मुरादाबाद के भोजपुर में ई-कचरा जलाने का आरोप, धुएं से बढ़ी चिंता

Editorial
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रिपोर्ट :मो अरशद

मुरादाबाद थाना भोजपुर क्षेत्र में ई-कचरा जलाए जाने का मामला सामने आने के बाद आसपास के लोगों की चिंता बढ़ गई है। आरोप है कि क्षेत्र में कुछ स्थानों पर रात के अंधेरे में अवैध तरीके से ई-कचरा जलाया जा रहा है। आग से उठने वाला काला धुआं आसपास के वातावरण में फैलने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों में आग की लपटों और धुएं के गुबार का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद ई-वेस्ट के अवैध निस्तारण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।बताया जा रहा है कि ई-कचरे में कंप्यूटर, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अवशेष, तार, प्लास्टिक और अन्य सामग्री शामिल हो सकती है। ऐसे कचरे को खुले में जलाने से धुआं और प्रदूषक वातावरण में फैल सकते हैं। यही वजह है कि ई-कचरे के सुरक्षित संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी माना जाता है।

मुरादाबाद के भोजपुर में ई-कचरा जलाने का आरोप
मुरादाबाद के भोजपुर में ई-कचरा जलाने का आरोप

रात के अंधेरे में जलाए जाने का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि भोजपुर थाना क्षेत्र में कुछ स्थानों पर ई-कचरे को रात के समय आग के हवाले किया जाता है। अंधेरा होने के बाद जलते हुए कचरे से निकलने वाला काला धुआं दूर तक दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधि से आसपास रहने वाले परिवारों को धुएं और दुर्गंध की परेशानी झेलनी पड़ती है। ई-कचरा जलाने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सामने आई तस्वीरों और स्थानीय लोगों की शिकायतों ने क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तार और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से निकलता है धुआं

ई-कचरे में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अलावा प्लास्टिक, तार और विभिन्न प्रकार की अन्य सामग्री मौजूद होती है। इन्हें खुले में जलाने पर धुआं उत्पन्न होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कचरे के अनुचित तरीके से निस्तारण से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। विशेष रूप से लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।यही कारण है कि ई-कचरे को सामान्य कूड़े की तरह खुले में जलाने के बजाय अधिकृत व्यवस्था के माध्यम से एकत्र कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में नियमों के विपरीत ई-कचरा जलाया जा रहा है तो संबंधित विभागों द्वारा मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना महत्वपूर्ण होगा।

धुएं ने बढ़ाई लोगों की चिंता

भोजपुर क्षेत्र में कथित तौर पर ई-कचरा जलाए जाने की गतिविधियों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि रात के समय हवा में धुआं फैलने से वातावरण प्रभावित होता है। आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध और धुएं के कारण परेशानी होने की बात भी सामने आ रही है।स्थानीय लोगों की मांग है कि यदि क्षेत्र में वास्तव में ई-कचरा जलाया जा रहा है तो संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर जांच करें। इसके साथ ही अवैध रूप से ई-कचरा एकत्र करने और जलाने वालों की पहचान कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।

प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से जांच की मांग

मामले में स्थानीय स्तर पर प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि लंबे समय से ऐसी गतिविधियां हो रही हैं तो इसकी निगरानी और रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।ई-कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में फेंकने या जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को रोकना है। ऐसे में यदि भोजपुर क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

धुएं से स्वास्थ्य को लेकर चिंता

ई-कचरा जलाए जाने की खबर सामने आने के बाद सबसे बड़ी चिंता आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लेकर है। खुले में किसी भी प्रकार का कचरा जलाने से हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। धुएं में मौजूद कण और अन्य प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों पर प्रदूषित हवा का असर अधिक हो सकता है। भोजपुर में कथित ई-कचरा जलाने से किसी विशेष बीमारी या स्वास्थ्य नुकसान की पुष्टि बिना चिकित्सकीय जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के नहीं की जा सकती। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी दावों के बजाय मामले की वैज्ञानिक और प्रशासनिक जांच जरूरी है।

क्या खुले में जलाया जा रहा है ई-कचरा?

भोजपुर क्षेत्र में सामने आई तस्वीरों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आग में क्या जलाया जा रहा था और इसे जलाने के पीछे कौन लोग हैं। यदि जांच में ई-कचरा जलाने की पुष्टि होती है तो यह पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि ई-कचरा कहां से लाया जा रहा है और इसे किस नेटवर्क के जरिए एकत्र किया जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल आग बुझाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि ई-कचरे के स्रोत, संग्रहण और निस्तारण की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए, ताकि दोबारा ऐसी गतिविधियां न हों।

तस्वीरों ने खड़े किए कई सवाल

भोजपुर थाना क्षेत्र से सामने आई आग और धुएं की तस्वीरों ने ई-कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के अंधेरे में उठता काला धुआं स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित पर्यावरणीय विभाग इस मामले में मौके पर पहुंचकर जांच करते हैं या नहीं।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के साथ-साथ ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होगा। फिलहाल स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करे।

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