मुरादाबाद तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) का ऑडिटोरियम शुक्रवार को शायरी, कविता, प्रेम, संवेदना और गंगा-जमुनी तहजीब के रंग में सराबोर नजर आया। महान शायर और ‘शहंशाह-ए-गजल’ हजरत अली सिकंदर ‘जिगर’ मुरादाबादी की पुण्यतिथि के अवसर पर यहां ‘ये इश्क नहीं आसां…’ ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे नामचीन कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से ऐसी महफिल सजाई कि देर तक सभागार तालियों और वाह-वाह की आवाज से गूंजता रहा।यह साहित्यिक आयोजन भारतीय सूफी फाउंडेशन एवं गजल अकादमी की पेशकश और तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के विशेष सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने श्रोताओं के रूप में हिस्सा लिया। डीन, डायरेक्टर्स, प्रिंसिपल्स, फैकल्टी सदस्यों और साहित्य प्रेमियों की मौजूदगी ने आयोजन को और खास बना दिया।
जिगर मुरादाबादी को समर्पित रही पूरी शाम
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जिगर मुरादाबादी की साहित्यिक विरासत और उनकी शायरी को श्रद्धांजलि देना रहा। मंच पर मौजूद कवियों और शायरों ने अपने-अपने अंदाज में जिगर की शायरी, उनके व्यक्तित्व और मुरादाबाद से उनके गहरे रिश्ते को याद किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता इंजीनियर अनवर कैफी ने की, जबकि आयोजन का संयोजन पत्रकार एवं शायर सूफी कशिश वारसी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद डॉ. माधव शर्मा ने अतिथियों, कवियों और शायरों का स्वागत करते हुए उनका परिचय कराया।सूफी कशिश वारसी ने मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके बाद एक के बाद एक कवियों और शायरों ने अपनी प्रस्तुतियां देकर माहौल को साहित्यिक रंग में रंग दिया।

शायरी में दिखा प्रेम, इंसानियत और अमन का रंग
मुशायरे में पेश की गई रचनाओं में प्रेम, संवेदना, सामाजिक सरोकार, अमन, इंसानियत और सूफियाना भाव प्रमुख रूप से दिखाई दिए। हास्य और व्यंग्य से जुड़ी प्रस्तुतियों ने जहां दर्शकों को खूब गुदगुदाया, वहीं गंभीर और भावनात्मक रचनाओं ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया।डॉ. अना देहलवी ने जिगर मुरादाबादी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनकी साहित्यिक विरासत को याद किया। वहीं इंजीनियर अनवर कैफी ने जिगर और मुरादाबाद के बीच की अदबी निस्बत को अपने अंदाज में पेश किया।सूफी कशिश वारसी ने जिगर की शायरी में मौजूद इश्क और रवानी को अपने कलाम के माध्यम से सामने रखा। उनके शब्दों में जिगर की शायरी को मुरादाबाद की अदबी पहचान से जोड़ने की कोशिश नजर आई।
देशभर से पहुंचे कवियों ने बांधा समां
इस खास साहित्यिक संध्या में कई जाने-माने कवि और शायर शामिल हुए। डॉ. पूनम चौहान, अमान रामपुरी, अनिका एम, कर्नल संजय चतुर्वेदी, मुंतजिर फिरोजाबादी, अनस फैजी, राहुल शर्मा, इब्राहिम अली जीशान, सूफी कशिश वारसी और डॉ. अना देहलवी समेत अन्य रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।जयपुर से पहुंचे इब्राहिम अली जीशान ने जिगर को श्रद्धांजलि देते हुए अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं का ध्यान खींचा। राहुल शर्मा ने जिगर की याद और मुरादाबाद की अदबी पहचान को अपनी रचना के जरिए सामने रखा।खालिदा बेताब ने जिगर की शायरी को नमन करते हुए उनकी रचनात्मकता और साहित्यिक योगदान को याद किया। वहीं कर्नल संजय चतुर्वेदी ने जिगर के व्यक्तित्व और उनकी मोहब्बत भरी शायरी पर अपनी प्रस्तुति दी।मुंतजिर फिरोजाबादी ने अपने हास्य अंदाज से महफिल में रंग भर दिया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों के बीच खूब ठहाके और तालियां सुनाई दीं। डॉ. पूनम चौहान ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति से कार्यक्रम को यादगार बनाने में योगदान दिया।

विद्यार्थियों के लिए साहित्य से जुड़ने का अवसर
कार्यक्रम में 500 से अधिक टीएमयू विद्यार्थियों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस मुशायरे ने युवाओं को देश के प्रतिष्ठित कवियों और शायरों को करीब से सुनने और समझने का अवसर दिया।आयोजकों का कहना रहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को किताबों और कक्षाओं से आगे साहित्य की जीवंत दुनिया से जोड़ने का काम करते हैं। मंच पर कविता और शायरी की अलग-अलग विधाओं की प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों को साहित्य की विविधता से परिचित कराया।कार्यक्रम में प्रो. हरवंश दीक्षित, डीन फैकल्टी ऑफ लॉ, टीएमयू, एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ. रविप्रकाश सिंह, दीपक मलिक सहित विश्वविद्यालय के कई फैकल्टी सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे।
मुरादाबाद की गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक
पूरे आयोजन में मुरादाबाद की अदबी पहचान और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत झलक दिखाई दी। जिगर मुरादाबादी की याद में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक मुशायरा या कवि सम्मेलन नहीं रहा, बल्कि साहित्य, संस्कृति और इंसानियत को जोड़ने वाला मंच बन गया।जिगर मुरादाबादी की शायरी में प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की जो गहराई दिखाई देती है, उसी परंपरा को कार्यक्रम में मौजूद कवियों और शायरों ने अपने-अपने अंदाज में आगे बढ़ाया। यही वजह रही कि कार्यक्रम में मौजूद श्रोता देर तक प्रस्तुतियों से जुड़े रहे।
आयोजकों ने जताया आभार
कार्यक्रम के संयोजक सूफी कशिश वारसी ने सभी अतिथियों, कवियों, शायरों, साहित्य प्रेमियों और टीएमयू प्रशासन का आभार जताया। स्वागताध्यक्ष राहुल शर्मा ने भी सभी आगंतुकों का आत्मीय स्वागत किया।कार्यक्रम के अंत में सूफी कशिश वारसी और पोएट्री क्लब के सचिव की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। आयोजकों ने कहा कि जिगर मुरादाबादी की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ऐसे आयोजनों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।‘ये इश्क नहीं आसां…’ ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन ने टीएमयू में साहित्य और संस्कृति के प्रति एक नई ऊर्जा पैदा की। जिगर मुरादाबादी को समर्पित यह अदबी शाम मुरादाबाद की साहित्यिक पहचान और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरती को एक बार फिर सामने लाने में सफल रही।
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