ब्रेक फेल…चीख-पुकार और मौत! परिवार के सामने खाई में समा गईं दो मांएं

Editorial
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नैनीताल की वादियों में बिताए गए खुशनुमा पल, झील में बोटिंग की यादें और परिवार के साथ बिताया गया एक यादगार दिन। किसी ने नहीं सोचा था कि घर वापसी का यही सफर कुछ परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा। मेरठ के एक ही परिवार के 29 लोग जब नैनीताल घूमकर लौट रहे थे, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों बाद उनकी खुशियां मातम में बदल जाएंगी। कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग पर हुआ एक दर्दनाक हादसा दो परिवारों से उनकी मांओं को छीन ले गया और कई लोग जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जूझते नजर आए। बुधवार देर शाम कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग पर लाल मिट्टी के पास एक टेंपो ट्रैवलर अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई की ओर जा झुका। बताया जा रहा है कि वाहन के ब्रेक अचानक फेल हो गए थे। चालक नईम ने आखिरी क्षण तक वाहन को संभालने की कोशिश की, लेकिन तेज रफ्तार और ढलान के सामने उसके सारे प्रयास बेकार साबित हुए। हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि चालक समेत 27 लोग घायल हो गए। मृतक महिलाओं की पहचान नाजमीन और फरद बेगम के रूप में हुई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के वक्त टेंपो ट्रैवलर में चीख-पुकार मच गई थी। जैसे ही चालक ने यात्रियों को बताया कि ब्रेक काम नहीं कर रहे हैं, वाहन में बैठे लोगों की सांसें थम गईं। कोई दुआएं मांगने लगा तो कोई अपने बच्चों को सीने से लगाकर बैठ गया। चालक नईम ने गाड़ी को रोकने के लिए कई प्रयास किए। उसने वाहन को डिवाइडर से टकराकर गति कम करने की कोशिश की, लेकिन रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि डिवाइडर टूट गया। इसके बाद वाहन एक पेड़ से टकराया और खाई की तरफ झुक गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन के भीतर बैठे यात्री अपनी सीटों से उछल गए। पीछे बैठी नाजमीन और फरद बेगम आगे की ओर आ गईं। इस दौरान वाहन का शीशा टूट गया और दोनों महिलाएं अपने पति और बच्चों की आंखों के सामने खाई में जा गिरीं। परिवार के लोगों ने उन्हें पकड़ने और बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि कोई उन्हें मौत के मुंह में जाने से नहीं रोक सका। कुछ ही पलों में खुशियों से भरा सफर मातम में बदल चुका था।

मेरठ के इस्लामाबाद काला फैक्टरी क्षेत्र के रहने वाले कई रिश्तेदार परिवार मिलकर नैनीताल घूमने आए थे। दिनभर सभी ने झील में बोटिंग की, बाजारों में घूमे और तस्वीरें खिंचवाईं। लेकिन वापसी के दौरान कालाढूंगी से पहले यह दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वाहन में फंसे लोग मदद के लिए चीखने लगे। कई बच्चे बुरी तरह सहम गए थे और महिलाएं रो-रोकर अपनों को खोज रही थीं। धमोला निवासी अजय और जैक्सन सबसे पहले स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना समय गंवाए राहत और बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से वाहन में फंसे 27 लोगों को बाहर निकाला गया। कई घायल दर्द से कराह रहे थे तो कुछ बेहोशी की हालत में थे। दो छोटे बच्चों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। अजय और जैक्सन ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अपनी निजी कार से कई घायलों को सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया, जबकि अन्य को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन भी हरकत में आ गया। सुशीला तिवारी अस्पताल को हाई अलर्ट पर रखा गया। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल बेड खाली करवाए और डॉक्टरों की विशेष टीम को इलाज में लगाया गया। अस्पताल पहुंचते ही घायलों और उनके परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। कोई अपने बेटे को ढूंढ रहा था तो कोई अपनी मां की सलामती के लिए डॉक्टरों से गुहार लगा रहा था। अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार कुल 21 घायलों को एसटीएच में भर्ती कराया गया है, जिनमें 9 महिलाएं, 10 पुरुष और 2 बच्चे शामिल हैं। कई लोगों के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। आधा दर्जन घायलों का सीटी स्कैन कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि कई घायल अभी भी गंभीर स्थिति में हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं छह अन्य घायलों का इलाज कालाढूंगी के स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।इस हादसे ने एक बार फिर कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग के कुख्यात प्रिया बैंड की खतरनाक हकीकत उजागर कर दी है। यह मोड़ पहले से ही ब्लैक स्पॉट घोषित है। पिछले दो वर्षों में यहां कई बड़े हादसे हो चुके हैं। मई 2024 में दिल्ली जा रहा एक टेंपो ट्रैवलर ब्रेक फेल होने से पलट गया था, जिसमें नौ लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। दिसंबर 2024 में नोएडा से आए पर्यटकों के वाहन के पलटने से दो युवतियों की मौत हो गई थी। इसी महीने एक अन्य हादसे में महाराष्ट्र के पर्यटक भी घायल हुए थे। इसके बावजूद इस ब्लैक स्पॉट पर प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए।

हादसे के बाद परिवहन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त टेंपो ट्रैवलर 24 सीटर था, लेकिन उसमें 29 लोग सवार थे। यानी वाहन क्षमता से अधिक यात्रियों को लेकर चल रहा था। सवाल यह भी उठ रहा है कि नैनीताल से कालाढूंगी तक के पूरे सफर में किसी चौकी या परिवहन अधिकारी ने इस ओवरलोड वाहन को क्यों नहीं रोका। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पर्यटन सीजन में नियमों की खुलेआम अनदेखी होती है और जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंद लेते हैं।अब इस हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी है। जिन बच्चों ने सुबह अपनी मां के साथ हंसते हुए तस्वीरें खिंचवाई थीं, शाम होते-होते वही बच्चे उन्हें हमेशा के लिए खो चुके थे। नैनीताल की खूबसूरत यादें अब इस परिवार के लिए एक ऐसे दर्दनाक हादसे की याद बन गई हैं, जिसे शायद वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। वहीं हादसे ने प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब तक लापरवाही और ओवरलोडिंग लोगों की जान लेती रहेगी।

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