

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान भूरा अली, जाने आलम और इकबाल के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान तीनों ने जिस तरीके से ठगी की पूरी कहानी बताई, उसने पुलिस को भी चौंका दिया।आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे रात के समय ऐसे निर्माणाधीन मकानों, फैक्ट्रियों और गोदामों को निशाना बनाते थे, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते थे। वहां से कॉपर वायर चोरी करने के बाद उसके अंदर का पूरा तांबा निकाल लेते थे। इसके बाद खाली हिस्से में सीमेंट भर दिया जाता था और दोनों सिरों पर असली कॉपर के छोटे-छोटे टुकड़े फिट कर दिए जाते थे, ताकि देखने और वजन करने पर माल असली लगे।इसके बाद यह नकली कॉपर स्क्रैप अलग-अलग जिलों के कबाड़ कारोबारियों को ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे पहले भी कई लोगों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी कर चुके हैं।गिरोह अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करता था। जब भी किसी नए ग्राहक से सौदा किया जाता, तब नकली दस्तावेज दिखाकर खुद को सरकारी अथवा अधिकृत स्क्रैप ठेकेदार बताया जाता था। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास से अवैध तमंचे और कारतूस भी बरामद हुए। पूछताछ में उन्होंने बताया कि यदि कभी लोग उन पर शक करते या उन्हें पकड़ने की कोशिश करते तो वे हथियार दिखाकर डराने और मौके से फरार होने की कोशिश करते थे।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो कारें भी बरामद की हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के माल की ढुलाई और ग्राहकों तक पहुंचने में किया जाता था। इसके अलावा बड़ी मात्रा में नकली कॉपर वायर, फर्जी दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है।
मुरादाबाद पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसके तार अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा चोरी किए गए कॉपर वायर कहां-कहां से लाए जाते थे।एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि थाना सिविल लाइन्स पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों से नकली कॉपर वायर, दो कारें, अवैध असलहे और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी चोरी किए गए कॉपर वायर के अंदर से तांबा निकालकर उसमें सीमेंट भर देते थे और उसे असली स्क्रैप बताकर बेचकर लाखों रुपये की ठगी करते थे। मामले की गहन जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।इस कार्रवाई को मुरादाबाद पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि समय रहते इस गैंग का पर्दाफाश होने से न केवल कई कबाड़ कारोबारियों को भविष्य में ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकेगा, बल्कि कॉपर वायर चोरी की घटनाओं पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। पुलिस ने स्क्रैप कारोबारियों से अपील की है कि किसी भी बड़े सौदे से पहले माल की गुणवत्ता की पूरी जांच करें, विक्रेता के दस्तावेजों का सत्यापन करें और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।
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