रिपोर्ट :मो अरशद
मुरादाबाद बारिश और कोशी नदी में आई बाढ़ ने मूंढापांडे क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। बाढ़ के पानी ने कई संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे ग्रामीणों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। रनियाठेर से गदईखेड़ा गांव को जोड़ने वाला करीब 700 मीटर लंबा मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं और कई हिस्सों में रास्ता बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।ग्रामीणों के मुताबिक सड़क के एक बड़े हिस्से को बाढ़ के पानी ने काट दिया है। कुछ स्थानों पर करीब तीन फीट तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए रास्ते से गुजरना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए आवाजाही करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर लोगों को वाहन छोड़कर पैदल रास्ता पार करना पड़ रहा है।

700 मीटर मार्ग का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में
रनियाठेर और गदईखेड़ा को जोड़ने वाला यह संपर्क मार्ग स्थानीय ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की चौड़ाई करीब 20 मीटर है, जिसमें लगभग 10 मीटर हिस्सा बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो चुका है। पानी के तेज बहाव के कारण सड़क की मिट्टी और किनारे का हिस्सा कट गया है।सड़क के क्षतिग्रस्त होने से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, किसानों और रोजाना काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का बहाव इसी तरह बना रहा तो सड़क का और हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।स्थानीय लोगों के मुताबिक फिलहाल मार्ग की स्थिति ऐसी है कि वाहन चालकों को बेहद सावधानी से निकलना पड़ रहा है। रात के समय समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि सड़क पर बने गहरे गड्ढे आसानी से दिखाई नहीं देते।
निर्माणाधीन पुलिया में भी भरा बाढ़ का पानी
रनियाठेर और गदईखेड़ा के बीच नवनिर्मित पुलिया का निर्माण कार्य भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है। निर्माणाधीन पुलिया के आसपास बाढ़ का पानी भर गया है। इससे निर्माण कार्य आगे बढ़ाने में भी दिक्कतें आ रही हैं।ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया का निर्माण पूरा होने से उन्हें बेहतर संपर्क मार्ग की उम्मीद थी, लेकिन बाढ़ के कारण फिलहाल निर्माण कार्य प्रभावित है। पानी कम होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि पुलिया और आसपास के मार्ग को कितना नुकसान पहुंचा है।
12 साल से बाढ़ की समस्या झेलने का दावा
ग्राम प्रधान प्रशासक पति अविनाश चौहान के मुताबिक क्षेत्र के ग्रामीण पिछले करीब 12 वर्षों से बाढ़ की समस्या का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोशी नदी के बंधे के निर्माण के बाद से क्षेत्र में बाढ़ को लेकर ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है।बाढ़ की स्थिति और बांध या बंधे से जुड़े दावों को लेकर प्रशासन तथा संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे और बाढ़ से प्रभावित मार्गों की जल्द मरम्मत कराए।
लालपुर तीतरी-अहरौला मार्ग भी क्षतिग्रस्त
बाढ़ का असर केवल रनियाठेर-गदईखेड़ा मार्ग तक सीमित नहीं है। लालपुर तीतरी से अहरौला जाने वाला संपर्क मार्ग भी बाढ़ के पानी की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया है। यह मार्ग आसपास के करीब एक दर्जन गांवों को जोड़ता है।इस सड़क के खराब होने से बड़ी संख्या में ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता स्थानीय लोगों के लिए बेहद जरूरी है। सड़क खराब होने के कारण रोजमर्रा के काम, बाजार, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।ग्रामीणों के मुताबिक पानी का बहाव कम होने के बाद भी सड़क की स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जल्द निरीक्षण और मरम्मत की जरूरत है।
विधायक से भी की गई शिकायत
अहरौला मार्ग की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने कुंदरकी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह को लिखित शिकायत भी दी है। ग्रामीणों के अनुसार शिकायत में सड़क के निर्माण और मरम्मत की मांग की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद विधायक की ओर से जल्द मार्ग को दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया गया है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि सड़क की मरम्मत का काम कब शुरू होता है और उन्हें आवागमन की समस्या से कब राहत मिलती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी स्थायी राहत
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बारिश और बाढ़ के दौरान संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचता है। इसके बाद अस्थायी मरम्मत से रास्ते को चालू तो कर दिया जाता है, लेकिन अगली बाढ़ में समस्या फिर सामने आ जाती है। ऐसे में ग्रामीण केवल तत्काल मरम्मत नहीं, बल्कि बाढ़ से बार-बार क्षतिग्रस्त होने वाले मार्गों के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित सड़कों और पुलिया का मौके पर निरीक्षण कराया जाए। जहां सड़क कट गई है, वहां सुरक्षा व्यवस्था की जाए और पानी कम होते ही क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत शुरू कराई जाए।फिलहाल रनियाठेर-गदईखेड़ा और लालपुर तीतरी-अहरौला मार्ग की स्थिति ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बाढ़ का पानी कम होने और संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब ग्रामीणों को प्रशासन की कार्रवाई और मार्गों की मरम्मत का इंतजार है।
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