अनूपशहर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब! श्री शनि महादेव धाम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का दिव्य समापन

Editorial
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अनूपशहर भारद्वाज कॉलोनी स्थित श्री शनि महादेव धाम रविवार को आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। कई दिनों से चल रहे प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा का समापन धार्मिक उल्लास, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे के साथ अत्यंत भव्य एवं दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। समापन दिवस पर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। “हर-हर महादेव” और “जय श्री शनि देव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य मनीष कौशिक जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के समापन प्रवचन में धर्म, भक्ति, सेवा, त्याग और सदाचार का महत्व विस्तार से बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य को अपने जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा, सत्य का पालन और अच्छे कर्म ही सच्ची ईश्वर भक्ति हैं।

‘धर्म से जुड़कर ही समाज और राष्ट्र होगा मजबूत’

आचार्य मनीष कौशिक जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ज्ञान है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवारों में संस्कारों का वातावरण बनाएं, बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ें और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा सद्भाव का संदेश फैलाएं।उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलता है तो उसका जीवन ही नहीं, पूरा समाज सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने जीवन में ईश्वर के बताए मार्ग पर चलकर मानवता की सेवा करें।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई विशेष पूजा-अर्चना

समापन अवसर पर श्री शनि महादेव धाम के संस्थापक एवं महोत्सव के आयोजक पंडित देवेंद्र भारद्वाज ने अपने परिवार के साथ वैदिक विधि-विधान के अनुसार भगवान शनि देव एवं भगवान महादेव की विशेष पूजा-अर्चना की।पूजन के दौरान क्षेत्र, प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की गई। वैदिक मंत्रों की गूंज और हवन की पवित्र अग्नि ने पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा में भाग लेकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

भजन-कीर्तन से गूंज उठा मंदिर परिसर

पूरे समापन समारोह के दौरान भक्ति रस से सराबोर भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत शिव और शनि महिमा से जुड़े भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए।मंदिर परिसर में लगातार “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “जय श्री शनि देव” के जयकारे गूंजते रहे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।

विशाल भंडारे में उमड़ा जनसैलाब

धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और धर्म लाभ प्राप्त किया।भंडारे की व्यवस्थाएं बेहद सुव्यवस्थित रहीं। स्वयंसेवकों ने पूरे समर्पण के साथ श्रद्धालुओं की सेवा की, जिससे किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। दूर-दराज के गांवों और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे।

सामाजिक समरसता का बना प्रतीक

यह धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का भी सुंदर उदाहरण बना। विभिन्न समाजों, वर्गों और आयु वर्ग के लोग एक साथ धार्मिक आयोजन में शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण कर एकता एवं सद्भाव का संदेश दिया।कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, विभिन्न राजनीतिक दलों के जिला एवं क्षेत्रीय पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की भव्यता और अनुशासित व्यवस्थाओं की सराहना की।

आयोजक ने जताया सभी का आभार

महोत्सव के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पंडित देवेंद्र भारद्वाज ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों, कथा व्यास, सहयोगियों, स्वयंसेवकों एवं व्यवस्थापकों का हृदय से आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि यह आयोजन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों की आस्था, विश्वास और सहयोग का परिणाम है। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करते रहने का संकल्प व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि श्री शनि महादेव धाम हमेशा से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है और आगे भी जनकल्याण एवं सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

आस्था, संस्कृति और एकता का संदेश

प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा का यह भव्य आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का उत्सव बन गया।श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं और लोगों में सेवा, सद्भाव तथा संस्कारों की भावना को मजबूत करते हैं।श्री शनि महादेव धाम में संपन्न यह दिव्य महोत्सव श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति की ऐसी अमिट छाप छोड़ गया, जिसकी स्मृतियां लंबे समय तक श्रद्धालुओं के मन में जीवंत रहेंगी।

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