रांची झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची की सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और कथित अनियमितताओं पर जिम्मेदारी तय की जाए।छात्रों के इस आंदोलन ने अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आंदोलनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं उनके भविष्य और करियर से जुड़ी हैं, ऐसे में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी लाखों युवाओं के सपनों को प्रभावित कर सकती है।
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल
झारखंड में JPSC परीक्षा विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 29 जुलाई को भी हजारों छात्रों ने रांची में मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकलकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचे और JPSC तथा JSSC की भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने जैसी मांगें उठाईं।छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल एक परीक्षा या एक परिणाम तक सीमित नहीं है। यह आंदोलन भर्ती प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग से जुड़ा हुआ है।
छात्रों की आवाज बनी बड़ा आंदोलन
रांची की सड़कों पर उतर रहे छात्रों के हाथों में डिग्रियां हैं और आंखों में सरकारी नौकरी का सपना। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा और परिणाम को लेकर उठने वाले सवाल उनके लिए बेहद गंभीर हैं।आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनियमितता होती है तो उसका सीधा असर मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों पर पड़ता है। इसी वजह से छात्र अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत की कोशिश
लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच झारखंड सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई है। हालांकि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत से तत्काल कोई व्यापक समाधान नहीं निकल सका। सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के साथ संवाद बढ़ाने के लिए ‘छात्रों की बात छात्रों के साथ’ पहल की घोषणा की है। इसके तहत छात्रों की समस्याओं, सुझावों और शिकायतों को सुनने के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए छात्रों के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।
विधानसभा मार्च को लेकर प्रशासन अलर्ट
छात्र आंदोलन के बीच विधानसभा मार्च की घोषणा के बाद रांची में प्रशासन भी सतर्क है। विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और निषेधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। अधिकारियों का उद्देश्य किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच तनाव भी देखने को मिला है। एक बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
JPSC परीक्षा को लेकर पहले भी उठे सवाल
झारखंड में JPSC की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद नया नहीं है। हालिया घटनाक्रम में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर भी सवाल उठे हैं। जुलाई में JPSC ने राज्य सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया था। यह फैसला CID की कार्रवाई और परीक्षा से जुड़े कथित मामलों की जांच के बीच सामने आया था।वहीं JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते की गिरफ्तारी की खबर ने भी मामले को और गंभीर बना दिया। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की मांग- पारदर्शी हो भर्ती प्रक्रिया
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग है कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। छात्र चाहते हैं कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।प्रदर्शनकारियों की ओर से कुछ मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। अलग-अलग छात्र संगठनों और राजनीतिक संगठनों ने भी भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किए हैं।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा
झारखंड का छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा परिणाम या भर्ती प्रक्रिया तक सीमित दिखाई नहीं दे रहा। युवाओं के लिए यह उनके रोजगार, भविष्य और सरकारी भर्ती व्यवस्था पर भरोसे का सवाल बन गया है। वर्षों तक तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें परीक्षा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक हर चरण पारदर्शी हो।सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह आंदोलनकारी छात्रों की चिंताओं का ऐसा समाधान निकाले, जिससे अभ्यर्थियों का भर्ती व्यवस्था पर भरोसा दोबारा कायम हो सके। दूसरी ओर, छात्रों का आंदोलन लगातार अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाए हुए है।फिलहाल झारखंड छात्र विरोध प्रदर्शन, जेपीएससी परीक्षा विवाद और JSSC भर्ती परीक्षा का मुद्दा राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन चुका है। सरकार की ओर से संवाद और परीक्षा प्रणाली में सुधार की पहल की जा रही है, जबकि छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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