‘वंदे भारतम’ से देश के कोने-कोने में प्रतिभा की तलाश: गौतम अदाणी का बड़ा दांव, अब गांवों से निकलेंगे भारत के अगले स्टार्टअप सितारे

Editorial
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भारत में स्टार्टअप क्रांति की चर्चा अक्सर बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और पुणे जैसे बड़े शहरों तक सीमित दिखाई देती है। लेकिन देश के छोटे कस्बों, गांवों और दूरदराज के इलाकों में भी ऐसी अनगिनत प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिनके पास बड़े विचार तो हैं, लेकिन उन्हें मंच और संसाधन नहीं मिल पाते। अब इन्हीं छिपी हुई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अदाणी समूह ने एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अपने 64वें जन्मदिन के अवसर पर ‘वंदे भारतम’ नामक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम लॉन्च कर देश के नवाचार और उद्यमिता क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। यह पहल केवल एक प्रतियोगिता या स्टार्टअप कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उन लोगों को सामने लाना है जो बड़े शहरों की चमक-दमक से दूर रहकर भी अपने विचारों और नवाचारों से समाज में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। ‘वंदे भारतम’ के जरिए भारत के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 800 से अधिक जिलों से इनोवेटर्स, उद्यमियों, बदलावकर्ताओं और समस्या-समाधानकर्ताओं की तलाश की जाएगी। गौतम अदाणी का मानना है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अवसरों का समान वितरण अब भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि जब उन्होंने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत की थी, तब उनके पास कोई विशेष संसाधन नहीं थे। जो कुछ भी उन्होंने हासिल किया, वह भारत की धरती और यहां मिले अवसरों की वजह से संभव हुआ। उनका कहना है कि अगर उन्हें अवसर मिला और वे आगे बढ़ सके, तो देश का कोई भी युवा ऐसा कर सकता है, बशर्ते उसे सही मंच और सही मार्गदर्शन मिले।

भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है। हजारों स्टार्टअप देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं और लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश सफल स्टार्टअप संस्थापक अभी भी कुछ चुनिंदा महानगरों से आते हैं। ऐसे में ‘वंदे भारतम’ का उद्देश्य इस दायरे को तोड़ना और देश के हर जिले तक उद्यमिता की पहुंच सुनिश्चित करना है।इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें भाग लेने के लिए किसी व्यक्ति का पंजीकृत स्टार्टअप चलाना जरूरी नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति, जिसके पास कोई नया विचार, प्रोटोटाइप, शुरुआती स्तर का उद्यम या पहले से स्थापित व्यवसाय है, इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकता है। इससे उन लाखों युवाओं के लिए रास्ते खुलेंगे जो संसाधनों की कमी के कारण अपने विचारों को बड़े मंच तक नहीं पहुंचा पाते।कार्यक्रम में तकनीक, विनिर्माण, कृषि, स्थिरता, पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक शिल्प, सामाजिक नवाचार और सामुदायिक समाधान जैसे अनेक क्षेत्रों से प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी। इसका अर्थ है कि यह पहल केवल टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप तक सीमित नहीं होगी, बल्कि गांवों और छोटे शहरों में काम कर रहे उन लोगों को भी अवसर देगी जो स्थानीय समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं।अदाणी समूह ने इस पहल को और अधिक समावेशी बनाने के लिए महिलाओं, आदिवासी उद्यमियों, ग्रामीण नवप्रवर्तकों और दिव्यांग उद्यमियों के लिए विशेष मार्ग भी तैयार किए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के विकास में हर वर्ग की भागीदारी हो और प्रतिभा केवल संसाधनों के अभाव में दबकर न रह जाए।

‘वंदे भारतम’ के तहत पूरे देश में एक संरचित चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। इसके बाद चयनित प्रतिभागियों को अगले चरणों में मार्गदर्शन और परामर्श दिया जाएगा। अंततः 75 सर्वश्रेष्ठ फाइनलिस्टों का चयन होगा, जिन्हें अहमदाबाद में आयोजित विशेष मेंटरशिप और निवेश कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलेगा।यह कार्यक्रम केवल पुरस्कार जीतने तक सीमित नहीं रहेगा। फाइनलिस्टों को देश के शीर्ष उद्योगपतियों, निवेशकों, उद्यमिता विशेषज्ञों और कॉरपोरेट नेताओं के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्हें अपने विचारों को बेहतर बनाने, व्यवसाय को विस्तार देने और निवेश हासिल करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही रणनीतिक साझेदारियों और संभावित निवेश के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।स्वतंत्रता दिवस के आसपास आयोजित होने वाले ग्रैंड फिनाले में चयनित प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। यहां विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार और विशेष सम्मान भी दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि यह आयोजन देशभर के युवा उद्यमियों के लिए एक बड़ा लॉन्चपैड साबित हो सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अगले दशक में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में यदि छोटे शहरों और गांवों की प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जाता है, तो देश की आर्थिक प्रगति को और अधिक गति मिल सकती है। यही कारण है कि ‘वंदे भारतम’ को केवल एक कॉर्पोरेट पहल नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय अभियान के रूप में देखा जा रहा है।गौतम अदाणी की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में स्टार्टअप और उद्यमिता को लेकर नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। सरकार भी ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में ‘वंदे भारतम’ जैसे कार्यक्रम उन युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकते हैं जो बड़े सपने तो देखते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए मंच नहीं मिल पाता।देश के 800 से अधिक जिलों में छिपी प्रतिभाओं को खोजने का यह अभियान आने वाले समय में भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई कहानी लिख सकता है। हो सकता है कि अगले बड़े स्टार्टअप का संस्थापक किसी महानगर की चमकदार इमारत से नहीं, बल्कि किसी छोटे गांव या कस्बे से निकलकर सामने आए। ‘वंदे भारतम’ की असली ताकत भी यही है—भारत की मिट्टी में छिपी संभावनाओं को पहचानना और उन्हें उड़ान देने का अवसर प्रदान करना।

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