यूपी में बिजली बिल पर बड़ी राहत! जुलाई से बदल जाएगा पूरा हिसाब

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। लंबे समय से बिजली दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच अब संकेत मिल रहे हैं कि जुलाई के पहले सप्ताह में घोषित होने वाले नए बिजली टैरिफ में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार, बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना बेहद कम है। इसके उलट स्मार्ट मीटर, ईंधन अधिभार (एफपीपीसीए), घरेलू व्यवसायिक कनेक्शन और शिकायत निस्तारण से जुड़े कई अहम बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) जल्द ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों का ऐलान कर सकता है। आयोग ने बिजली कंपनियों की जनसुनवाई पूरी कर ली है और राज्य सलाहकार समिति की बैठक के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

बिजली कंपनियों ने मांगी थी दर बढ़ाने की मंजूरी

प्रदेश की सभी बिजली वितरण कंपनियों की ओर से पावर कॉर्पोरेशन ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में लगभग 3,995 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 के लिए करीब 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व अंतर बताया है। यानी कुल 16,448 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देते हुए बिजली दरों में बढ़ोतरी की मांग की गई थी।हालांकि नियामक आयोग के सूत्रों के मुताबिक फिलहाल बिजली दरें बढ़ाने के बजाय उपभोक्ताओं को राहत देने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह प्रदेश के करोड़ों घरेलू, ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी होगी।

स्मार्ट मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा?

नए टैरिफ में सबसे बड़ा फैसला स्मार्ट मीटर को लेकर हो सकता है। पावर कॉर्पोरेशन चाहता है कि स्मार्ट मीटर लगाने पर होने वाला करीब 3,838 करोड़ रुपये का खर्च उपभोक्ताओं से वसूला जाए और इसे बिजली टैरिफ में शामिल किया जाए।लेकिन नियामक आयोग इस मांग को खारिज कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो स्मार्ट मीटर लगाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।इसके अलावा स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों के बीच पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई गाइडलाइन भी जारी की जा सकती है। अभी तक स्मार्ट मीटरों की जांच के लिए पांच प्रतिशत ‘चेक मीटर’ लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती। आयोग अब इस पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी में है।

जुलाई से बदलेगा ईंधन अधिभार का पूरा गणित

बिजली उपभोक्ताओं के लिए दूसरी सबसे बड़ी राहत ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) यानी फ्यूल सरचार्ज की नई गणना से मिल सकती है।उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन की मौजूदा गणना प्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के अनुरूप नहीं माना है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि जुलाई से ईंधन अधिभार की गणना नए और पारदर्शी तरीके से की जाए।राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का दावा है कि पिछले 14 महीनों से गलत तरीके से ईंधन अधिभार की गणना होने के कारण उपभोक्ताओं से लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई है।परिषद ने आयोग से मांग की है कि यह अतिरिक्त राशि उपभोक्ताओं को वापस दिलाई जाए। यदि इस पर सकारात्मक फैसला आता है तो लाखों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल सकती है।

घर में दुकान चलाने वालों को भी मिल सकती है राहत

नए बिजली टैरिफ में उन लोगों के लिए भी राहत की संभावना है जो अपने घर से छोटी दुकान, क्लिनिक या अन्य व्यवसाय संचालित करते हैं।फिलहाल ऐसे उपभोक्ताओं को वाणिज्यिक (कमर्शियल) कनेक्शन लेना पड़ता है, जिससे बिजली बिल काफी बढ़ जाता है। आयोग इस व्यवस्था में बदलाव पर भी विचार कर रहा है ताकि छोटे व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम किया जा सके।इसके साथ ही बहुमंजिला इमारतों में बिजली कनेक्शन देने के नियमों में भी संशोधन की संभावना जताई जा रही है।

1912 हेल्पलाइन पर शिकायतों के निस्तारण के लिए सख्त नियम

बिजली उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत समय पर समाधान न मिलने की रहती है। इसे देखते हुए नियामक आयोग 1912 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी नए और सख्त नियम लागू कर सकता है।यदि बिजली कंपनियां तय समय में शिकायतों का समाधान नहीं करतीं तो उनके खिलाफ जवाबदेही तय की जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद है।

बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ी

इस बीच पावर कॉर्पोरेशन ने स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को भी राहत देते हुए जून 2026 के पोस्टपेड बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 29 जून कर दी है।जिन उपभोक्ताओं को एसएमएस या मैसेजिंग ऐप के जरिए बिल नहीं मिला है, वे अपनी खाता संख्या या कनेक्शन संख्या के माध्यम से संबंधित डिस्कॉम की स्वचालित सेवा या 1912 हेल्पलाइन से बिल की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

जुलाई का फैसला करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए अहम

अब प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की नजर जुलाई के पहले सप्ताह पर टिकी है, जब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग नए बिजली टैरिफ की घोषणा करेगा।यदि आयोग बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करता और स्मार्ट मीटर, ईंधन अधिभार तथा अन्य प्रस्तावित राहतों को मंजूरी देता है, तो यह फैसला प्रदेश के इतिहास में बिजली उपभोक्ताओं के लिए सबसे राहतभरे फैसलों में से एक माना जाएगा।ऐसे में आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि प्रदेश के लोगों का बिजली बिल कम होगा या बिजली कंपनियों की मांगों को प्राथमिकता मिलेगी। फिलहाल संकेत यही हैं कि इस बार आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।

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