गाजीपुर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, “12 बजे तक अली-अली और 12 बजे के बाद बजरंगबली।” उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बहस को हवा दे दी है। यह बयान 13 अक्टूबर 2026 को गाजीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख एक तरफ टोपी पहनकर नमाज और फातिहा पढ़ने की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ अयोध्या जाकर त्रिशूल और चक्र लेकर हिंदू होने का संदेश देने की कोशिश करते हैं। राजभर ने इसी संदर्भ में ‘अली-अली’ और ‘बजरंगबली’ वाला तंज कसा।यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये टिप्पणियां राजभर के राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें अखिलेश यादव की मंशा या धार्मिक आस्था के बारे में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस बयान पर अखिलेश यादव की कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध कराए गए विवरण में शामिल नहीं है।

अयोध्या दौरे को लेकर अखिलेश पर निशाना
ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव के हालिया अयोध्या दौरे का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि सपा प्रमुख अयोध्या जाने के बावजूद राम मंदिर में दर्शन करने क्यों नहीं गए। राजभर ने इसे धार्मिक और राजनीतिक संदेश से जोड़ते हुए अखिलेश यादव की रणनीति पर सवाल खड़े किए।राजभर का आरोप है कि अखिलेश यादव की राजनीति में धार्मिक मुद्दों को लेकर स्पष्टता नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को बताना चाहिए कि वे किन मुद्दों पर अपने रुख पर कायम रहते हैं। राजभर ने यह भी दावा किया कि अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी और मुख्यमंत्री की ओर से चुनौती स्वीकार किए जाने के बाद सपा प्रमुख के रुख में बदलाव दिखाई दिया। राजभर के इस दावे को उनके राजनीतिक बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। चुनाव लड़ने को लेकर दोनों नेताओं के बयानों और उनके पूरे संदर्भ को समझने के लिए संबंधित वक्तव्यों की अलग से पुष्टि जरूरी है।
सपा और अखिलेश यादव पर लगाए गंभीर आरोप
गाजीपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर अन्य आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी में ऐसे लोगों को जगह दे रखी है, जिन पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। राजभर ने अपनी टिप्पणी में गुंडागर्दी, माफिया गतिविधियों और गरीबों की जमीन पर कब्जे जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता शिवपाल सिंह यादव का भी जिक्र किया। राजभर के मुताबिक, जब शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाई थी, तब उन्होंने सपा को लेकर ऐसी टिप्पणियां की थीं। राजभर ने इसी संदर्भ का हवाला देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी पहले जैसी नहीं रही है। किसी राजनीतिक दल या उसके सदस्यों के बारे में लगाए गए आरोपों को बिना प्रमाण के सच नहीं माना जा सकता। राजभर की ओर से की गई टिप्पणियां राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। इन आरोपों के संबंध में किसी विशेष मामले, व्यक्ति या घटना का निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र और विश्वसनीय प्रमाण जरूरी हैं।
रामायण के प्रसंग का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में ओमप्रकाश राजभर ने रामायण के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव और सपा कार्यकर्ताओं पर कटाक्ष किया। उन्होंने भगवान राम और हनुमान जी से जुड़े प्रसंग का हवाला दिया और सपा प्रमुख के राजनीतिक सहयोगियों को लेकर टिप्पणी की।राजभर ने अखिलेश यादव के लिए ‘रावण’ और सपा कार्यकर्ताओं के लिए ‘कालनेमि’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। यह उनकी ओर से किया गया राजनीतिक कटाक्ष था, जिसके जरिए उन्होंने विपक्षी दल के नेतृत्व और कार्यशैली पर निशाना साधने की कोशिश की। इस तरह की बयानबाजी में धार्मिक और पौराणिक प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाता है। लेकिन इससे जुड़े आरोपों और व्यंग्य को वास्तविक घटनाओं या किसी व्यक्ति के चरित्र के प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
अपने ही कार्यकर्ताओं को भी दी नसीहत
गाजीपुर के सरयू मेमोरियल इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राजभर ने केवल विपक्ष पर हमला नहीं किया, बल्कि अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी नसीहत दी। गोड़ समाज के प्रमाण पत्र और स्थानीय लोगों की समस्याओं से जुड़ा मुद्दा सामने आने पर उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर काम करने को कहा।राजभर ने कहा कि केवल मंच से भाषण देने या राजनीतिक गतिविधियों में दिखाई देने से काम नहीं चलेगा। कार्यकर्ताओं को लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए, उनके सुख-दुख को समझना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर काम नहीं करना चाहता, तो उसे राजनीति करने के बजाय घर बैठना चाहिए। इस टिप्पणी को पार्टी संगठन के भीतर सक्रियता और जनसंपर्क बढ़ाने की उनकी अपील के रूप में देखा जा सकता है।
2027 चुनाव से पहले तेज हो सकती है बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगे भी चर्चा में रह सकता है। अखिलेश यादव और ओमप्रकाश राजभर के बीच पहले भी कई मुद्दों पर बयानबाजी होती रही है। इस बार अयोध्या दौरे, राम मंदिर और धार्मिक प्रतीकों को लेकर राजभर की टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को नया विषय दे दिया है।राजभर के बयान का केंद्र अखिलेश यादव की राजनीति और धार्मिक प्रतीकों को लेकर उनकी कथित रणनीति रही। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद को समझने के लिए अखिलेश यादव का पक्ष और उनके अयोध्या दौरे का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में राजभर की टिप्पणियां प्रमुखता से सामने आई हैं, जबकि इस बयान पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं मिली है।ओमप्रकाश राजभर ने गाजीपुर में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ‘12 बजे तक अली-अली, 12 बजे के बाद बजरंगबली’ वाला तंज कसा। उन्होंने अयोध्या दौरे, राम मंदिर में दर्शन और सपा की राजनीति पर सवाल उठाए। साथ ही अपने कार्यकर्ताओं को जनता के बीच सक्रिय रहने की नसीहत भी दी। अब इस बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
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