देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शुमार बदरीनाथ धाम एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले में समिति के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।सरकार ने समिति को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। लेकिन यह मामला केवल चढ़ावे की कथित हेराफेरी तक सीमित नहीं है। बीकेटीसी पहले भी वित्तीय अनियमितताओं, ऑनलाइन दान व्यवस्था और विवादित नियुक्तियों को लेकर सवालों के घेरे में रही है। ऐसे में यह मामला अब केवल एक कर्मचारी तक सीमित न रहकर मंदिर समिति की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
चढ़ावे की गिनती के दौरान सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की नियमित गणना के दौरान कथित गड़बड़ी की आशंका सामने आई। प्रारंभिक स्तर पर मिले इनपुट के बाद मामला गंभीर माना गया और तत्काल आंतरिक जांच शुरू कर दी गई।इसके बाद समिति ने आरोपी वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित करते हुए उन्हें दान गणना और प्रोटोकॉल से जुड़े सभी दायित्वों से हटा दिया। साथ ही मामले से जुड़े कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए और जांच पूरी होने तक सभी संबंधित रिकॉर्ड तथा सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए।

तीन सदस्यीय समिति करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी।
समिति यह पता लगाएगी कि—
- चढ़ावे की गिनती में कहीं कोई वित्तीय अनियमितता हुई या नहीं।
- यदि गड़बड़ी हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
- क्या इसमें किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका भी रही।
- भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या सुधार जरूरी हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी विवादों में रही है BKTC
यह पहला मौका नहीं है जब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति विवादों में आई हो। पिछले कुछ वर्षों में समिति पर कई बार वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।सूत्रों के अनुसार, पहले भी समिति के वित्तीय लेन-देन को लेकर शिकायतें हुई थीं। मामला इतना गंभीर हो गया था कि इसकी जांच जिला पुलिस से लेकर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) स्तर तक पहुंची थी।हालांकि लंबी जांच के बावजूद उन मामलों में क्या निष्कर्ष निकला और किसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी। यही वजह है कि हर नए विवाद के साथ पुराने सवाल भी फिर सामने आने लगते हैं।
QR कोड से मिले दान पर भी उठे थे सवाल
वर्ष 2023 में बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन दान व्यवस्था शुरू की गई थी। मंदिर परिसर में जगह-जगह QR कोड लगाए गए, ताकि श्रद्धालु डिजिटल माध्यम से दान कर सकें।लेकिन कुछ समय बाद यह सवाल उठने लगे कि QR कोड के जरिए जमा हुई करोड़ों रुपये की दान राशि किस बैंक खाते में गई और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।इन सवालों पर उस समय भी कई चर्चाएं हुईं, लेकिन पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। आज चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद डिजिटल दान व्यवस्था को लेकर उठे पुराने सवाल भी फिर चर्चा में हैं।

2020 में अवैध नियुक्तियों पर भी मचा था बवाल
बीकेटीसी का नाम इससे पहले वर्ष 2020 में अवैध नियुक्तियों को लेकर भी सुर्खियों में आया था।उस समय आरोप लगे थे कि समिति में नियमों को दरकिनार कर कुछ नियुक्तियां की गईं। मामला बढ़ने के बाद तत्कालीन बीकेटीसी अध्यक्ष स्वर्गीय मोहन प्रसाद थपलियाल को विवादित नियुक्तियां निरस्त करनी पड़ी थीं।इस घटना ने भी समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब नए विवाद ने एक बार फिर पुराने मामलों की याद ताजा कर दी है।
सीसीटीवी फुटेज से खुलेंगे कई राज?
चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में जांच एजेंसियों की नजर अब मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों पर है।समिति ने सभी संबंधित फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि जांच के दौरान इन्हीं फुटेज के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि दान की गिनती के दौरान क्या हुआ, कौन-कौन मौजूद था और कहीं किसी स्तर पर प्रक्रिया में गड़बड़ी तो नहीं हुई।यदि फुटेज में कोई संदिग्ध गतिविधि सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

श्रद्धालुओं का भरोसा सबसे बड़ी जिम्मेदारी
बदरीनाथ धाम केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं और अपनी श्रद्धा से करोड़ों रुपये का दान भी करते हैं।ऐसे में दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखना मंदिर प्रशासन और समिति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता साबित होती है, तो इससे केवल वित्तीय नुकसान नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास पर भी असर पड़ सकता है।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। तीन सदस्यीय समिति अगले 15 दिनों में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि चढ़ावे में कथित हेराफेरी के पीछे लापरवाही थी, प्रक्रिया की कमजोरी थी या फिर किसी प्रकार की सुनियोजित अनियमितता।इस बीच बीकेटीसी की कार्यप्रणाली, पुराने वित्तीय विवाद, ऑनलाइन दान व्यवस्था और नियुक्तियों से जुड़े मामलों को लेकर भी बहस तेज हो गई है।अब श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच रिपोर्ट में क्या खुलासे होते हैं और क्या इस बार दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है, या फिर पहले की तरह यह मामला भी लंबी जांच के बाद फाइलों तक सीमित रह जाता है।
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