उत्तराखंड पर मानसून का महाअटैक! ऑरेंज अलर्ट के बीच पहाड़ों पर बढ़ा खतरा, चारधाम यात्रा पर भी संकट

Editorial
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देहरादून देवभूमि उत्तराखंड में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और इसके साथ ही पहाड़ों में मुश्किलों का दौर भी तेज हो गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने देहरादून, नैनीताल, टिहरी, चंपावत, पौड़ी समेत कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। भारी बारिश के चलते भूस्खलन, चट्टानें गिरने, अचानक बाढ़ और सड़कें बंद होने जैसी घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले कई घंटों से रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है। बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी कमजोर पड़ने लगी है, जिससे कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। जगह-जगह मलबा और चट्टानें सड़कों पर आ गिरने से कई संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और चारधाम यात्रियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऑरेंज अलर्ट के बाद प्रशासन हाई अलर्ट पर

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों तक उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रह सकती है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सभी जिलों के अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें संभावित आपदा प्रभावित इलाकों में तैनात कर दी गई हैं। संवेदनशील स्थानों पर राहत एवं बचाव उपकरणों के साथ टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

चारधाम यात्रा पर भी मौसम की मार

लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। कई स्थानों पर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके कारण कुछ मार्गों पर यातायात अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ।प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य लें। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। यात्रा मार्गों पर पुलिस, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी तैनात हैं ताकि जरूरत पड़ने पर यात्रियों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

उफान पर नदियां, बढ़ा फ्लैश फ्लड का खतरा

लगातार बारिश के चलते राज्य की कई नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे-छोटे गदेरे और नाले भी उफान पर बह रहे हैं। ऐसे में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।\विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में कुछ घंटों की तेज बारिश भी बड़े भूस्खलन और अचानक बाढ़ का कारण बन सकती है। इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।

मैदानी इलाकों में भी बढ़ी मुश्किलें

मानसून का असर केवल पर्वतीय जिलों तक सीमित नहीं है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और आसपास के कई मैदानी क्षेत्रों में भी भारी बारिश के कारण जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। कई कॉलोनियों और निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।स्थानीय निकायों को जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें लगातार जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

संवेदनशील गांवों पर विशेष नजर

आपदा प्रबंधन विभाग ने भूस्खलन संभावित गांवों और संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार कर ली है। ऐसे क्षेत्रों में प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और राहत शिविरों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिला प्रशासन ने सभी विभागों के अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

लोगों से की गई ये अहम अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा न करें। पहाड़ी ढलानों, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। यदि किसी स्थान पर सड़क पर मलबा या चट्टानें दिखाई दें तो वहां रुकने के बजाय सुरक्षित स्थान पर चले जाएं और तत्काल प्रशासन को सूचना दें।साथ ही बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए खुले मैदानों और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचने की सलाह दी गई है।

अगले दो दिन बेहद अहम

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 24 से 48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। यदि भारी बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो भूस्खलन, सड़क बंद होने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं में और बढ़ोतरी हो सकती है।फिलहाल देवभूमि उत्तराखंड में मानसून राहत नहीं, बल्कि चुनौती बनकर सामने आया है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन आने वाले दिनों में लोगों की सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव साबित होगी। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, ताकि किसी भी संभावित हादसे से बचा जा सके।

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