रिपोर्ट:अजीत कुमार शर्मा
अलीगढ़/अतरौली ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में शुक्रवार को एक सराहनीय पहल देखने को मिली। अतरौली क्षेत्र के गांव नहल स्थित लॉर्ड कृष्णा (बाडुल्ली सिंह) हॉस्पिटल में श्रीजी बाबा चिकित्सा संस्थान, गोवर्धन रोड, मथुरा के सहयोग से निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन कल्याणं करोति, मथुरा संस्था द्वारा किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर अपनी आंखों की जांच कराई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों का परीक्षण कर आवश्यक परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराईं। वहीं, 10 मोतियाबिंद मरीजों को ऑपरेशन के लिए चिन्हित कर भर्ती किया गया, जिनका उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया जाएगा।
ग्रामीणों को मिला विशेषज्ञ डॉक्टरों का लाभ
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर नेत्र रोगों का समय पर इलाज नहीं हो पाता। आर्थिक तंगी और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण लोग छोटी समस्या को भी लंबे समय तक नजरअंदाज कर देते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिकेत ने मरीजों की आंखों की बारीकी से जांच की।शिविर में कुल 70 मरीजों का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान मोतियाबिंद, नाखूना, परवल, कालापानी और अन्य नेत्र संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों को दवाइयां दी गईं तथा उचित उपचार की सलाह दी गई।

10 मरीजों का होगा पूरी तरह मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन
जांच के दौरान जिन मरीजों में मोतियाबिंद की गंभीर समस्या पाई गई, उनमें से 10 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चयनित किया गया। उन्हें आगे के इलाज के लिए भर्ती भी कर लिया गया है।शिविर के कोऑर्डिनेटर मनीष शर्मा ने बताया कि इन सभी मरीजों का श्रीजी बाबा चिकित्सा संस्थान, गोवर्धन रोड, मथुरा में अत्याधुनिक तकनीक से पूरी तरह निःशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा।उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति केवल पैसों की कमी के कारण अपनी आंखों की रोशनी से वंचित न रहे।
ऑपरेशन से लेकर भोजन तक सबकुछ रहेगा मुफ्त
कोऑर्डिनेटर मनीष शर्मा ने बताया कि संस्था मरीजों को सिर्फ ऑपरेशन ही नहीं बल्कि इलाज से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाएं भी निःशुल्क उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने जानकारी दी कि मरीजों को—
- आधुनिक लेंस,
- अस्पताल में पलंग और बिस्तर,
- सभी आवश्यक दवाइयां,
- ऑपरेशन के बाद चश्मा,
- पौष्टिक भोजन,
- चिकित्सकीय देखभाल
पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास है कि मरीज बिना किसी आर्थिक बोझ के स्वस्थ होकर अपने घर लौटें।
ग्राम प्रधान बोले— गांवों तक पहुंचनी चाहिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
शिविर के दौरान ग्राम प्रधान चौधरी जगवीर सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो आर्थिक अभाव के कारण समय पर इलाज नहीं करा पाते।
उन्होंने कहा,
“हमारा प्रयास है कि गांवों में रहने वाले जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शहरों जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। ऐसे निःशुल्क चिकित्सा शिविर भविष्य में भी लगातार आयोजित किए जाएंगे ताकि किसी भी जरूरतमंद को इलाज से वंचित न रहना पड़े।”
उन्होंने संस्था और चिकित्सकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है।

ग्रामीणों ने जताया आभार
शिविर में पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों ने इस पहल की सराहना की। कई बुजुर्गों ने बताया कि वे लंबे समय से आंखों की समस्या से परेशान थे, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज नहीं करा पा रहे थे।निःशुल्क जांच और ऑपरेशन की सुविधा मिलने से मरीजों के चेहरों पर राहत साफ दिखाई दी। कई लोगों ने कहा कि यदि ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित हों तो ग्रामीणों को काफी लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य जागरूकता का भी दिया संदेश
शिविर के दौरान चिकित्सकों ने लोगों को आंखों की नियमित जांच कराने, समय पर इलाज कराने और आंखों की साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने बताया कि मोतियाबिंद जैसी बीमारी का समय रहते इलाज करा लिया जाए तो आंखों की रोशनी आसानी से बचाई जा सकती है।इसके साथ ही लोगों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से आंखों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी जागरूक किया गया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर अस्पताल और गांव के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इनमें प्रबंधक अन्नू चौधरी, सुखवीर सूर्यवंशी, अर्जुन सिंह, हुलासी राम, रामपाल सिंह, नरेंद्र चौधरी, तेजवीर सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, वीरेंद्र काका, भगवती बघेल, ललित कश्यप, चंद्रराज सविता सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल बना शिविर
गांव नहल में आयोजित यह निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर केवल इलाज का माध्यम नहीं बना, बल्कि ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद और नई रोशनी लेकर आया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं, आधुनिक जांच, मुफ्त ऑपरेशन और इलाज की संपूर्ण व्यवस्था ने यह साबित किया कि यदि सामाजिक संस्थाएं और चिकित्सा संस्थान मिलकर काम करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंचाई जा सकती हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शिविर न केवल लोगों की आंखों की रोशनी बचाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं। यही कारण है कि नहल गांव का यह आयोजन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
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