रक्षा मंत्रालय ने जारी की छठी स्वदेशीकरण सूची, 405 सैन्य सामान अब देश में होंगे तैयार; आत्मनिर्भर भारत को बड़ा boost

Editorial
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नई दिल्ली रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए रक्षा मंत्रालय ने छठी Positive Indigenisation List (PIL) जारी की है। इस सूची में 405 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं को शामिल किया गया है। इन वस्तुओं को चरणबद्ध तरीके से देश में ही विकसित और निर्मित किया जाएगा, जिससे रक्षा उत्पादन में घरेलू उद्योग की भूमिका और मजबूत होगी। रिपोर्टों के मुताबिक इस पहल से करीब 3,070 करोड़ रुपये की कारोबारी संभावना बनने का अनुमान है।नई सूची में सैन्य प्लेटफॉर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण सिस्टम, सब-सिस्टम, कलपुर्जे, स्पेयर और कच्चे माल शामिल हैं। इनमें हल्के हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान, टैंक और युद्धपोत जैसे प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म से जुड़े उपकरण भी शामिल बताए गए हैं। इसका मकसद विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करना और भारतीय कंपनियों को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में ज्यादा अवसर देना है।

405 रक्षा वस्तुओं का होगा स्वदेशीकरण

रक्षा मंत्रालय की नई छठी स्वदेशीकरण सूची में कुल 405 वस्तुओं को शामिल किया गया है। इनका स्वदेशीकरण होने के बाद संबंधित जरूरतों के लिए घरेलू निर्माताओं से खरीद को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार सूची में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण घटक भी हैं, जिनका इस्तेमाल विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म में किया जाता है।इस कदम को भारत की दीर्घकालिक रक्षा उत्पादन रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और देश में डिजाइन, विकास तथा उत्पादन की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

किन क्षेत्रों से जुड़े सामान सूची में शामिल?

छठी Positive Indigenisation List में अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म से संबंधित उपकरण और कलपुर्जे शामिल किए गए हैं। इनमें हल्के हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान, टैंक और युद्धपोत जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े सामान प्रमुख हैं। रिपोर्टों में Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों और T-72/T-90 जैसे टैंक प्लेटफॉर्म से संबंधित कुछ घटकों का भी उल्लेख किया गया है।इस तरह की सूची का उद्देश्य सिर्फ किसी एक हथियार या प्लेटफॉर्म को देश में बनाना नहीं है, बल्कि उसके साथ जुड़े सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण घटकों का स्थानीय स्तर पर विकास करना भी है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को लंबे समय में ज्यादा तकनीकी क्षमता हासिल करने का अवसर मिलता है।

3,070 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना

नई सूची से भारतीय रक्षा उद्योग के लिए बड़ा कारोबारी अवसर बनने की उम्मीद है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 405 वस्तुओं के स्वदेशीकरण से करीब 3,070 करोड़ रुपये की संभावित व्यावसायिक गतिविधि जुड़ी है।इसका फायदा बड़े रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ निजी कंपनियों, MSME और स्टार्टअप को भी मिल सकता है। रक्षा उत्पादन में छोटे और मध्यम उद्योगों की भागीदारी बढ़ने से देश में नई सप्लाई चेन विकसित होने और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार की संभावना है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने वर्ष 2021 में Positive Indigenisation Lists की शुरुआत की थी। इन सूचियों के जरिए ऐसे रक्षा सामानों की पहचान की जाती है जिन्हें चरणबद्ध तरीके से घरेलू स्तर पर विकसित और निर्मित किया जाना है।रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मई 2026 तक DPSUs के लिए पांच Positive Indigenisation Lists में 5,012 वस्तुएं अधिसूचित की जा चुकी थीं। पिछले पांच वर्षों में 15,700 से ज्यादा रक्षा वस्तुओं का स्वदेशीकरण किया गया है, जिनमें PIL से जुड़ी 3,204 वस्तुएं भी शामिल हैं।यानी छठी सूची इस पूरी प्रक्रिया को और विस्तार देने वाली कड़ी है।

SRIJAN पोर्टल से उद्योग को मिलेगा मंच

रक्षा क्षेत्र के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने SRIJAN Defence Portal शुरू किया था। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले आयातित सामान की पहचान कर उन्हें भारतीय उद्योग के माध्यम से विकसित करने का अवसर उपलब्ध कराना है।इस प्लेटफॉर्म के जरिए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और सैन्य मुख्यालय स्वदेशीकरण के लिए आवश्यक वस्तुओं को उद्योगों के सामने रखते हैं। इसमें MSME और स्टार्टअप भी भाग ले सकते हैं।इस व्यवस्था से रक्षा क्षेत्र में सिर्फ सरकारी कंपनियों पर निर्भरता कम करने और निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलती है।

रक्षा उत्पादन में भारत ने बनाई नई रफ्तार

भारत का रक्षा उत्पादन पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब चार गुना है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया और भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं।सरकार के अनुसार अब देश में करीब 65 फीसदी रक्षा उपकरणों का उत्पादन घरेलू स्तर पर हो रहा है। ऐसे में नई स्वदेशीकरण सूची को इसी बढ़ती क्षमता को और विस्तार देने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

MSME और स्टार्टअप के लिए भी बढ़ेंगे अवसर

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण का एक बड़ा असर भारतीय छोटे और मध्यम उद्योगों पर पड़ सकता है। नए उपकरणों, कलपुर्जों और सब-सिस्टम के निर्माण के लिए स्थानीय कंपनियों को आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने के अवसर मिलते हैं।सरकार पहले भी स्वदेशीकरण के जरिए MSME, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देती रही है। मई 2026 तक DPSUs की ओर से घरेलू उद्योगों को 9,782 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए जाने की जानकारी सरकार ने दी थी।

आयात निर्भरता घटाना क्यों जरूरी?

रक्षा क्षेत्र में आयात पर अत्यधिक निर्भरता किसी भी देश के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में व्यवधान या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव का असर रक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर पड़ सकता है।इसी वजह से भारत घरेलू डिजाइन, विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। नई Positive Indigenisation List इसी रणनीति का हिस्सा है। इससे महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए देश के भीतर उत्पादन क्षमता तैयार करने और भविष्य में बाहरी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

DAP 2026 से भी जुड़ा है आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

रक्षा खरीद व्यवस्था में भी सरकार स्वदेशीकरण को प्राथमिकता देने की दिशा में बदलाव कर रही है। प्रस्तावित Defence Acquisition Procedure 2026 में घरेलू डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने तथा आयात निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है।इसका व्यापक उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत करना और देश को रक्षा तकनीक तथा उत्पादन के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाना है।

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम

रक्षा मंत्रालय की छठी Positive Indigenisation List में 405 वस्तुओं को शामिल करना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। करीब 3,070 करोड़ रुपये की संभावित कारोबारी क्षमता के साथ यह सूची भारतीय कंपनियों और रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर खोल सकती है।अब चुनौती यह होगी कि सूची में शामिल वस्तुओं का स्वदेशीकरण तय समयसीमा के भीतर प्रभावी ढंग से पूरा हो और भारतीय उद्योग आवश्यक गुणवत्ता, तकनीक तथा उत्पादन क्षमता विकसित कर सके।छठी स्वदेशीकरण सूची के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का फोकस अब केवल बड़े प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके महत्वपूर्ण कलपुर्जों और सप्लाई चेन को भी देश में मजबूत करने पर है।

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