250 करोड़ के कॉल सेंटर कांड में बड़ा मोड़! समिट बिल्डिंग की मालकिन को पुलिस का नोटिस, अब मकान मालिक की भूमिका भी जांच के घेरे में

Editorial
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लखनऊ राजधानी लखनऊ के चर्चित समिट बिल्डिंग फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर कांड में जांच लगातार नई परतें खोल रही है। अमेरिकी नागरिकों से 250 करोड़ रुपये से अधिक की कथित साइबर ठगी के मामले में अब पुलिस ने कार्रवाई का दायरा और बढ़ा दिया है। अब तक इस मामले में 119 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन अब जांच सीधे उस इमारत के मालिकाना पक्ष तक पहुंच गई है, जहां से यह पूरा नेटवर्क संचालित होने का आरोप है।साइबर क्राइम थाना, लखनऊ ने समिट बिल्डिंग की मालकिन रुचि अग्रवाल (पत्नी संदीप अग्रवाल), जो हाइनेस इन्फ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी हैं, को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 179 के तहत नोटिस जारी किया है। पुलिस ने दो दिन के भीतर भवन स्वामित्व, किराएदार की पहचान, रेंट एग्रीमेंट, पुलिस वेरिफिकेशन, एनओसी और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अब मकान मालिक की भूमिका पर उठे सवाल

पुलिस की जांच अब केवल कॉल सेंटर संचालकों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने बड़े स्तर पर संचालित कथित साइबर ठगी के दौरान भवन मालिक की क्या भूमिका रही। क्या किराए पर कार्यालय देने से पहले निर्धारित नियमों का पालन किया गया? क्या किराएदारों का पुलिस सत्यापन कराया गया? क्या भवन स्वामी को वहां चल रही गतिविधियों की जानकारी थी? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए यह नोटिस जारी किया गया है।पुलिस का मानना है कि यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया या तथ्यों को छिपाया गया, तो जांच का दायरा और विस्तृत हो सकता है।

दो दिन में मांगे अहम दस्तावेज

जारी नोटिस में रुचि अग्रवाल से निम्न दस्तावेज मांगे गए हैं—

  • भवन के स्वामित्व से संबंधित अभिलेख।
  • किराएदार का पूरा विवरण और पहचान पत्र।
  • रेंट एग्रीमेंट की प्रमाणित प्रति।
  • पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट।
  • आवश्यक एनओसी एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए या जांच में सहयोग नहीं किया गया, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सह-आरोपी बनाने की चेतावनी

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए या जांच के दौरान तथ्यों को छिपाने अथवा भ्रामक जानकारी देने की पुष्टि हुई, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

250 करोड़ की कथित साइबर ठगी का मामला

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब पुलिस ने विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहे एक कथित फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पर छापा मारा। जांच एजेंसियों के अनुसार, यहां से विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिकी नागरिकों, को तकनीकी सहायता और अन्य सेवाओं के नाम पर कथित रूप से निशाना बनाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक अब तक की जांच में 119 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से 250 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ठगी की गई।

आर्थिक जांच से जुड़े नाम भी चर्चा में

इस मामले के सामने आने के बाद कारोबारी और वित्तीय संबंधों की भी जांच की जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों और आरोपों में यह भी कहा गया है कि संदीप अग्रवाल का नाम कारोबारी पीयूष रस्तोगी से जोड़ा जा रहा है और कुछ पुराने मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा अन्य एजेंसियों द्वारा जांच का उल्लेख किया गया है।हालांकि इन आरोपों पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ इस मामले में किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध नहीं हुआ है, और न ही उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वे इस कॉल सेंटर प्रकरण में किसी अपराध के दोषी हैं। जांच एजेंसियां तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ा रही हैं।

किराए पर संपत्ति देने वालों के लिए भी बड़ा संदेश

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यावसायिक भवनों को किराए पर देते समय किराएदार का पुलिस सत्यापन, वैध दस्तावेज और गतिविधियों की बुनियादी जांच कितनी जरूरी है। यदि किसी परिसर का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए होता है, तो जांच एजेंसियां भवन स्वामी की भूमिका की भी पड़ताल कर सकती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद प्रदेशभर के व्यावसायिक भवन मालिकों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि किराए पर संपत्ति देने से पहले सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करना आवश्यक है।

जांच अभी जारी, कई और खुलासों की संभावना

साइबर क्राइम थाना और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड, किराएदारी दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।फिलहाल, समिट बिल्डिंग कॉल सेंटर कांड की जांच अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां केवल कॉल सेंटर संचालकों ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े अन्य पक्षों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा रही है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेगी।

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