देश में स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन (ग्रीन ट्रांसपोर्ट) की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भविष्य की ईंधन व्यवस्था को लेकर ऐसा विजन पेश किया है, जो आने वाले वर्षों में देश की परिवहन प्रणाली की तस्वीर बदल सकता है। उनका कहना है कि भविष्य में दिल्ली की सार्वजनिक बसें नगर निगम के कचरे से तैयार होने वाली हाइड्रोजन गैस पर दौड़ सकती हैं।दिल्ली भाजपा के एक यूथ कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत अब पारंपरिक पेट्रोल और डीजल पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधनों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि हाइड्रोजन, इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल जैसे ईंधन भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बनने वाले हैं।
- कचरे से बनेगी हाइड्रोजन, उसी पर दौड़ेंगी बसें
- “मेरी भविष्यवाणियां गलत साबित नहीं हुईं”
- 80 लाख टन कचरे का हो चुका है इस्तेमाल
- 2027 तक ‘कचरा मुक्त भारत’ का लक्ष्य
- डीजल का विकल्प बनेगा आइसोब्यूटेनॉल
- 15 प्रतिशत ब्लेंडिंग पर चल रहा काम
- 100% वैकल्पिक ईंधन पर चले जनरेटर
- कचरे से करोड़ों की कमाई भी संभव
- 2026 तक आ सकता है नया नियम
- भारत के ऊर्जा भविष्य की नई तस्वीर
कचरे से बनेगी हाइड्रोजन, उसी पर दौड़ेंगी बसें
गडकरी ने बताया कि दिल्ली में मौजूद लैंडफिल साइटों पर जमा नगर निगम के कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके बाद बायोडाइजेस्टर तकनीक के जरिए उसी कचरे से हाइड्रोजन गैस तैयार की जाएगी।यही हाइड्रोजन भविष्य में दिल्ली की बसों का ईंधन बन सकती है। उनका मानना है कि इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि शहर के कूड़े के पहाड़ भी धीरे-धीरे खत्म होंगे।उन्होंने कहा कि यदि कचरे को समस्या नहीं बल्कि संसाधन के रूप में देखा जाए, तो उससे ऊर्जा, ईंधन और रोजगार तीनों पैदा किए जा सकते हैं।
“मेरी भविष्यवाणियां गलत साबित नहीं हुईं”
अपने संबोधन के दौरान गडकरी ने अपने अंदाज में कहा कि जब उन्होंने पानी से हाइड्रोजन तैयार कर वाहनों को चलाने की बात कही थी, तब भी लोगों ने सवाल उठाए थे।उन्होंने कहा,“लोगों ने पूछा कि यह कैसे होगा? मैंने उनसे कहा कि पिछले 50 वर्षों में क्या मेरी कोई भविष्यवाणी गलत साबित हुई है?”गडकरी का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

80 लाख टन कचरे का हो चुका है इस्तेमाल
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि दिल्ली के लैंडफिल साइटों से निकाले गए करीब 80 लाख टन कचरे का उपयोग पहले ही एक्सप्रेसवे निर्माण परियोजनाओं में किया जा चुका है।उनके अनुसार इससे यह साबित हो चुका है कि आधुनिक तकनीक के जरिए कचरे का उपयोग बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
2027 तक ‘कचरा मुक्त भारत’ का लक्ष्य
गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष 2027 तक देश को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है।इसके लिए कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, रिसाइक्लिंग, ऊर्जा उत्पादन और वैकल्पिक ईंधन निर्माण जैसी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि भविष्य में कचरा केवल नगर निगम की समस्या नहीं रहेगा, बल्कि आय का बड़ा स्रोत भी बनेगा।

डीजल का विकल्प बनेगा आइसोब्यूटेनॉल
गडकरी ने केवल हाइड्रोजन ही नहीं, बल्कि डीजल के विकल्प के रूप में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) को भी भविष्य का ईंधन बताया।उन्होंने कहा कि जिस तरह आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल (E20) सफलतापूर्वक मिलाया जा रहा है, उसी तरह सरकार अब डीजल के लिए भी नया विकल्प तैयार कर रही है।हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता। इसलिए वैज्ञानिक इथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल विकसित कर रहे हैं, जिसे डीजल में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
15 प्रतिशत ब्लेंडिंग पर चल रहा काम
गडकरी ने बताया कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण की अनुमति देने की दिशा में काम कर रही है।निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली मशीनों, कृषि उपकरणों और भारी वाहनों में इसकी टेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है।प्रारंभिक परीक्षणों में इसके परिणाम सकारात्मक बताए गए हैं।

100% वैकल्पिक ईंधन पर चले जनरेटर
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत इंजीनियरों ने दो जनरेटर सेटों को 100 प्रतिशत इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल पर सफलतापूर्वक चलाकर दिखाया है।इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि भविष्य में भारी वाहन और औद्योगिक मशीनें भी इन स्वच्छ ईंधनों पर आसानी से चल सकेंगी।
कचरे से करोड़ों की कमाई भी संभव
गडकरी ने अपने संसदीय क्षेत्र नागपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नगर निगम ट्रीटेड वेस्टवॉटर बेचकर हर साल करीब 325 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रहा है।उन्होंने कहा कि यदि देश के अन्य शहर भी आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली अपनाएं, तो कचरा आर्थिक संसाधन में बदला जा सकता है।
2026 तक आ सकता है नया नियम
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, सरकार 2026 के अंत तक डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर नई नीति लागू कर सकती है।उन्होंने बताया कि बीपीसीएल (BPCL) द्वारा किए गए शोध के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं और फिलहाल प्रस्ताव अंतिम तकनीकी मूल्यांकन और नियामकीय प्रक्रिया से गुजर रहा है।
भारत के ऊर्जा भविष्य की नई तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाइड्रोजन, इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल जैसी वैकल्पिक ईंधन तकनीकें बड़े पैमाने पर सफल होती हैं, तो भारत न केवल पेट्रोलियम आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन जैसी बड़ी समस्याओं का भी स्थायी समाधान निकाल सकेगा।नितिन गडकरी का यह विजन केवल नई तकनीक का दावा नहीं, बल्कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) की सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है। यदि दिल्ली की बसें वास्तव में कचरे से बनी हाइड्रोजन पर दौड़ती हैं और डीजल में आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग शुरू होता है, तो यह भारत के परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि इन योजनाओं के व्यापक क्रियान्वयन के लिए तकनीकी, आर्थिक और नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा किया जाना अभी बाकी है।
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