
मुजफ्फरनगर कभी नगर निगम का पार्षद, कभी रणजी क्रिकेट का खिलाड़ी, कभी खुद को फौजी बताकर लोगों का भरोसा जीतने वाला और बाद में अपहरण, दुष्कर्म, हत्या, लूट व गैंगस्टर गतिविधियों का पर्याय बन चुका सतपाल उर्फ सत्तू आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। मुजफ्फरनगर के बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास हुई देर रात की मुठभेड़ में 25 हजार रुपये का इनामी बदमाश सत्तू मारा गया। लेकिन उसके एनकाउंटर के साथ ही एक ऐसे अपराधी की कहानी भी खत्म हो गई, जिसने वर्षों तक मासूम लड़कियों और उनके परिवारों को अपने जाल में फंसाकर जिंदगी तबाह की।सत्तू की कहानी किसी फिल्मी खलनायक से कम नहीं थी। एक समय वह राजनीति और क्रिकेट की दुनिया से जुड़ा था, लेकिन बाद में अपराध की ऐसी अंधेरी राह पर चला कि उसका नाम चार राज्यों और दर्जनों थानों की पुलिस फाइलों में दर्ज हो गया।
नौकरी का झांसा, फिर अपहरण और दरिंदगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि सत्तू का सबसे खतरनाक हथियार उसकी चालाकी थी। वह रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक जगहों पर परिवारों से मेलजोल बढ़ाता था। खुद को फौजी या प्रभावशाली व्यक्ति बताकर विश्वास जीतता और फिर किशोरियों को नौकरी दिलाने का सपना दिखाता था।परिवारों को लगता था कि उनकी बेटी का भविष्य संवर जाएगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस व्यक्ति पर वे भरोसा कर रहे हैं, वही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन बनने वाला है।पुलिस के मुताबिक सत्तू कई किशोरियों को इंटरव्यू या नौकरी के बहाने कार में बैठाकर ले गया। रास्ते में उन्हें धमकाता, जंगलों या सुनसान इलाकों में ले जाकर यौन उत्पीड़न करता और फिर फरार हो जाता था।
तितावी की किशोरी बनी आखिरी शिकार
19 जून को तितावी क्षेत्र की एक किशोरी को भी उसने इसी तरह निशाना बनाया। पहले परिवार से दोस्ती की, फिर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। अगले दिन पिता और बेटी को कचहरी बुलाया।वहां उसने पिता को आधार कार्ड लाने के बहाने भेज दिया और किशोरी को कार में बैठाकर फरार हो गया। आरोप है कि उसने पंजाब ले जाकर किशोरी के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे बस में बैठाकर वापस भेज दिया।इस घटना के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी थी और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

पुलिस मुठभेड़ में हुआ अंत
सोमवार देर रात सिविल लाइन थाना पुलिस और एसओजी को सूचना मिली कि सत्तू कार से इलाके में घूम रहा है। पुलिस ने रामपुर तिराहे के पास उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।इसके बाद शुरू हुई मुठभेड़ में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में सत्तू दोनों पैरों में गोली लगने से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।मुठभेड़ में एसओजी की गाड़ी भी गोली से क्षतिग्रस्त हुई, जबकि एक दरोगा और एक सिपाही घायल हो गए।
अपराध की दुनिया में लंबा सफर
सत्तू के खिलाफ केवल अपहरण और दुष्कर्म के मामले ही नहीं थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उस पर हत्या, लूट, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट, अवैध हथियार और फायरिंग जैसे गंभीर अपराधों के 24 से अधिक मुकदमे दर्ज थे।उसके तार मुंबई के कुख्यात छोटा राजन गैंग से भी जुड़े बताए जाते हैं। वह लंबे समय तक विभिन्न जेलों में बंद रहा और अपराधियों का नेटवर्क तैयार करता रहा।
2007 में था पार्षद
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सत्तू कभी अपराधी नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि था। वर्ष 2007 में वह चंडीगढ़ नगर निगम का पार्षद रह चुका था।राजनीति में सक्रिय रहने वाला यह व्यक्ति धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में उतरता चला गया। इसके बाद उसकी पहचान एक हिस्ट्रीशीटर और गैंगस्टर के रूप में होने लगी।
रणजी क्रिकेट भी खेल चुका था
सत्तू का दूसरा चेहरा और भी चौंकाने वाला है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वह दो बार रणजी क्रिकेट प्रतियोगिता में खेल चुका था। मोहाली और जालंधर में आयोजित प्रतियोगिताओं में उसने हिस्सा लिया था।बताया जाता है कि वह भारतीय क्रिकेटर Yuvraj Singh के साथ भी क्रिकेट खेल चुका था। एक समय क्रिकेट मैदान में पहचान बनाने वाला यह खिलाड़ी बाद में अपराध की दुनिया का कुख्यात नाम बन गया।
जेल से भागने के बाद बना सिरदर्द
सत्तू इसी वर्ष 6 फरवरी को लुधियाना के सिविल अस्पताल से पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। वह बीमारी का बहाना बनाकर बार-बार अस्पताल ले जाया जाता था।तीसरी बार उसने पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय रहा और कई वारदातों को अंजाम देता रहा।
पत्नी के प्रेमी की हत्या तक का आरोप
उसके खिलाफ एक सनसनीखेज आरोप यह भी है कि उसने अपनी पत्नी के कथित प्रेमी की हत्या कर दी थी। इस मामले में भी वह जेल गया था।इतना ही नहीं, पुलिस के अनुसार उसने कई बार फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया और अलग-अलग नामों से घूमता रहा। उसके पास से एक फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ है।
खत्म हुई खौफ की कहानी
मुजफ्फरनगर पुलिस का कहना है कि सत्तू केवल एक अपराधी नहीं बल्कि एक संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा था, जो मासूम लड़कियों को निशाना बनाता था। उसके एनकाउंटर के बाद कई पुराने मामलों की भी जांच आगे बढ़ेगी।सतपाल उर्फ सत्तू की मौत के साथ एक ऐसे अपराधी का अध्याय बंद हुआ है, जिसने कभी राजनीति की, क्रिकेट खेला, जनप्रतिनिधि बना, लेकिन आखिरकार अपराध की राह चुनकर अपने जीवन का अंत पुलिस मुठभेड़ में पाया।अब सवाल यह है कि उसके नेटवर्क में शामिल बाकी लोग कौन हैं और क्या पुलिस उन सभी तक पहुंच पाएगी? फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दहशत का पर्याय बन चुके सत्तू का खौफनाक सफर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।
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