पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और फारस की खाड़ी में लगातार हो रहे समुद्री हमलों के बीच भारत ने पहली बार बेहद गंभीर तस्वीर सामने रखी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सबसे अधिक भारतीय नाविकों की मौत हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांति, सुरक्षित समुद्री व्यापार तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इन हमलों में कई भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं, जिससे भारत सरकार की चिंता और बढ़ गई है।
- ‘सबसे ज्यादा भारतीय नाविकों की जान गई’
- ईरान के सामने दर्ज कराया कड़ा विरोध
- होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारत की चिंता
- ‘संवाद ही समाधान का रास्ता’
- पीओके में विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तान को घेरा
- दक्षिण चीन सागर पर भी दोहराया भारत का रुख
- विदेश मंत्री की खाड़ी यात्रा पर भी जानकारी
- भारत की प्राथमिकता—हर भारतीय की सुरक्षा
‘सबसे ज्यादा भारतीय नाविकों की जान गई’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रणधीर जायसवाल ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में सबसे अधिक मौतें भारतीय नाविकों की हुई हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार रात जिन दो जहाजों पर हमला हुआ, उनमें कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे।उनके अनुसार एक जहाज पर 12 भारतीय नागरिक मौजूद थे, जिनमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। वहीं दूसरे जहाज पर 18 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें 9 लोग घायल हुए हैं, जबकि दो की हालत गंभीर बनी हुई है।सरकारी सूत्रों के अनुसार 28 फरवरी 2026 से अब तक खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन भारतीय अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इन आंकड़ों ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है।

ईरान के सामने दर्ज कराया कड़ा विरोध
भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत सरकार ने तत्काल कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए ईरान के उप मिशन प्रमुख को तलब किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने ईरानी पक्ष के सामने अपनी गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज कराया है।उन्होंने कहा कि भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि निर्दोष नागरिकों और व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमले तुरंत रुकने चाहिए। भारत ने यह भी दोहराया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना होगा और बातचीत का रास्ता अपनाना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारत की चिंता
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार इस बात की वकालत करता रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बनी रहनी चाहिए।उन्होंने कहा कि यह केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इस समुद्री मार्ग पर संकट बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है।भारत ने सभी संबंधित देशों से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार के सैन्य तनाव से बचें।
‘संवाद ही समाधान का रास्ता’
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध के बजाय कूटनीति और संवाद में देखता है।रणधीर जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष बातचीत की मेज पर लौटें और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशें। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार बढ़ती हिंसा वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
पीओके में विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तान को घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी भारत का पक्ष रखा।रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में हो रहे प्रदर्शन वहां के लोगों के दशकों से चले आ रहे शोषण, मौलिक अधिकारों के हनन और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान सरकार विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराए।
दक्षिण चीन सागर पर भी दोहराया भारत का रुख
दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का रुख पहले की तरह स्पष्ट है।भारत ने दोहराया कि समुद्री मार्गों और हवाई क्षेत्र में आवागमन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) का सम्मान किया जाना चाहिए।रणधीर जायसवाल ने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में होना चाहिए।
विदेश मंत्री की खाड़ी यात्रा पर भी जानकारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की हालिया खाड़ी यात्रा का भी उल्लेख किया गया।रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री ने कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान का दौरा किया, जहां उन्होंने शीर्ष नेतृत्व और अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ व्यापक बातचीत की।इन बैठकों में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति प्रमुख मुद्दे रहे। उन्होंने कहा कि भारत और खाड़ी देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
भारत की प्राथमिकता—हर भारतीय की सुरक्षा
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सरकार विदेशों में रह रहे प्रत्येक भारतीय नागरिक और नाविक की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। प्रभावित भारतीयों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव और लगातार हो रहे समुद्री हमलों के बीच भारत का यह सख्त संदेश साफ है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। साथ ही सरकार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय रहकर क्षेत्र में शांति, सुरक्षित व्यापारिक मार्ग और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रयास करती रहेगी।
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