इस्लामाबाद पाकिस्तान के कराची में सेना के रेंजर्स मुख्यालय पर हुए बड़े आतंकी हमले के बाद पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तेजी से बदलती नजर आ रही है। हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में व्यापक सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सरकार का दावा है कि इस ऑपरेशन में सीमा पार सक्रिय आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है और 29 आतंकियों को मार गिराया गया है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी हवाई हमलों में दर्जनों नागरिकों की भी मौत हुई है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।इस पूरे घटनाक्रम पर भारत भी करीबी नजर बनाए हुए है। हालांकि भारत की ओर से किसी सैन्य प्रतिक्रिया की बात नहीं कही गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी सीमा और क्षेत्रीय हालात की लगातार समीक्षा कर रही हैं। हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
कराची हमला बना बड़े सैन्य अभियान की वजह
शनिवार को कराची स्थित पाकिस्तान रेंजर्स के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हथियारबंद आतंकियों ने हमला कर दिया। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, हमले में सुरक्षा बलों के जवान मारे गए और कई घायल हुए। प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। इसके बाद पाकिस्तान ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

अफगान सीमा पर शुरू हुआ बड़ा ऑपरेशन
हमले के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों में इंटेलिजेंस आधारित ग्राउंड ऑपरेशन और हवाई हमले शुरू किए। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तरार ने कहा कि अभियान के दौरान अफगान सीमा के निकट मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बड़ी मात्रा में हथियार एवं गोला-बारूद नष्ट किया गया। सरकार का दावा है कि इस कार्रवाई में 29 आतंकवादी मारे गए।
अफगानिस्तान ने लगाए नागरिकों की मौत के आरोप
पाकिस्तान के दावों के बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने अलग तस्वीर पेश की है। काबुल का कहना है कि पाकिस्तानी हवाई हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, मारे गए और कई घायल हुए। अफगान प्रशासन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
क्यों बढ़ रही है पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर चुनौती?
विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद से पाकिस्तान-अफगान सीमा लगातार अस्थिर बनी हुई है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि उसकी सीमा के पार सक्रिय आतंकी समूह उसके सुरक्षा बलों पर हमले करते हैं। दूसरी ओर, अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच समय-समय पर सैन्य तनाव और जवाबी कार्रवाई देखने को मिलती रही है।
भारत की नजर क्यों है इस घटनाक्रम पर?
कराची हमले और उसके बाद पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई पर भारत भी सतर्क नजर बनाए हुए है। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। हालिया घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की ओर से लगाए गए कुछ आरोपों को भारत ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान को बिना आधार के आरोप लगाने के बजाय अपने यहां आतंकवाद के ढांचे पर ध्यान देना चाहिए।सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी सीमा पर बढ़ते तनाव का असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल भारत की ओर से किसी अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।
क्या पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ेगा असर?
विश्लेषकों के अनुसार, यदि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। सीमा पार आतंकवाद, शरणार्थी संकट, अवैध हथियारों की आवाजाही और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियां पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।यदि पाकिस्तान अपने अभियान को लंबा खींचता है या दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई तेज होती है, तो क्षेत्र में कूटनीतिक और सुरक्षा तनाव और बढ़ सकता है। दूसरी ओर, यदि दोनों पक्ष बातचीत और समन्वय का रास्ता अपनाते हैं, तो हालात सामान्य होने की संभावना भी बनी रह सकती है।
अब आगे क्या?
फिलहाल पाकिस्तान का सैन्य अभियान जारी है और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। वहीं अफगानिस्तान ने भी घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है, क्योंकि यह तनाव केवल दो देशों का मामला नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ा विषय बनता जा रहा है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान का यह अभियान सीमा पार सक्रिय आतंकी नेटवर्क को कमजोर कर पाएगा, या फिर यह तनाव आने वाले दिनों में और व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप लेगा। इसका जवाब आने वाले दिनों की घटनाएं तय करेंगी।
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