लखनऊ भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। 75 वर्षीय नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीति, सिनेमा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।नाना पाटेकर अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाते थे। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी अपनी ऐसी पहचान बनाई, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

कुछ यूं याद आएंगे नाना…
“पर्दे पर किरदार नहीं, वो जिंदगी उतार गए,
हर संवाद में अपनी एक पहचान छोड़ गए।
आज खामोश हुआ वो आवाज का फनकार,
मगर अभिनय की दुनिया में अमर हो गया नाना का किरदार।”
CM योगी आदित्यनाथ ने जताया गहरा दुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने अभिनेता को विलक्षण कलाकार, रंगमंच के सशक्त कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी के रूप में याद किया।सीएम योगी ने कहा कि नाना पाटेकर का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने असाधारण अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के जरिए समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।मुख्यमंत्री ने दिवंगत अभिनेता की आत्मा की शांति और उनके परिजनों तथा प्रशंसकों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति मिलने की कामना की।नाना पाटेकर केवल फिल्मों में अभिनय करने वाले कलाकार नहीं थे, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखने और समाजसेवा से जुड़े कार्यों के लिए जाने जाते रहे। महाराष्ट्र में किसानों से जुड़े सामाजिक कार्यों में भी उनकी भागीदारी चर्चा में रही है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी नाना पाटेकर के निधन पर शोक जताया। उन्होंने अभिनेता के निधन को सिनेमा जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित नाना पाटेकर ने अपने सशक्त अभिनय के दम पर भारतीय सिनेमा में विशिष्ट पहचान बनाई। अलग-अलग तरह के किरदारों को सहजता और प्रभावशाली अंदाज में निभाने की उनकी क्षमता ने हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया।नाना पाटेकर के निधन पर देशभर से लगातार श्रद्धांजलियां सामने आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने उनके अभिनय की विशिष्टता और यादगार किरदारों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

गोवा में हुआ निधन, कार्डियक अरेस्ट के बाद नहीं बच सके नाना
रिपोर्टों के मुताबिक नाना पाटेकर गोवा में थे। 8 अक्टूबर की सुबह उनके आवास पर उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर देकर बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल की ओर से उनकी मृत्यु की पुष्टि की गई।नाना पाटेकर की आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी भी गोवा में ही एक कार्यक्रम के दौरान बताई जा रही है। वह 4 अक्टूबर को एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसके महज चार दिन बाद उनके निधन की खबर ने प्रशंसकों को झकझोर दिया।
पांच दशक के सफर में छोड़ी अमिट छाप
नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा की कई यादगार फिल्मों में काम किया। 1978 में फिल्म ‘गमन’ से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने लगातार ऐसे किरदार निभाए, जिनमें उनकी अभिनय क्षमता और संवाद अदायगी की अलग छाप दिखाई दी।‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा। वहीं ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अलग अंदाज ने उन्हें नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय बनाया।नाना पाटेकर की खासियत यह थी कि वह गंभीर, संवेदनशील, खलनायक और हास्य से जुड़े किरदारों में भी अपनी अलग पहचान बना लेते थे। उनके संवाद बोलने का अंदाज और स्क्रीन पर मौजूदगी दर्शकों को तुरंत अपनी ओर खींच लेती थी।
राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री तक मिला सम्मान
नाना पाटेकर को उनके शानदार अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिले। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। अभिनय के साथ उन्होंने निर्देशन और रंगमंच में भी काम किया।उनका फिल्मी सफर केवल व्यावसायिक सफलता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने गंभीर विषयों और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को भी उतनी ही मजबूती के साथ निभाया। यही वजह है कि नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में गिना जाता है, जिनकी पहचान केवल स्टार के तौर पर नहीं, बल्कि एक बेहतरीन अभिनेता के रूप में बनी।
सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे
नाना पाटेकर के व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका सामाजिक जुड़ाव भी था। महाराष्ट्र में किसानों और ग्रामीण इलाकों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता सामने आती रही। नाम फाउंडेशन के माध्यम से भी उन्होंने सामाजिक कार्यों में योगदान दिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए उनके सामाजिक योगदान को याद किया।यही वजह है कि नाना पाटेकर के निधन पर केवल फिल्मी दुनिया ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से भी शोक संदेश सामने आ रहे हैं।
एक दौर का अंत, यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे नाना
नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए ऐसी कमी है, जिसे भरना आसान नहीं होगा। उन्होंने अपने करीब पांच दशक लंबे करियर में अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों को प्रभावित किया। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और किरदारों में उतर जाने की कला हमेशा याद की जाएगी।नाना पाटेकर ने साबित किया कि अभिनेता की असली पहचान उसके चेहरे या स्टारडम से नहीं, बल्कि उसके अभिनय की गहराई से होती है। उन्होंने जिस तरह हर किरदार को अपनी आवाज और भावनाओं से जीवंत किया, वह उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है।
“मंच से पर्दे तक जो कहानी लिख गए,
वो किरदारों में अपनी निशानी लिख गए।
वक्त थमा नहीं, जिंदगी आगे बढ़ती रही,
मगर नाना पाटेकर अपनी कला में हमेशा जिंदा रहेंगे।”
नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसने अभिनय को सिर्फ पेशा नहीं बल्कि अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। उनके प्रशंसकों के लिए उनका जाना बेहद भावुक क्षण है। लेकिन उनके निभाए किरदार, उनकी आवाज और उनका अद्वितीय अभिनय आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें याद दिलाता रहेगा।
ॐ शांति।
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