेट दिए जा रहे हैं ताकि वे तकनीक के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें।उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। एक लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकें। इसके अलावा हजारों दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेंड भी दिया जा रहा है ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो।सीएम ने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये और अनुदेशकों का 17 हजार रुपये किया गया है। साथ ही सभी शिक्षण कर्मियों को स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिल सके।अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्कूल खोलना नहीं, बल्कि उनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां बच्चे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार करने, उन्हें गतिविधियों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने की अपील की।पूरा कार्यक्रम शिक्षा सुधार और भविष्य निर्माण के एक व्यापक विजन को सामने रखता है, जहां सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा और नई पहचान की ओर बढ़ रहा है।
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