लखनऊ में मोबाइल की किस्त पर युवक को बंधक बनाने का आरोप, 5 दिन कराई मजदूरी

Editorial
7 Min Read

लखनऊ राजधानी लखनऊ में मोबाइल की किस्त को लेकर एक युवक को कथित तौर पर घर से ले जाकर पांच दिन तक बंधक बनाए रखने का मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवक से जबरन मजदूरी कराई गई और एक ब्लड बैंक ले जाकर उसका खून निकलवाया गया। इतना ही नहीं, मोबाइल की बकाया किस्त के नाम पर पहले 2,799 रुपये ऑनलाइन मंगाए गए और बाद में 12,500 रुपये की अतिरिक्त मांग की गई। रकम न देने पर युवक को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। डीसीपी दक्षिणी ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मोबाइल की किस्त को लेकर शुरू हुआ विवाद

मामला लखनऊ के निगोहां क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। राजारामखेड़ा मजरा पुरहिया गांव निवासी जदूराई के मुताबिक, उनके छोटे बेटे नेवल ने करीब एक साल पहले निगोहां कस्बे की एक मोबाइल दुकान से जीरो डाउन पेमेंट पर फोन खरीदा था। मोबाइल खरीदने के बाद उसकी किस्त जमा की जानी थी।परिवार का आरोप है कि एक महीने बाद किस्त बकाया हो गई। इसके बाद कुछ लोग युवक के घर पहुंचे और मोबाइल अपने साथ ले गए। उस समय मामला मोबाइल वापस लेने तक सीमित था, लेकिन कुछ दिन बाद विवाद ने गंभीर रूप ले लिया।

लखनऊ में मोबाइल की किस्त पर युवक को बंधक बनाने का आरोप
लखनऊ में मोबाइल की किस्त पर युवक को बंधक बनाने का आरोप

बहाने से युवक को साथ ले जाने का आरोप

परिजनों की शिकायत के मुताबिक, 8 सितंबर की शाम करीब चार बजे दो लोग स्कूटी से गांव पहुंचे। आरोप है कि दोनों ने नेवल को किसी बहाने से अपने साथ चलने के लिए कहा और उसे लेकर वहां से चले गए।जब काफी समय तक नेवल वापस नहीं आया तो परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। परिजनों का कहना है कि उन्हें युवक के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया और युवक को तलाशने की कोशिश तेज की।शिकायत में कथित तौर पर उस स्कूटी का नंबर भी दर्ज कराया गया है, जिससे युवक को ले जाने की बात कही गई है।

ब्लड बैंक ले जाकर खून निकलवाने का आरोप

परिवार का सबसे गंभीर आरोप यह है कि नेवल को लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां कथित तौर पर जबरन उसका खून निकलवाया गया। इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में रखा गया।परिजनों के अनुसार, युवक को वहां कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया और उससे मजदूरी कराई गई। परिवार का दावा है कि नेवल को अपनी मर्जी से घर लौटने की अनुमति नहीं दी गई।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक के साथ वास्तव में क्या हुआ था और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका थी।

2,799 रुपये लेने के बाद फिर मांगे 12,500 रुपये

परिवार का आरोप है कि नेवल को अपने कब्जे में रखने के बाद आरोपियों ने उसके बड़े भाई राजकुमार से संपर्क किया। मोबाइल की बकाया किस्त के नाम पर 2,799 रुपये ऑनलाइन भेजने के लिए कहा गया।शिकायत के मुताबिक, 9 सितंबर को करीब 2:07 बजे क्यूआर कोड के जरिए 2,799 रुपये का भुगतान किया गया। परिवार को उम्मीद थी कि रकम मिलने के बाद नेवल को वापस भेज दिया जाएगा।लेकिन परिजनों का दावा है कि पैसे मिलने के बाद भी युवक को नहीं छोड़ा गया। इसके बाद 11 सितंबर की शाम करीब सात बजे दोबारा फोन आया और 12,500 रुपये की मांग की गई। परिवार का आरोप है कि रकम नहीं देने पर युवक को जान से मारने की धमकी भी दी गई।

पांच दिन बाद थाने पहुंचा युवक

परिवार के मुताबिकपुलिस को जानकारी देने और मामले में हस्तक्षेप के बाद करीब पांचवें दिन नेवल को रैपिड कैब के जरिए थाने भेजा गया। आरोप है कि कैब का किराया भी उसके भाई से ही भरवाया गया।जब नेवल थाने पहुंचा तो परिवार के लोगों ने उसकी हालत को लेकर चिंता जताई। परिजनों का कहना है कि युवक काफी परेशान और बदहवास नजर आ रहा था। इसके बाद परिवार ने पूरे घटनाक्रम की शिकायत पुलिस से की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप

पीड़ित की मां ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की तो उन्हें और उनके बेटे को ही मामले में फंसाने की धमकी दी गई। हालांकि पुलिस की ओर से लगाए गए इन आरोपों की भी जांच की जा रही है।मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी दक्षिणी ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, मोबाइल भुगतान, क्यूआर कोड ट्रांजेक्शन, युवक को ले जाने से जुड़े तथ्यों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सकती है।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

यह मामला मोबाइल की किस्त से शुरू होकर कथित बंधक बनाए जाने, मजदूरी कराने, पैसे की मांग और ब्लड बैंक ले जाने जैसे गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। ऐसे में पुलिस के सामने पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने की चुनौती है।पुलिस जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि युवक को किन लोगों ने अपने साथ ले जाया था, वह पांच दिनों तक कहां रहा, उससे किस तरह काम कराया गया और ब्लड बैंक ले जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।फिलहाल पुलिस ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई बनती है।

Read on:http://प्रियंका गुप्ता को कांग्रेस ने दी बड़ी जिम्मेदारी, यूपी कांग्रेस मीडिया विभाग में बनीं उपाध्यक्ष

Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment