केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी की दरों में बदलाव कर दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के तहत अब गोल्ड पर 5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लागू होगी। वहीं सिल्वर फाइंडिंग्स पर भी 5 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है। इसके अलावा प्लैटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 प्रतिशत और प्रिशियस मेटल स्पेंट कैटलिस्ट पर 4.35 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लागू की गई है।
सरकार के इस फैसले के बाद देशभर के सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और आगरा जैसे बड़े ज्वेलरी बाजारों में कारोबारी नई दरों का असर समझने में जुट गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
यूपी के सर्राफा बाजार पर क्या पड़ेगा असर
उत्तर प्रदेश देश के बड़े ज्वेलरी उपभोक्ता राज्यों में शामिल है। शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम में यहां सोना-चांदी की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कस्टम ड्यूटी में बदलाव का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ सकता है।
लखनऊ और वाराणसी के ज्वेलर्स का कहना है कि आयात लागत बढ़ने की स्थिति में ग्राहकों को महंगे दाम पर गहने खरीदने पड़ सकते हैं। हालांकि शुरुआती दिनों में बाजार स्थिति को समझने की कोशिश करेगा और उसके बाद ही स्थायी प्रभाव साफ दिखाई देगा।
गोल्ड ज्वेलरी की कीमतों में बढ़ सकता है प्रीमियम
विशेषज्ञों के अनुसार गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी लागू होने से आयातित सोने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर गोल्ड प्रीमियम पर देखने को मिल सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें स्थिर भी रहती हैं, तब भी घरेलू बाजार में दाम बढ़ने की संभावना बनी रहेगी।
उत्तर प्रदेश के छोटे और मध्यम ज्वेलरी कारोबारियों को सबसे ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। खासकर वे कारोबारी जो आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं, उनकी लागत संरचना प्रभावित हो सकती है।
चांदी कारोबार में भी दिख सकती है तेजी
चांदी पर भी नई ड्यूटी लागू होने के बाद निवेशकों और व्यापारियों की नजर बाजार पर टिकी हुई है। यूपी में चांदी का इस्तेमाल केवल निवेश ही नहीं बल्कि धार्मिक और पारंपरिक कार्यों में भी बड़े पैमाने पर होता है।
कानपुर और मेरठ के व्यापारियों का कहना है कि यदि आयात महंगा होता है तो चांदी के बर्तन, सिक्के और आभूषणों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में चांदी की मांग अधिक होने के कारण इसका असर आम ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
ज्वेलरी उद्योग की लागत संरचना पर दबाव
भारत का ज्वेलरी उद्योग बड़े स्तर पर आयातित कीमती धातुओं पर निर्भर करता है। ऐसे में कस्टम ड्यूटी में बदलाव का असर निर्माण लागत पर पड़ना तय माना जा रहा है।
छोटे ज्वेलर्स के सामने बढ़ सकती हैं चुनौतियां
यूपी के छोटे ज्वेलर्स पहले से ही महंगे कच्चे माल और बढ़ती परिचालन लागत से जूझ रहे हैं। अब नई कस्टम ड्यूटी के कारण उन्हें अतिरिक्त वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े ब्रांड्स के मुकाबले छोटे दुकानदारों के लिए कीमतों को संतुलित रखना आसान नहीं होगा। ऐसे में कुछ कारोबारी ग्राहकों पर अतिरिक्त लागत डाल सकते हैं जबकि कुछ अपने मुनाफे में कटौती कर बाजार बनाए रखने की कोशिश करेंगे।
मांग और बिक्री पर भी पड़ सकता है असर
अगर सोना-चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है तो इसका असर मांग पर भी पड़ सकता है। यूपी में शादी सीजन के दौरान भारी मात्रा में गहनों की खरीदारी होती है। लेकिन महंगे दाम ग्राहकों का बजट बिगाड़ सकते हैं।
लखनऊ के कई ज्वेलर्स का मानना है कि ग्राहक हल्के वजन वाले गहनों की तरफ रुख कर सकते हैं। वहीं कुछ लोग निवेश के तौर पर सोना खरीदने में फिलहाल सावधानी बरत सकते हैं।
बुलियन ट्रेड में बढ़ सकती है अस्थिरता
कस्टम ड्यूटी में बदलाव का असर बुलियन ट्रेड यानी सोना-चांदी की थोक खरीद-बिक्री पर भी दिखाई दे सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दिनों में कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
निवेशकों की रणनीति में बदलाव संभव
कई निवेशक सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हैं। लेकिन नई ड्यूटी लागू होने के बाद कुछ समय तक निवेशक बाजार की दिशा देखने का इंतजार कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के निवेश सलाहकारों का कहना है कि अगर घरेलू कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो निवेशक डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और अन्य विकल्पों की ओर भी रुख कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी रहेगा असर
घरेलू बाजार में केवल कस्टम ड्यूटी ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें, डॉलर की स्थिति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। अगर वैश्विक बाजार में सोना मजबूत होता है तो भारतीय बाजार में इसका असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले कुछ सप्ताह सर्राफा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे क्योंकि व्यापारी और निवेशक दोनों नई परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तय करेंगे।
सरकार के फैसले के पीछे क्या हो सकता है उद्देश्य
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार समय-समय पर आयात शुल्क में बदलाव कर व्यापार संतुलन और राजस्व प्रबंधन को नियंत्रित करने की कोशिश करती है। कीमती धातुओं के आयात पर नियंत्रण रखने और घरेलू आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी ऐसे फैसले लिए जाते हैं।
हालांकि कारोबारियों का कहना है कि अगर आयात लागत बहुत ज्यादा बढ़ती है तो इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है। इसलिए बाजार अब सरकार की अगली नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में सर्राफा बाजार की प्रतिक्रिया सबसे अहम होगी। यदि बाजार में मांग बनी रहती है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं कमजोर मांग की स्थिति में कारोबारियों को कीमतों में संतुलन बनाने की कोशिश करनी पड़ सकती है।
उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल सलाह यही है कि खरीदारी से पहले बाजार भाव की पूरी जानकारी लें और जल्दबाजी में निवेश का फैसला न करें।
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