
बुंदेलखंड भीषण गर्मी और 46 डिग्री के पार पहुंच चुके पारे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के लिए यह मौसम एक बड़ा वरदान साबित हो रहा है। आम जनजीवन के लिए चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं भले ही मुसीबत बनी हों, लेकिन इसका दूसरा और बेहद सुखद पहलू सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। सुबह जल्दी सूर्योदय और देर शाम तक तीखी धूप रहने की वजह से अकेले मई महीने में ही बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा का उत्पादन करीब 20 फीसदी तक बढ़ गया है। इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-2 परियोजना के तहत कबरई के 220 केवी उपकेंद्र से एक निजी कंपनी के सोलर प्लांट के जरिए पहली बार 70 मेगावाट सौर ऊर्जा की सफल आपूर्ति शुरू कर दी गई है। कभी पानी के संकट और बड़े पैमाने पर पलायन के लिए विख्यात रहा बुंदेलखंड आज सौर ऊर्जा के दम पर पूरे उत्तर प्रदेश को रोशन कर रहा है। यहाँ की करीब 25 हजार एकड़ बंजर जमीन पर सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। वर्तमान में यहाँ 885 मेगावाट यूटिलिटी स्केल सौर पावर परियोजना से बिजली मिल रही है, जिसमें मई महीने में ही 17 मेगावाट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह 336 मेगावाट की ओपेन एक्सेस सौर परियोजनाओं में भी करीब छह मेगावाट का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के दिनों में लंबे समय तक धूप मिलने से उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन दोपहर में तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाने पर सोलर पैनल्स में लगे सेमीकंडक्टर्स की कार्यक्षमता थोड़ी प्रभावित भी होती है। अगर तापमान 25 से 35 डिग्री के बीच बना रहे, तो उत्पादन में वृद्धि का यह आंकड़ा 30 फीसदी तक पहुंच सकता है।उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपी पीपीटीसीएल) बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित हो रहे 4000 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांटों से बिजली की सुचारू निकासी के लिए 5400 करोड़ रुपये की लागत से कुल 21 विद्युत केंद्र तैयार कर रहा है। इनमें से 10 उपकेंद्रों को चालू किया जा चुका है, जबकि चरखारी, डकोर, बांगरा, बांदा और मड़ावरा जैसे अन्य उपकेंद्र भी जल्द ही क्रियाशील हो जाएंगे। उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2026-27 के लिए सौर ऊर्जा का एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत सोलर पार्क की क्षमता को 14 हजार मेगावाट और रूफटॉप सोलर को 4500 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। बुंदेलखंड में फिलहाल 3840 मेगावाट क्षमता के अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क को भी मंजूरी मिल चुकी है, जिसमें से 430 मेगावाट पर उत्पादन जारी है और बाकी पर तेजी से काम चल रहा है। हरित ऊर्जा की यह सफल शुरुआत प्रदेश की बिजली व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रही है।
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