कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित एयरपोर्ट परिसर की बांकरा मस्जिद को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद के आह्वान पर राज्यभर की हजारों मस्जिदों में लोगों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर मस्जिद में प्रवेश पर रोक लगाकर धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए गए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एयरपोर्ट सुरक्षा और उड़ान संचालन को ध्यान में रखकर उठाया गया है।इस घटनाक्रम ने एक बार फिर धार्मिक अधिकार, सार्वजनिक सुरक्षा और संवैधानिक संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
कोलकाता एयरपोर्ट परिसर के भीतर स्थित बांकरा मस्जिद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इसके विरोध में जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल) ने राज्यभर में शांतिपूर्ण विरोध का आह्वान किया।शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। कई स्थानों पर नमाज़ पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गई।एहतियात के तौर पर मस्जिद और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
‘आज भारत का काला दिन’— मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह केवल एक मस्जिद का मुद्दा नहीं बल्कि धार्मिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।उन्होंने कहा,
“आज भारत के लिए काला दिन है। बांकरा मस्जिद को बदनाम किया गया। हमने हमेशा शांति बनाए रखी और किसी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं किया।”
उन्होंने दावा किया कि पूरे पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।हालांकि इस दावे के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा
प्रदर्शन के दौरान कहीं से भी हिंसा या तोड़फोड़ की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई।पुलिस ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। एयरपोर्ट और मस्जिद परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाई गई।प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
मौलाना ने लगाए कई आरोप
सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि—
- मस्जिद समिति ने प्रशासन और एयरपोर्ट अधिकारियों को पहले ही पत्र लिखकर जुमे की नमाज़ की अनुमति मांगी थी।
- उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
- उन्होंने मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की।
- इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।
उन्होंने कहा कि उनका अगला कदम अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा।

आखिर मस्जिद को हटाने की चर्चा क्यों?
इस पूरे विवाद की जड़ कोलकाता एयरपोर्ट के विस्तार से जुड़ी बताई जा रही है।
जानकारों के अनुसार—
- एयरपोर्ट के रनवे के विस्तार की योजना लंबे समय से लंबित है।
- यदि पहले रनवे पर मरम्मत होती है तो दूसरे रनवे का अधिक उपयोग करना पड़ेगा।
- दूसरे रनवे के विस्तार में बांकरा मस्जिद का स्थान तकनीकी चुनौती माना जा रहा है।
- विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि उड़ानों की सुरक्षा और बड़े विमानों के संचालन के लिए कुछ संरचनाओं को स्थानांतरित करना आवश्यक हो सकता है।
हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।
एयरपोर्ट प्रशासन का पक्ष
एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि पूरा मामला सुरक्षा मानकों से जुड़ा है।
उनका तर्क है कि—
- एयरपोर्ट परिसर में अनियंत्रित आवाजाही सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।
- रनवे के नजदीक भीड़ जुटना विमान संचालन के लिहाज से संवेदनशील विषय है।
- सभी निर्णय नागरिक उड्डयन सुरक्षा मानकों के अनुरूप लिए जा रहे हैं।
कानूनी लड़ाई की तैयारी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब इस मामले को अदालत में ले जाएगी।
संगठन का कहना है कि—
- उनके पास वर्ष 2004 से जुड़े कई दस्तावेज मौजूद हैं।
- वे अदालत के सामने अपना पक्ष रखेंगे।
- संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल
मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है।विपक्षी दल राज्य सरकार और प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ एजेंसियों की सलाह के अनुसार निर्णय लिए जाते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि कानूनी और राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन सकता है।
धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सार्वजनिक सुरक्षा
यह विवाद एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़ा करता है—
- क्या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए धार्मिक स्थलों पर प्रतिबंध उचित है?
- यदि सुरक्षा आवश्यक हो तो धार्मिक अधिकारों और प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?
संविधान दोनों पक्षों—धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा—को महत्व देता है। इसलिए अंतिम समाधान न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों के संतुलन पर निर्भर करेगा।
अब सबकी नजर अदालत पर
फिलहाल पश्चिम बंगाल में बांकरा मस्जिद विवाद शांतिपूर्ण विरोध के बाद नए कानूनी चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है।यदि मामला अदालत पहुंचता है, तो वहां यह तय होगा कि एयरपोर्ट सुरक्षा आवश्यकताओं और धार्मिक अधिकारों के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित किया जाए।तब तक प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों से संवाद के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश में जुटा है।
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

