यूपी में ‘मुन्नाभाइयों’ का बड़ा नेटवर्क, डार्क रूम सहायक भर्ती में एक ही नाम से कई नियुक्तियां

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2016 की डार्क रूम सहायक भर्ती में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने विभागीय अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा जारी परीक्षा परिणाम, स्वास्थ्य महानिदेशालय की नियुक्ति सूची और मानव  संपदा पोर्टल पर दर्ज कर्मचारियों के आंकड़ों की पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि एक ही नाम और रोल नंबर के सहारे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कई-कई लोग फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे हैं और हर साल सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। यह पूरा खेल स्वास्थ्य महानिदेशालय और मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। इस महाघोटाले का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आयोग की परीक्षा पास करने वाले सुधीर कुमार के नाम पर इस समय प्रदेश में छह अलग-अलग लोग नौकरी कर रहे हैं। इसी तरह अंशुल के नाम पर चार लोग, जबकि मनोज सिंह और रजनीकांत के नाम पर तीन-तीन लोग अलग-अलग जगहों पर वेतन उठा रहे हैं। पड़ताल के दौरान ऐसे दो दर्जन से अधिक मामले सामने आए हैं। इसके अलावा धीरज कुमार सिंह, कीर्ति गुप्ता, नवनीत यादव, पवन कुमार, प्रदीप कुमार, पुष्पेंद्र कुमार, राहुल कुमार, सर्वेश कुमार, सौरव कुमार और विनीत सिंह के नाम पर भी दो-दो लोग विभाग में कार्यरत हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए शातिरों ने किसी के पिता के नाम की स्पेलिंग बदल दी, तो किसी की जन्मतिथि में हेरफेर कर दिया। हालांकि, मानव संपदा पोर्टल पर इन सभी की जॉइनिंग डेट, सैलरी बैंक अकाउंट नंबर और ईएचआरएमएस आईडी पूरी तरह अलग-अलग दर्ज हैं, जिससे इस फर्जीवाड़े की पोल खुल गई।

यह पूरा मामला वर्ष 2015 में शुरू हुआ था, जब आयोग ने डार्क रूम सहायक के 355 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। इसमें 90 अंकों की लिखित परीक्षा और 10 अंकों का इंटरव्यू था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने परिणाम स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेजा था। इसके बाद काउंसलिंग के जरिए चयनित अभ्यर्थियों को जिले आवंटित किए गए। तत्कालीन महानिदेशक सुनील श्रीवास्तव और निदेशक पैरामेडिकल एससी त्रिपाठी के हस्ताक्षर से जून 2016 में 272 लोगों की और जुलाई 2016 में 65 लोगों की सूची जारी की गई थी, जबकि 18 अभ्यर्थियों ने जॉइनिंग नहीं की थी। इस तरह कुल 337 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। अब जब शुरुआती तौर पर सिर्फ 36 नामों का मिलान मानव संपदा पोर्टल से किया गया, तो उसमें से 15 नाम पूरी तरह फर्जी पाए गए। जानकारों का कहना है कि अगर इस पूरी भर्ती की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए, तो 337 स्वीकृत पदों के सापेक्ष प्रदेश में 500 से अधिक लोग नौकरी करते हुए मिलेंगे।

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