नवाबगंज थाने में कथित दलालों के जमावड़े पर सवाल

Editorial
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रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद जिले के नवाबगंज थाने में कानून-व्यवस्था के साथ अब थाना परिसर में कथित रूप से सक्रिय दलालों और बिचौलियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों के हवाले से शिकायतें सामने आई हैं कि थाना परिसर में कुछ बाहरी लोग सुबह से लेकर देर रात तक सक्रिय रहते हैं। आरोप है कि ये लोग शिकायत लेकर आने वाले फरियादियों से संपर्क कर उन्हें समझौते के नाम पर कथित तौर पर आर्थिक लेन-देन के लिए प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।इन शिकायतों ने थाने की कार्यप्रणाली, फरियादियों की सीधे सुनवाई और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सामने आए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

सुबह से ही थाना परिसर में जमावड़े का आरोप

स्थानीय लोगों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, नवाबगंज थाने में सुबह करीब आठ बजे से ही कुछ कथित बिचौलियों की मौजूदगी देखी जाती है। आरोप है कि इन लोगों का थाना परिसर में दिनभर आना-जाना बना रहता है और देर शाम तक उनकी गतिविधियां जारी रहती हैं।शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इनमें से कुछ लोग खुद को पुलिस अधिकारियों या कर्मचारियों का करीबी बताकर फरियादियों पर अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करते हैं। इससे थाना पहुंचने वाले आम लोगों को सीधे पुलिस अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने में परेशानी होने की शिकायत भी सामने आ रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि थाने में शिकायत लेकर आने वाला व्यक्ति पहले से ही किसी समस्या या विवाद से परेशान होता है। ऐसे में यदि कोई बाहरी व्यक्ति पुलिस से नजदीकी का दावा करते हुए उसे प्रभावित करने लगे तो फरियादी की परेशानी और बढ़ सकती है।

नवाबगंज थाने में कथित दलालों के जमावड़े पर सवाल
नवाबगंज थाने में कथित दलालों के जमावड़े पर सवाल

समझौते के नाम पर आर्थिक लेन-देन के आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ कथित बिचौलिये छोटे-मोटे विवादों में शामिल दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के नाम पर आर्थिक लेन-देन के लिए दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।शिकायतों के अनुसार, विवाद को खत्म कराने अथवा मामले में मदद दिलाने के नाम पर फरियादियों से रकम की मांग किए जाने की बातें सामने आई हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह स्पष्ट होना बाकी है कि किन लोगों द्वारा और किन मामलों में इस तरह की कथित गतिविधियां की गईं।यदि जांच में फरियादियों से पुलिस के नाम पर धन की मांग करने या किसी मामले में अनुचित प्रभाव डालने की बात सही पाई जाती है तो यह गंभीर मामला हो सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जरूरत होगी।

थाना प्रभारी कार्यालय तक पहुंच को लेकर भी सवाल

स्थानीय लोगों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ कथित बिचौलियों की थाना प्रभारी के कार्यालय तक लगातार पहुंच बनी रहती है। इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि बाहरी लोगों को थाना परिसर में इतनी देर तक मौजूद रहने की अनुमति किस आधार पर मिलती है।यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी व्यक्ति के थाना परिसर में दिखाई देने या पुलिसकर्मियों से बातचीत करने से किसी अवैध गतिविधि की पुष्टि नहीं होती। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आ सकती है।यदि कोई व्यक्ति लगातार थाना परिसर में रहकर पुलिस और फरियादियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है तो पुलिस अधिकारियों के लिए इसकी जांच करना जरूरी हो जाता है।

फरियादियों की सीधे सुनवाई क्यों जरूरी?

पुलिस थाने में आने वाला हर फरियादी सीधे अपनी शिकायत पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा सके, यह व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। किसी भी बाहरी व्यक्ति के माध्यम से शिकायतों के निपटारे की स्थिति बनने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना परिसर में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां फरियादी बिना किसी दबाव या बिचौलिये के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायत की स्थिति और कार्रवाई की जानकारी भी संबंधित व्यक्ति को सीधे पुलिस से मिलनी चाहिए।इससे न केवल फरियादियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठने वाली आशंकाओं को भी दूर किया जा सकेगा।

उच्च अधिकारियों से जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि थाना परिसर में कथित रूप से सक्रिय बाहरी लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि यदि किसी फरियादी से पुलिस के नाम पर धन की मांग की गई है तो इसके पीछे कौन लोग हैं और क्या किसी मामले में अनुचित तरीके से समझौता कराने का प्रयास किया गया।लोगों ने मांग की है कि थाना परिसर में अनधिकृत लोगों की गतिविधियों पर रोक लगाई जाए और फरियादियों को सीधे पुलिस अधिकारियों से मिलने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

आरोप सही मिले तो कार्रवाई जरूरी

यदि जांच में यह साबित होता है कि कुछ लोग पुलिस का नाम लेकर फरियादियों से आर्थिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे थे, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका भी सामने आती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी। यदि जांच में लगाए गए आरोप निराधार पाए जाते हैं तो पुलिस को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि थाना और पुलिस विभाग की छवि को लेकर भ्रम की स्थिति समाप्त हो।

पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार

फिलहाल नवाबगंज थाने में कथित दलालों और बिचौलियों के सक्रिय रहने को लेकर लगाए जा रहे आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस के उच्च अधिकारियों की ओर से मामले में जांच या स्पष्टीकरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।अब सवाल यह है कि क्या पुलिस प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर थाना परिसर की गतिविधियों की जांच कराएगा? क्या फरियादियों से सीधे संवाद की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी?फिलहाल नवाबगंज थाने से जुड़े इन आरोपों ने पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और फरियादियों की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है। अब निगाहें पुलिस के उच्च अधिकारियों की कार्रवाई और जांच के नतीजे पर टिकी हैं।

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