हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र विवाह, प्रेम, तपस्या और अटूट समर्पण की कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या और अटूट संकल्प के कारण भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।हरतालिका तीज विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं, तीज की कथा सुनती हैं और अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
- हरतालिका तीज का नाम कैसे पड़ा?
- हरतालिका तीज की पौराणिक कथा
- माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शिव
- हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत की परंपरा
- पूजा में शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा
- हरतालिका तीज में श्रृंगार का महत्व
- हरतालिका तीज पर कथा सुनने का महत्व
- हरतालिका तीज और शिव-पार्वती का संबंध
- देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है तीज
- हरतालिका तीज का संदेश

हरतालिका तीज का नाम कैसे पड़ा?
हरतालिका शब्द दो शब्दों से मिलकर बना माना जाता है—हरत और आलिका। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती की सखी उन्हें उनके पिता के घर से वन में ले गई थीं, ताकि माता पार्वती अपनी इच्छा के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर सकें।इसी वजह से इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा। ‘हरत’ का अर्थ हरण करना और ‘आलिका’ का अर्थ सखी माना जाता है। अर्थात सखी द्वारा माता पार्वती को वहां से ले जाना, जहां उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य से किया जा सकता था।

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए बचपन से ही तपस्या करना चाहती थीं। उनके मन में भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा थी।माता पार्वती के पिता हिमवान भगवान विष्णु से उनका विवाह करना चाहते थे। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो वह बहुत चिंतित हुईं, क्योंकि उनका मन भगवान शिव को पति रूप में स्वीकार कर चुका था।माता पार्वती ने अपनी सखी को अपनी इच्छा बताई। सखी ने उनकी परेशानी को समझा और उन्हें एक घने वन में ले गईं। वहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर दी।कहा जाता है कि माता पार्वती ने लंबे समय तक तपस्या की और कठिन परिस्थितियों में भी अपना संकल्प नहीं छोड़ा। उन्होंने भगवान शिव की आराधना करते हुए अपना ध्यान पूरी तरह शिव भक्ति में लगा दिया।

माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शिव
माता पार्वती की कठोर तपस्या और अटूट संकल्प से भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने माता पार्वती को दर्शन दिए और उनकी इच्छा पूरी करने का वरदान दिया।इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ। धार्मिक मान्यता में इस विवाह को प्रेम, तपस्या और समर्पण की जीत के रूप में देखा जाता है।यही वजह है कि हरतालिका तीज के दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत की परंपरा
हरतालिका तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखने की परंपरा का पालन करती हैं। इसका अर्थ है कि व्रत के दौरान अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता। हालांकि व्रत रखने का तरीका व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।किसी भी तरह का कठोर उपवास करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए धार्मिक व्रत के नियमों का पालन स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना बेहतर होता है।
पूजा में शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा
हरतालिका तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करने की परंपरा है। कई स्थानों पर महिलाएं मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करती हैं।पूजा स्थल को सजाया जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को वस्त्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद शिव-पार्वती की आराधना और हरतालिका तीज की कथा का श्रवण किया जाता है।पूजा के दौरान माता पार्वती से सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।
हरतालिका तीज में श्रृंगार का महत्व
हरतालिका तीज पर महिलाओं के श्रृंगार की भी विशेष परंपरा है। कई स्थानों पर महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और पारंपरिक आभूषणों से श्रृंगार करती हैं।सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग से जुड़े सामान जैसे चूड़ी, सिंदूर, बिंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री का इस्तेमाल करती हैं। धार्मिक मान्यता में इसे वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।वहीं अविवाहित युवतियां भी इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाती हैं और भगवान शिव-माता पार्वती से अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं।
हरतालिका तीज पर कथा सुनने का महत्व
हरतालिका तीज के दिन पूजा के बाद व्रत कथा सुनने और पढ़ने की विशेष परंपरा है। माना जाता है कि माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की कथा सुनने से श्रद्धालुओं को इस पर्व के धार्मिक महत्व की जानकारी मिलती है।इस कथा का मुख्य संदेश केवल वैवाहिक जीवन तक सीमित नहीं है। यह धैर्य, संकल्प, विश्वास और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश भी देती है।माता पार्वती की कथा बताती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि व्यक्ति अपने संकल्प पर कायम रहे तो वह अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकता है।
हरतालिका तीज और शिव-पार्वती का संबंध
भगवान शिव और माता पार्वती को हिंदू धर्म में आदर्श दांपत्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। शिव और शक्ति का संबंध सृष्टि के संतुलन से भी जोड़ा जाता है।माता पार्वती शक्ति का स्वरूप मानी जाती हैं और भगवान शिव को शिव तत्व का प्रतीक माना जाता है। दोनों की उपासना जीवन में संतुलन, प्रेम और समर्पण का संदेश देती है।इसी कारण हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है तीज
हरतालिका तीज मुख्य रूप से उत्तर भारत के कई राज्यों में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड समेत कई क्षेत्रों में महिलाएं इस पर्व पर विशेष पूजा करती हैं।कई जगह महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की पूजा करती हैं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देती हैं। लोकगीत, मेहंदी, पारंपरिक श्रृंगार और धार्मिक आयोजन इस पर्व की सांस्कृतिक खूबसूरती को बढ़ाते हैं।
हरतालिका तीज का संदेश
हरतालिका तीज की पौराणिक कथा में माता पार्वती के दृढ़ संकल्प को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने अपनी इच्छा और आस्था के लिए कठिन तपस्या की और अंततः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।इस पर्व का संदेश है कि श्रद्धा के साथ धैर्य और संकल्प भी जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिव-पार्वती की कथा पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और सम्मान की भावना को भी दर्शाती है।आज के समय में हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व बन चुका है। महिलाएं इस दिन अपनी धार्मिक आस्था के साथ परिवार और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं।हरतालिका तीज की कथा हमें माता पार्वती की तपस्या, उनके अटूट विश्वास और भगवान शिव के प्रति समर्पण की याद दिलाती है। यही कारण है कि हर साल यह पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पूजा, कथा, श्रृंगार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच हरतालिका तीज भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास और संकल्प का पर्व बनकर अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।
!!हर-हर महादेव…पार्वती पतये हर हर हर !!
!!आप सभी को News 7 Hindi परिवार की तरफ से हरितालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाये !!
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