लखनऊ जीभ के कैंसर का इलाज अक्सर सिर्फ ट्यूमर हटाने तक सीमित नहीं रहता। सर्जरी के बाद मरीज के लिए बोलने, खाने और रोजमर्रा की जिंदगी में वापस लौटना भी बड़ी चुनौती होती है। लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल में ऐसा ही एक जटिल मामला सामने आया, जिसमें डॉक्टरों ने कैंसर प्रभावित जीभ के हिस्से को हटाने के साथ उसका पुनर्निर्माण भी किया। खास बात यह है कि सर्जरी के छह साल बाद 37 वर्षीय मरीज सामान्य जीवन जी रहा है और अपने काम पर वापस लौट चुका है।अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, मरीज करीब 10 वर्षों से जीभ के बाईं तरफ मौजूद एक गांठ के साथ रह रहा था। समय के साथ यह समस्या गंभीर होती गई और बाद में जांच में गांठ के कैंसर में बदलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मरीज का इलाज मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ में कराया गया।
जीभ से शुरू हुआ कैंसर अंदरूनी हिस्से तक पहुंचा
मेदांता हॉस्पिटल के डायरेक्टर, हेड एंड नेक कैंसर डॉ. विवेकानंद सिंह और कंसल्टेंट, हेड एंड नेक कैंसर डॉ. पीयूष ने मरीज की जांच की। जांच में पता चला कि ट्यूमर जीभ के बीच वाले हिस्से से बढ़ते हुए निचले जबड़े की दिशा में फैल रहा था।एमआरआई जांच में कैंसर के जीभ के नीचे मौजूद मांसपेशियों और मुंह के निचले हिस्से तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। इस स्थिति में सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि डॉक्टरों को कैंसर प्रभावित हिस्से को हटाने के साथ-साथ मरीज की सामान्य कार्यक्षमता को बनाए रखने पर भी ध्यान देना था।मरीज के लिए यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि वह पेशे से सेल्सपर्सन है और उसके काम में लगातार लोगों से बातचीत करना जरूरी है। ऐसे में इलाज के बाद बोलने की क्षमता बनाए रखना उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण था।

कैंसर प्रभावित हिस्सा हटाया गया
मेदांता लखनऊ में हुई सर्जरी के दौरान जीभ के कैंसर प्रभावित हिस्से को हटाया गया। इसके साथ ही गर्दन के उस हिस्से के लिम्फ नोड्स भी निकाले गए, जहां कैंसर के फैलाव की आशंका थी।सर्जरी के बाद डॉक्टरों के सामने अगली बड़ी चुनौती जीभ के हटाए गए हिस्से का पुनर्निर्माण करना था। इसका उद्देश्य सिर्फ जीभ के खाली हिस्से को भरना नहीं था, बल्कि ऐसा पुनर्निर्माण करना था जिससे मरीज को भविष्य में बोलने और खाने में सुविधा हो सके।
हाथ की जगह ऊपरी बांह से लिया गया टिश्यू
अस्पताल के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में जीभ के पुनर्निर्माण के लिए हाथ के निचले हिस्से से टिश्यू लिया जा सकता है। लेकिन इस मरीज के हाथ में पहले चोट लग चुकी थी। इसलिए डॉक्टरों ने वैकल्पिक तरीका अपनाया।सर्जरी के दौरान मरीज की ऊपरी बांह से टिश्यू लेकर जीभ के प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण किया गया। डॉक्टरों ने इस टिश्यू की मदद से जीभ का नया हिस्सा तैयार किया।इस तरह की पुनर्निर्माण सर्जरी का उद्देश्य मरीज को इलाज के बाद बेहतर कार्यक्षमता देना होता है। इस मामले में भी डॉक्टरों की कोशिश थी कि मरीज दोबारा सामान्य रूप से बोल और खा सके तथा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लौट सके।
पांचवें दिन अस्पताल से मिली छुट्टी
अस्पताल के मुताबिक, जटिल सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी अच्छी रही। उसे सर्जरी के पांचवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।इलाज के बाद मरीज ने धीरे-धीरे अपनी सामान्य दिनचर्या में वापसी की। अस्पताल की ओर से बताया गया है कि अब सर्जरी को छह साल हो चुके हैं और मरीज सामान्य जीवन जी रहा है।सबसे खास बात यह है कि मरीज अपने पेशे में भी वापस लौट चुका है। सेल्सपर्सन होने के कारण उसे लगातार ग्राहकों और दूसरे लोगों से बातचीत करनी पड़ती है। सर्जरी के छह साल बाद वह फिर से अपने काम को सामान्य रूप से कर रहा है और उसकी आवाज भी लगभग सामान्य बताई गई है।
कैंसर सर्जरी में सिर्फ ट्यूमर हटाना ही लक्ष्य नहीं
इस केस को डॉक्टर कैंसर के इलाज के साथ मरीज की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के उदाहरण के तौर पर देख रहे हैं। सिर और गर्दन के कैंसर की सर्जरी में कई बार प्रभावित हिस्से को हटाने के बाद उसके पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ती है।विशेष रूप से जीभ से जुड़े मामलों में बोलने और खाने की क्षमता मरीज के जीवन पर सीधे असर डाल सकती है। इसलिए सर्जरी की योजना बनाते समय कैंसर को नियंत्रित करने के साथ-साथ इन कार्यों को यथासंभव बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाता है।इस मरीज के मामले में भी डॉक्टरों के सामने यही चुनौती थी। कैंसर प्रभावित हिस्से को हटाने के बाद ऊपरी बांह के टिश्यू की मदद से जीभ का पुनर्निर्माण किया गया।
10 साल तक गांठ को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि मरीज करीब एक दशक तक जीभ की गांठ के साथ रहा। बाद में यही समस्या कैंसर में बदल गई और आसपास के हिस्सों तक फैल गई।जीभ या मुंह में लंबे समय तक रहने वाली किसी भी असामान्य गांठ, घाव या बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर यदि कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहे या उसमें बदलाव दिखाई दे तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।मुंह और जीभ से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती जांच से बीमारी की स्थिति को समझने और उचित उपचार की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
छह साल बाद सामान्य जिंदगी में वापसी
मेदांता हॉस्पिटल के इस मामले में सर्जरी के छह साल बाद मरीज का सामान्य जीवन में लौटना इलाज के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की भूमिका को सामने लाता है। मरीज अपने काम पर वापस लौट चुका है और बातचीत उसके पेशे का अहम हिस्सा होने के बावजूद वह सामान्य रूप से लोगों से संवाद कर पा रहा है।यह केस इस बात को भी रेखांकित करता है कि कैंसर के इलाज में बीमारी को नियंत्रित करने के साथ मरीज की रोजमर्रा की जिंदगी और कार्यक्षमता को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।मेदांता लखनऊ में हुए इस जटिल ऑपरेशन में कैंसर प्रभावित जीभ के हिस्से को हटाने, गर्दन के लिम्फ नोड्स की सर्जरी और ऊपरी बांह के टिश्यू से जीभ के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अपनाई गई। अस्पताल के अनुसार, छह साल बाद मरीज सामान्य जीवन जी रहा है और अपने पेशे में भी सक्रिय है।
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