बाढ़ में ढहा अनाथ बच्चों का आशियाना, सपा नेताओं ने की मदद

Editorial
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रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद में बाढ़ और लगातार बारिश ने पहले से मुश्किल हालात में रह रहे परिवारों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। विकासखंड बढ़पुर के ग्राम बसेली में बारिश और बाढ़ के बीच एक कच्चा मकान ढह गया। इस हादसे ने एक ऐसे परिवार को खुले आसमान के नीचे ला दिया, जिसके लिए पहले से ही जिंदगी आसान नहीं थी। परिवार के बेटे और बहू की मृत्यु हो चुकी है और अब बुजुर्ग जयप्रकाश पाण्डेय अपने पोते और पोती के साथ जीवन गुजार रहे हैं।मकान गिरने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या रहने की जगह के साथ-साथ भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों की हो गई। घर का आशियाना छिनने के बाद बच्चों और बुजुर्ग के लिए मुश्किलें बढ़ गईं। परिवार की स्थिति की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता और पदाधिकारी गांव पहुंचे तथा अपनी ओर से राशन और घरेलू जरूरत का सामान उपलब्ध कराया।

बारिश और बाढ़ ने ढहा दिया कच्चा मकान

ग्राम बसेली निवासी जयप्रकाश पाण्डेय का परिवार बारिश और बाढ़ के कारण प्रभावित हुआ। बताया गया कि उनका कच्चा मकान लगातार बारिश के बीच ढह गया। मकान गिरने के बाद परिवार के पास सुरक्षित तरीके से रहने की जगह नहीं बची।परिवार पहले से आर्थिक और पारिवारिक संकट से जूझ रहा था। जयप्रकाश पाण्डेय के बेटे और बहू की मृत्यु हो चुकी है। अब वह अपने एक पोते और एक पोती के साथ रहते हैं। ऐसे में मकान का ढहना परिवार के लिए दोहरी मुसीबत बन गया।एक तरफ सिर छिपाने की जगह नहीं रही, वहीं दूसरी तरफ घर में रखे राशन और घरेलू सामान को लेकर भी संकट खड़ा हो गया। बाढ़ और बारिश से प्रभावित इलाकों में इस तरह के परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बाढ़ में ढहा अनाथ बच्चों का आशियाना
बाढ़ में ढहा अनाथ बच्चों का आशियाना

परिवार की जानकारी मिलते ही गांव पहुंचे सपा नेता

परिवार की स्थिति की जानकारी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हुई तो उन्होंने जिला संगठन के पदाधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद निवर्तमान जिला महासचिव इलियास मंसूरी और निवर्तमान जिला उपाध्यक्ष अजीत यादव समेत अन्य पार्टी पदाधिकारी बसेली गांव पहुंचे।सपा नेताओं ने परिवार से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद परिवार को राशन और घरेलू जरूरत का सामान उपलब्ध कराया गया। नेताओं ने परिवार को भरोसा दिलाया कि मुश्किल की इस घड़ी में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।स्थानीय स्तर पर मिली इस मदद से परिवार को तत्काल राहत मिली है। हालांकि, परिवार की सबसे बड़ी जरूरत अभी भी स्थायी आशियाने की है।

पोते-पोती के साथ जिंदगी गुजार रहे जयप्रकाश

जयप्रकाश पाण्डेय के परिवार की स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि उनके बेटे और बहू की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में पोते और पोती की जिम्मेदारी भी बुजुर्ग जयप्रकाश के ऊपर है।कच्चे मकान के ढह जाने के बाद बच्चों के सामने रहने की समस्या पैदा हो गई। परिवार के लिए राशन और भोजन की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे समय में सपा नेताओं द्वारा खाद्य सामग्री और घरेलू सामान उपलब्ध कराया गया।परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती स्थायी आवास की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित छत मिल सके और वे बारिश व बाढ़ के दौरान किसी खतरे में न रहें।

प्रशासन से मदद की अपील

समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिला प्रवक्ता राधेश्याम सविता ने परिवार की स्थिति को गंभीर बताते हुए प्रशासन से जरूरतमंद परिवार की मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण जिन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह ढह गए हैं, उनकी पहचान कर उन्हें सरकारी राहत और आवास योजनाओं का लाभ दिलाया जाना चाहिए।फर्रुखाबाद में इस वर्ष बाढ़ का असर कई इलाकों में देखने को मिला है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और आवास से संबंधित सहायता देने की कार्रवाई भी की गई है। सितंबर की शुरुआत में जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री दी गई थी और जिन लोगों के घर बाढ़ में बह गए थे, उनमें कुछ परिवारों को आवासीय भूमि के पट्टे भी दिए गए थे।ऐसे में बसेली के इस परिवार के मामले में भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवार सरकारी राहत और आवास सहायता के लिए पात्र है या नहीं।

अजीत यादव ने दिया मकान बनवाने का भरोसा

सपा के निवर्तमान जिला उपाध्यक्ष अजीत यादव ने परिवार को भरोसा दिलाया कि यदि प्रशासन या सरकार की ओर से मकान बनवाने की व्यवस्था नहीं होती है तो वह व्यक्तिगत स्तर पर मकान निर्माण में मदद करेंगे।उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर बच्चों के लिए दोबारा आशियाना तैयार कराने की जिम्मेदारी उठाने का प्रयास किया जाएगा। इस आश्वासन से परिवार को भविष्य में स्थायी छत मिलने की उम्मीद जगी है। मकान निर्माण की वास्तविक व्यवस्था कब और किस माध्यम से होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल परिवार को तत्काल राहत के रूप में राशन और घरेलू सामान उपलब्ध कराया गया है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी चुनौती

फर्रुखाबाद में बाढ़ का असर केवल खेतों और सड़कों तक सीमित नहीं रहा है। कई परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में जाना पड़ा। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जानकारी दी है।बसेली का यह परिवार उन लोगों की मुश्किलों को सामने लाता है जिनके पास पहले से मजबूत आर्थिक सहारा नहीं है। बुजुर्ग और दो बच्चों वाले परिवार के लिए मकान का गिरना सिर्फ एक इमारत का नुकसान नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी के सहारे का छिन जाना है।अब जरूरत है कि प्रशासन परिवार की स्थिति का स्थलीय सत्यापन कराकर पात्रता के आधार पर आवास और अन्य सरकारी सहायता उपलब्ध कराए। वहीं, स्थानीय स्तर पर सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की मदद भी ऐसे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।मकान गिरने के बाद फिलहाल सपा नेताओं की ओर से परिवार को राशन और जरूरी घरेलू सामान उपलब्ध कराया गया है। लेकिन असली राहत तब मिलेगी, जब पोते-पोती और उनके बुजुर्ग दादा को फिर से एक सुरक्षित छत मिल सके। परिवार की निगाह अब प्रशासन की मदद और स्थायी आवास की व्यवस्था पर टिकी है।

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