लखनऊ राजधानी लखनऊ में दुर्गा पूजा का उत्सव बंगाल की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के रंग बिखेर रहा है। शहर के फीनिक्स पलासियो में 11 अक्टूबर से शुरू हुआ 10 दिवसीय दुर्गा पूजो उत्सव 20 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस आयोजन में मां दुर्गा की आराधना के साथ पारंपरिक संगीत, लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए बंगाल की जीवंत संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। खास बात यह है कि यहां आने वाले लोगों को पूजा-पाठ के साथ बंगाली परंपराओं और कला से रूबरू होने का अवसर भी मिल रहा है।शारदीय नवरात्रि के पहले दिन शुरू हुए इस उत्सव में भक्ति, परंपरा और सामुदायिक मेलजोल को विशेष महत्व दिया गया है। आयोजन की शुरुआत पारंपरिक धाक की थाप और धुनुची नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों के साथ हुई। इसके बाद फीनिक्स पलासियो की ओर से दीप प्रज्ज्वलित कर उत्सव का शुभारंभ किया गया। शुरुआत से ही आयोजन में बंगाल के पारंपरिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

धाक की थाप और धुनुची नृत्य से सजा उत्सव
दुर्गा पूजो बंगाल की प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस उत्सव में मां दुर्गा की आराधना के साथ संगीत, नृत्य और सामूहिक उत्सव का विशेष महत्व होता है। फीनिक्स पलासियो में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इन्हीं परंपराओं को लखनऊ के लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।धाक की पारंपरिक थाप और धुनुची नृत्य इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बंगाल की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया जा रहा है। आयोजन में परिवारों और अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है, जहां वे भारतीय संस्कृति की विविधता का अनुभव कर सकें।फीनिक्स पलासियो का यह आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए बंगाल की कला, संगीत और लोक परंपराओं को भी मंच दिया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम इस उत्सव को और खास बनाएंगे।

16 से 18 अक्टूबर तक होंगे खास सांस्कृतिक कार्यक्रम
उत्सव के दौरान 16, 17 और 18 अक्टूबर को विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में दिल्ली और कोलकाता के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से बंगाल की लोक कला, शास्त्रीय नृत्य और संगीत की विविधता से दर्शकों को परिचित कराएंगे।16 अक्टूबर को बंगाली लोक और शास्त्रीय नृत्य के साथ रवींद्र संगीत की प्रस्तुति होगी। दिल्ली के नाट्य बंगाली ग्रुप की ओर से बंगाली लोक एवं शास्त्रीय नृत्य पेश किया जाएगा। इसके बाद कोलकाता के ममता मन्ना ग्रुप की प्रस्तुति में रवींद्र संगीत और काजी नजरुल इस्लाम की रचनाओं से प्रेरित लोक संगीत सुनने को मिलेगा। यह कार्यक्रम बंगाल की साहित्यिक और संगीत परंपराओं की झलक पेश करेगा।17 अक्टूबर को मयूरभंज छऊ नृत्य और बाउल संगीत रहेगा आकर्षण। इस दिन धाक की थाप और धुनुची नृत्य की प्रस्तुतियों के साथ पारंपरिक मयूरभंज छऊ नृत्य पेश किया जाएगा। इसके अलावा कोलकाता के कलाकार बाउल बंगाली लोक संगीत की प्रस्तुति देंगे। लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य के इस संगम से दर्शकों को बंगाल की सांस्कृतिक विविधता को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।18 अक्टूबर को भक्तिमय आरती और लाइव बंगाली संगीत की धूम रहेगी। कार्यक्रम की शुरुआत धाक और धुनुची नर्तकों के साथ भक्तिमय आरती से होगी। इसके बाद बंगाली लाइव बैंड अपनी प्रस्तुति देगा। इसमें आधुनिक बंगाली संगीत के साथ पुराने दौर के लोकप्रिय गीतों का आनंद लिया जा सकेगा।तीन दिनों तक चलने वाले ये विशेष कार्यक्रम संगीत, नृत्य और लोक कला की अलग-अलग शैलियों को एक मंच पर लाएंगे।
त्योहार लोगों को जोड़ने का माध्यम: संजीव सरीन
दुर्गा पूजो उत्सव को लेकर द फीनिक्स मिल्स लिमिटेड के रिटेल डायरेक्टर, नॉर्थ, संजीव सरीन ने कहा कि त्योहार लोगों को एक साथ लाने और भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का उत्सव मनाने का विशेष अवसर होते हैं। उनके मुताबिक, दुर्गा पूजो भक्ति, बुराई पर अच्छाई की जीत और आपसी मेलजोल की भावना का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि 10 दिवसीय आयोजन के माध्यम से बंगाल की जीवंत परंपराओं को लखनऊ के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मां दुर्गा की आराधना के साथ पारंपरिक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शामिल करने का उद्देश्य लोगों को खरीदारी से आगे बढ़कर एक अलग अनुभव देना है।संजीव सरीन के अनुसार, फीनिक्स पलासियो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाने और परिवारों तथा समुदायों के लिए यादगार पल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजन लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने और साझा सांस्कृतिक अनुभवों से जुड़ने का अवसर देते हैं।
20 अक्टूबर तक चलेगा दुर्गा पूजो उत्सव
फीनिक्स पलासियो में दुर्गा पूजो का उत्सव 20 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। इस दौरान लोग मां दुर्गा की आराधना के साथ बंगाल की पारंपरिक संस्कृति, संगीत और नृत्य का आनंद ले सकेंगे। खास सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए आयोजन में धार्मिक आस्था और कलात्मक अभिव्यक्ति का संगम देखने को मिलेगा।लखनऊ जैसे विविध सांस्कृतिक पहचान वाले शहर में इस तरह के आयोजन अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं को सामने लाने का माध्यम बनते हैं। दुर्गा पूजो के जरिए बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को स्थानीय लोगों तक पहुंचाने के साथ परिवारों और समुदायों को एक साझा मंच भी मिल रहा है।फीनिक्स पलासियो का दुर्गा पूजो उत्सव नवरात्रि के माहौल में भक्ति और संस्कृति का खास संगम लेकर आया है। धाक की थाप, धुनुची नृत्य, छऊ नृत्य, बाउल संगीत और लाइव बंगाली बैंड की प्रस्तुतियां इस आयोजन को विशेष बना रही हैं। 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव में लखनऊ के लोगों को बंगाल की परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को करीब से अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
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