Farrukhabad Kisan Protest: 8 अगस्त से किसानों का अनिश्चितकालीन धरना, चक्का जाम और आमरण अनशन की चेतावनी

Editorial
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रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं होने से अब भारतीय किसान यूनियन (श्रमिक जन शक्ति) ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। 8 अगस्त 2026 से फर्रुखाबाद में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो चक्का जाम और आमरण अनशन जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।संयुक्त भारतीय किसान संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (श्रमिक जन शक्ति) की ओर से यह आंदोलन किया जा रहा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी कमलेश यादव के निर्देशन में धरना जिला कार्यालय, ग्राम रामपुर डफरपुर, विकासखंड बढ़पुर, जनपद फर्रुखाबाद में आयोजित किया जाएगा।

17 साल से समस्याओं से जूझ रहे किसान

भारतीय किसान यूनियन (श्रमिक जन शक्ति) के जिलाध्यक्ष नरोतम सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि न्याय पंचायत रामपुर डफरपुर के अंतर्गत आने वाली करीब 8 से 9 ग्राम पंचायतों के किसान पिछले लगभग 17 वर्षों से गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।किसानों के मुताबिक नगर पालिका फर्रुखाबाद के गंदे नाले, हर वर्ष आने वाली बाढ़ और जलभराव के कारण खेतों में फसलें बर्बाद होती हैं। बार-बार होने वाली फसल क्षति से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। संगठन का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए और धरना-प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला।किसान संगठन का कहना है कि वर्षों से समस्या झेल रहे किसानों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान चाहिए।

बाढ़ और नालों की समस्या बनी सबसे बड़ी परेशानी

रामपुर डफरपुर क्षेत्र में हर साल बाढ़ और जलनिकासी की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती है। संगठन के अनुसार नालों की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश और बाढ़ का पानी खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाता है।इससे एक तरफ किसानों की फसलें प्रभावित होती हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों के सामने आवागमन, आवास और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।किसान यूनियन ने मांग की है कि रामपुर क्षेत्र के पूर्व और पश्चिम दिशा में स्थित नालों का पक्का निर्माण कराया जाए, ताकि जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था हो सके और हर साल किसानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

फसल बर्बादी का मुआवजा और कर्ज माफी की मांग

किसान संगठन ने पिछले वर्षों में बाढ़ और अन्य कारणों से बर्बाद हुई फसलों का उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि फसल खराब होने के बावजूद किसानों पर बैंक और अन्य वित्तीय देनदारियों का दबाव बना रहता है।इसी को देखते हुए यूनियन ने किसानों के केसीसी ऋण, बिजली बिल और अन्य ऋणों की माफी की मांग भी रखी है।किसान नेताओं का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण जब किसान की आय प्रभावित होती है, तो उसके सामने परिवार चलाने के साथ-साथ कर्ज चुकाने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है। ऐसे में सरकार को किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज और आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग

किसान यूनियन ने बाढ़ प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आवास तथा पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जिन परिवारों को बाढ़ के कारण बार-बार नुकसान उठाना पड़ता है, उनके सुरक्षित पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।इसके अलावा क्षेत्र के सभी गांवों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग भी की गई है। संगठन का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय सुरक्षा और रोशनी की व्यवस्था बेहतर होगी।

बाढ़ प्रभावित बच्चों की फीस माफी की मांग

आंदोलन की मांगों में बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों की स्कूल फीस माफ करने की मांग भी शामिल है। किसान संगठन का कहना है कि जब परिवार प्राकृतिक आपदा से आर्थिक संकट में होता है, तो बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है।ऐसे परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए फीस में राहत देने की मांग की गई है।

सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया आसान करने की मांग

किसानों के लिए सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया को सरल करने की मांग भी आंदोलन के एजेंडे में शामिल है। संगठन का कहना है कि किसानों को सौर ऊर्जा के माध्यम से अपनी जरूरतों को पूरा करने और आय के वैकल्पिक साधन विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए।इसके लिए सरकारी प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने की मांग की गई है।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा उग्र

भारतीय किसान यूनियन (श्रमिक जन शक्ति) ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।संगठन के मुताबिक जरूरत पड़ने पर चक्का जाम, आमरण अनशन और अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जैसे कदम उठाए जाएंगे। किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

जिलाध्यक्ष बोले- आने वाली पीढ़ियों के लिए है संघर्ष

जिलाध्यक्ष नरोतम सिंह राजपूत ने कहा कि किसानों का यह संघर्ष केवल आज के किसानों के अधिकारों के लिए नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी है।उन्होंने किसानों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने और एकजुटता दिखाने की अपील की। संगठन का कहना है कि जब तक वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक किसानों की आवाज को मजबूती से उठाया जाता रहेगा।8 अगस्त से शुरू होने वाला यह धरना अब फर्रुखाबाद में किसान संगठनों और प्रशासन के बीच टकराव का नया केंद्र बन सकता है। एक तरफ किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ अब प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी कि वह किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाता है।

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