नई दिल्ली भारत की अध्यक्षता में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर राजधानी दिल्ली में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के नेता हिस्सा लेंगे। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई है कि बैठक के दौरान दुनिया से जुड़े अहम मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दुनिया के कई देशों के नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में जुटेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह बैठक वैश्विक कल्याण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रचनात्मक विचार-विमर्श का मंच बनेगी।पीएम मोदी ने अपने संदेश के साथ संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया। इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने अच्छे लोगों के साथ संगति, संवाद और मैत्रीपूर्ण संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश सम्मेलन की भावना में संवाद, सहयोग और आपसी समझ की भूमिका को सामने रखता है।

12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा BRICS Summit
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इसी क्रम में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन के लिए राजधानी में सुरक्षा से लेकर आयोजन स्थल तक व्यापक तैयारियां की गई हैं।भारत मंडपम को इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक के लिए तैयार किया जा रहा है। आयोजन स्थल पर गुरुवार रात तक तैयारियां अंतिम दौर में थीं। सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी मेहमानों और प्रतिनिधियों के स्वागत से लेकर बैठकों और अन्य कार्यक्रमों के लिए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।ब्रिक्स सम्मेलन को भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस मंच पर दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है।

क्या है BRICS Summit का एजेंडा?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न साझा मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहेंगे।सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता अपने-अपने दृष्टिकोण साझा करेंगे और आपसी महत्व के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इसका उद्देश्य ब्रिक्स के भीतर सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर साझा चुनौतियों को लेकर संवाद को मजबूत करना है।यानी इस बार BRICS Summit का फोकस केवल सदस्य देशों के बीच आर्थिक या संस्थागत सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े विषय भी चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
पीएम मोदी ने क्यों दिया सकारात्मक संवाद पर जोर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया के सामने कई जटिल अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में बड़े बहुपक्षीय मंचों पर देशों के बीच संवाद और सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है।पीएम मोदी ने अपने संदेश में सकारात्मक और सार्थक चर्चा की उम्मीद जताकर यह संकेत दिया कि भारत BRICS मंच का इस्तेमाल रचनात्मक बातचीत और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहता है।प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए संस्कृत श्लोक का भाव भी इसी विचार से जुड़ा है। इसमें अच्छे और गुणी लोगों की संगति, उनके साथ संवाद तथा मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखने की बात कही गई है। इसके जरिए आपसी सद्भाव और सहयोग को शांति की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है।
दुनिया की नजरें दिल्ली पर
18वें BRICS Summit के आयोजन के साथ इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली पर निगाहें टिकी हुई हैं। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और नेताओं के राजधानी पहुंचने के बीच भारत मंडपम में सम्मेलन से जुड़ी तैयारियां तेज कर दी गई हैं।BRICS का मंच पिछले वर्षों में वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन भारत को अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का अवसर भी देता है।सम्मेलन के दौरान नेताओं के बीच औपचारिक बैठकों के साथ विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। इन चर्चाओं में साझा हितों और सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
भारत मंडपम में तैयारियां अंतिम दौर में
BRICS Summit के लिए नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम को विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। आयोजन स्थल पर मंच, प्रतिनिधियों के बैठने, बैठक कक्ष और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी तैयारियों से जुड़े अपडेट साझा किए गए हैं। इनमें दिल्ली की विरासत और भारत मंडपम में चल रही तैयारियों को प्रमुखता दी गई है।आयोजन स्थल पर सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अलग-अलग देशों से आने वाले प्रतिनिधियों को देखते हुए प्रशासन और संबंधित एजेंसियां तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
BRICS Summit भारत के लिए क्यों अहम?
भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह सम्मेलन देश के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ भारत बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अपनी भूमिका सामने रखेगा, वहीं दूसरी ओर विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर भी मिलेगा।BRICS के भीतर सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों और साझा चुनौतियों पर भी संवाद की संभावनाएं इस मंच को महत्वपूर्ण बनाती हैं। भारत लंबे समय से बहुपक्षीय सहयोग, संवाद और विकास से जुड़े विषयों पर अपनी भूमिका को प्रमुखता से सामने रखता रहा है।ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का सम्मेलन से पहले सकारात्मक और सार्थक चर्चा पर जोर देना भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं की झलक देता है।
दिल्ली में जुटेंगे कई देशों के नेता
12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन के लिए विभिन्न देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंचेंगे। भारत की राजधानी इस दौरान एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनेगी।सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाओं और नेताओं के बयानों पर दुनिया की नजर रहेगी। खासतौर पर वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के रुख तथा सहयोग की संभावनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।फिलहाल भारत मंडपम में तैयारियां अंतिम चरण में हैं और दिल्ली BRICS Summit की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार होती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सकारात्मक और सार्थक संवाद के संदेश के बीच अब सभी की नजरें 12 और 13 सितंबर को होने वाली बैठकों पर हैं। यह सम्मेलन न केवल BRICS देशों के बीच सहयोग की दिशा तय करने में अहम हो सकता है, बल्कि वैश्विक मुद्दों पर भारत की भूमिका और प्राथमिकताओं को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से सामने रखेगा।
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