LLB छोड़ी, शादी ठुकराई… 16 साल से साइकिल पर चला रहे स्वच्छता की क्रांति, बाराबंकी का बेटा बना मिसाल!

Editorial
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बाराबंकी आज के दौर में जहां अधिकांश युवा अच्छी नौकरी, बेहतर करियर और सुख-सुविधाओं से भरी जिंदगी का सपना देखते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक युवक ने समाज की सेवा को ही अपना जीवन बना लिया। LLB की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद राहुल खान ने न वकालत का पेशा चुना और न ही शादी कर घर बसाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी स्वच्छता और जनजागरूकता के नाम समर्पित कर दी। पिछले 16 वर्षों से राहुल खान गांव-गांव साइकिल चलाकर लोगों को स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं। उनकी यह अनोखी पहल अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।बाराबंकी के फतेहपुर ब्लॉक के बसेरा गांव निवासी राहुल खान ने यह साबित कर दिया है कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या करोड़ों रुपये नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और सेवा का जज्बा चाहिए। राहुल आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

शादी छोड़ गांव को मॉडल बनाने का लिया संकल्प

राहुल खान बताते हैं कि उन्होंने कई साल पहले यह संकल्प लिया था कि जब तक अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छता के मामले में जागरूक नहीं बना देंगे, तब तक शादी नहीं करेंगे। परिवार और रिश्तेदारों ने कई बार शादी के लिए दबाव बनाया, लेकिन राहुल अपने फैसले पर अडिग रहे।उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति पहले समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो देश अपने आप बदल जाएगा। यही सोच उन्हें पिछले 16 वर्षों से लगातार आगे बढ़ा रही है।

LLB पास, लेकिन समाज सेवा को बनाया जीवन का लक्ष्य

राहुल खान ने कानून की पढ़ाई (LLB) पूरी की। उनके सामने वकालत करने और बेहतर करियर बनाने के कई अवसर थे। लेकिन उन्होंने अपनी डिग्री को रोजगार का माध्यम बनाने के बजाय समाज सेवा का रास्ता चुना।राहुल कहते हैं कि कानून लोगों को न्याय दिलाता है, लेकिन स्वच्छता लोगों को स्वस्थ जीवन देती है। इसलिए उन्होंने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए स्वच्छता अभियान को अपना मिशन बना लिया।

साइकिल बनी ‘स्वच्छ भारत जागरूकता रथ’

राहुल खान की सबसे बड़ी पहचान उनकी अनोखी साइकिल है। उन्होंने अपनी साधारण साइकिल को ही ‘स्वच्छ भारत जागरूकता रथ’ का रूप दे दिया है।साइकिल पर स्वच्छता से जुड़े संदेश, पोस्टर और प्रेरणादायक स्लोगन लिखे गए हैं। यही साइकिल उनका साथी भी है और उनकी पहचान भी। इसी साइकिल से वह रोज गांव-गांव पहुंचते हैं और लोगों को साफ-सफाई का महत्व समझाते हैं।

धूप-बारिश से बचने के लिए खुद बनाई छत

राहुल खान की साइकिल की एक और खास बात यह है कि उन्होंने उस पर खुद एक मजबूत छत तैयार की है। इसका उद्देश्य धूप और बारिश से बचते हुए लगातार अभियान चलाना है।भीषण गर्मी हो, बारिश हो या ठंड, राहुल का सफर नहीं रुकता। मौसम चाहे जैसा भी हो, उनकी साइकिल लगातार गांवों की गलियों में स्वच्छता का संदेश पहुंचाती रहती है।

जहां गंदगी दिखती है, वहीं शुरू कर देते हैं सफाई

राहुल केवल लोगों को सलाह नहीं देते, बल्कि खुद उदाहरण पेश करते हैं। जहां भी उन्हें सड़क, नाली, स्कूल, मंदिर, मस्जिद या सार्वजनिक स्थान पर गंदगी दिखाई देती है, वह बिना किसी संकोच के खुद झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर देते हैं।उन्हें सफाई करते देख आसपास के लोग भी प्रेरित होकर उनके साथ जुड़ जाते हैं। धीरे-धीरे यह पहल एक जनआंदोलन का रूप ले रही है।

गांव-गांव पहुंचाकर बदल रहे लोगों की सोच

राहुल खान का कहना है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। इसी सोच के साथ वह लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को कूड़ा इधर-उधर न फेंकने, प्लास्टिक का कम उपयोग करने, नालियों को साफ रखने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं।स्कूलों में बच्चों से संवाद कर उन्हें स्वच्छता की शपथ दिलाते हैं। उनका मानना है कि यदि बच्चे जागरूक होंगे तो पूरा समाज स्वतः जागरूक हो जाएगा।

16 साल की मेहनत ने दिलाई नई पहचान

लगातार 16 वर्षों से बिना किसी निजी स्वार्थ के समाज सेवा करने वाले राहुल खान आज पूरे बाराबंकी जिले में सम्मान के साथ पहचाने जाते हैं। कई सामाजिक संगठनों ने उन्हें सम्मानित भी किया है।स्थानीय लोग कहते हैं कि राहुल खान ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव की शुरुआत अकेला व्यक्ति भी कर सकता है। आज उनके अभियान से कई युवा भी जुड़ रहे हैं और अपने गांवों में सफाई अभियान चला रहे हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने राहुल खान

आज जब युवा सोशल मीडिया और आधुनिक जीवनशैली में व्यस्त दिखाई देते हैं, ऐसे समय में राहुल खान का जीवन समाज के प्रति समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने यह दिखाया है कि असली सफलता केवल बड़ी नौकरी या अधिक पैसा कमाने में नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने में भी होती है।उनका सपना है कि उनका गांव ही नहीं, बल्कि पूरा बाराबंकी और फिर पूरा उत्तर प्रदेश स्वच्छता के मामले में एक नई पहचान बनाए।

समाज सेवा ही सबसे बड़ी पूजा

राहुल खान का मानना है कि समाज की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। वह कहते हैं कि यदि हर व्यक्ति अपने घर, गली और गांव की सफाई की जिम्मेदारी स्वयं ले ले, तो देश को स्वच्छ बनाने का सपना बहुत जल्द पूरा हो सकता है।आज राहुल खान की कहानी यह संदेश देती है कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े इरादों की जरूरत होती है। एक साइकिल, एक झाड़ू और समाज के प्रति अटूट समर्पण ने उन्हें बाराबंकी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का प्रतीक बना दिया है। उनके इस अनोखे अभियान ने यह साबित कर दिया है कि जब इरादे मजबूत हों, तो एक अकेला इंसान भी पूरे समाज में बदलाव की अलख जगा सकता है।

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