ललितपुर रिश्वत के रुपये जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश भी एक लेखपाल को कार्रवाई से नहीं बचा सकी। उत्तर प्रदेश के ललितपुर में एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल विपुल तिवारी को 15 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। आरोप है कि जमीन पर कब्जा बरकरार रखने के नाम पर उनसे 20 हजार रुपये मांगे गए थे। शिकायत मिलने के बाद टीम ने जाल बिछाया और पहली किस्त के तौर पर 15 हजार रुपये लेते समय कार्रवाई की।मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब आरोपी को टीम की मौजूदगी का शक हुआ। के लेखपाल अपने किराये के मकान में गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद उसने कथित तौर पर रिश्वत में मिले नोट गैस चूल्हे पर जला दिए और उनके अवशेष सिंक में बहाने की कोशिश की।एंटी करप्शन टीम ने मौके पर पहुंचकर जले हुए नोटों के टुकड़े बरामद कर लिए।

जमीन पर कब्जा बनाए रखने के लिए मांगी थी रिश्वत
यह मामला ललितपुर के टौरिया गांव में जमीन पर कब्जा बनाए रखने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मनोज कुमार राजपूत ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी कि क्षेत्रीय लेखपाल विपुल तिवारी ने जमीन पर उनका कब्जा बरकरार रखने के एवज में 20 हजार रुपये की मांग की।जमीन की हदबंदी पहले कराई जा चुकी थी और संबंधित भूमि पर पत्थरगड्डी भी हुई थी। इसके बावजूद जमीन से जुड़े राजस्व मामले में कब्जा बनाए रखने के नाम पर रिश्वत मांगे जाने का आरोप लगाया गया।शिकायत मिलने के बाद झांसी की एंटी करप्शन ट्रैप टीम ने मामले में कार्रवाई की तैयारी की। कथित तौर पर तय रकम में से 15 हजार रुपये पहली किस्त के रूप में देने की बात हुई। इसके बाद टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए योजना बनाई।
कई जगह घुमाने के बाद अपने किराये के मकान पहुंचा आरोपी
शिकायतकर्ता और लेखपाल के बीच रुपये देने को लेकर बातचीत हुई। शुरुआत में लेखपाल ने अलग-अलग स्थानों पर रुपये लेने से परहेज किया। बताया गया कि वह शिकायतकर्ता को कई जगह लेकर गया, लेकिन अंत में हेरिटेज कॉलोनी के आजादपुरा क्षेत्र स्थित अपने किराये के मकान पहुंचा।आरोप है कि मकान के बाहर शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपये लेने के बाद उसे एंटी करप्शन टीम की मौजूदगी का अंदेशा हो गया। इसके बाद वह अंदर गया और दरवाजा बंद कर लिया। टीम ने दरवाजा खोलने के लिए कहा, लेकिन दरवाजा नहीं खोला गया। बाद में टीम ने पुलिस की मदद से अंदर प्रवेश किया।
गैस चूल्हे पर जलाए नोट, सिंक से मिले अवशेष
जब टीम घर के अंदर पहुंची तो वहां धुआं भरा हुआ था। तलाशी के दौरान रसोई के सिंक में नोटों के जले हुए छोटे-छोटे टुकड़े मिले। आरोप है कि लेखपाल ने रिश्वत के रुपयों को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी और फिर जले हुए अवशेषों को पानी के साथ बहाना चाहा।लेकिन यह कोशिश काम नहीं आई। टीम ने सिंक से नोटों के जले हुए अवशेष बरामद कर लिए। मौके की वीडियोग्राफी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है।इस घटना का सबसे अहम पहलू यह रहा कि कथित रिश्वत की रकम को नष्ट करने के प्रयास के बावजूद टीम को मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले। बरामद अवशेषों और अन्य साक्ष्यों को मामले की जांच में शामिल किया गया।
हाथों की जांच में गुलाबी हुआ पानी
रिश्वत पकड़ने के लिए एंटी करप्शन टीम अक्सर विशेष रासायनिक पदार्थ से जुड़े ट्रैप का इस्तेमाल करती है। इस मामले में भी शिकायतकर्ता को दिए गए नोटों पर रासायनिक पदार्थ लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपी के हाथों को रासायनिक घोल से धुलवाया गया तो पानी गुलाबी हो गया। यह परिणाम ट्रैप कार्रवाई में इस्तेमाल किए गए रसायन के संपर्क का संकेत माना गया। जले नोटों के अवशेष, मौके की वीडियोग्राफी और अन्य साक्ष्यों के साथ इस जांच को भी कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया।इस तरह नोटों को जलाने की कथित कोशिश के बावजूद टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए और आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की। <Cite refs=
पत्नी को लेकर क्या सामने आया?
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर यह दावा भी किया जा रहा है कि लेखपाल की पत्नी ने नोट जलाए। हालांकि, उपलब्ध प्रमुख समाचार रिपोर्टों में नोट जलाने की कोशिश लेखपाल विपुल तिवारी की ओर से किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्टों में पत्नी के मकान के अंदर मौजूद होने का उल्लेख है, लेकिन नोट जलाने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी पर डालने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
कार्रवाई के बाद लेखपाल को पकड़कर सदर कोतवाली ले जाया गया। मामले में रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों के संबंध में कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। एंटी करप्शन टीम ने कथित रिश्वत की रकम, जले हुए नोटों के अवशेष और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की।यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी या आरोप लगना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई ने खड़े किए सवाल
ललितपुर का यह मामला सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों की परेशानियों पर सवाल खड़ा करता है। जमीन की हदबंदी, कब्जे और राजस्व अभिलेखों से जुड़े मामलों में नागरिकों को नियमों के मुताबिक सेवा मिलना जरूरी है। यदि किसी कर्मचारी पर रिश्वत मांगने का आरोप सामने आता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।इस मामले में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर नोट जलाने की कोशिश ने घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि शिकायत के आधार पर कार्रवाई हुई और मामले को कानूनी प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ाया गया।
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