राम गोविंद चौधरी का निधन: 8 बार विधायक, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नहीं रहे

Editorial
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लखनऊ समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार रात करीब 10:15 बजे लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई/PGI) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमन की ओर से की गई। राम गोविंद चौधरी लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति, खासकर बलिया की समाजवादी राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे।उनके निधन की खबर सामने आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। आठ बार विधायक रहे राम गोविंद चौधरी ने छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और कई दशकों तक उत्तर प्रदेश विधानसभा की राजनीति में सक्रिय रहे। वर्ष 2017 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली। इससे पहले वह समाजवादी पार्टी की सरकारों में मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाल चुके थे।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर

राम गोविंद चौधरी का जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया के गोसाईपुर गांव में हुआ था। उन्होंने स्नातक के बाद एलएलबी की पढ़ाई की और पेशे से अधिवक्ता रहे। कॉलेज के दिनों में ही वह छात्र राजनीति से जुड़ गए थे। बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में छात्र राजनीति के बाद उनका जुड़ाव लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से हुआ। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।समाजवादी विचारधारा से उनका जुड़ाव काफी पुराना रहा। उनके राजनीतिक सफर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का प्रभाव बताया जाता है। चंद्रशेखर को वह अपना राजनीतिक गुरु भी मानते थे। उनके समर्थकों के बीच एक प्रसंग अक्सर चर्चा में रहा कि अपने राजनीतिक गुरु चंद्रशेखर के क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम मतदान मिलने को लेकर उन्होंने संगठन और राजनीति के प्रति अपनी जवाबदेही को बेहद गंभीरता से लिया था। हालांकि इस खास प्रसंग के विस्तृत दस्तावेजी विवरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिलती।

राम गोविंद चौधरी का निधन
राम गोविंद चौधरी का निधन

1977 में पहली बार बने विधायक

राम गोविंद चौधरी ने आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 में भी उन्होंने विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। बाद में उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वह कुल आठ बार विधायक चुने गए।बलिया की राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जिनका विधानसभा क्षेत्र के साथ लंबे समय तक सीधा राजनीतिक जुड़ाव रहा। विधानसभा में उनकी सक्रियता और मुद्दों को सदन में उठाने की शैली के कारण भी वह चर्चा में रहे।

राम गोविंद चौधरी का निधन
राम गोविंद चौधरी का निधन
राम गोविंद चौधरी का निधन
राम गोविंद चौधरी का निधन

मुलायम सिंह यादव सरकार में संभाली मंत्री की जिम्मेदारी

राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक कद बढ़ता गया और उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बनने का अवसर मिला। विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार वह 2003 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव सरकार में मंत्री रहे। इसके बाद वर्ष 2012 में बनी अखिलेश यादव सरकार में भी उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई।मंत्री के रूप में उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल सरकार के कामकाज में किया गया। इसके साथ ही वह विधानसभा की राजनीति में भी लगातार सक्रिय रहे।

2017 में बने विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और समाजवादी पार्टी विपक्ष में आ गई। इसके बाद राम गोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड में 27 मार्च 2017 से उनके नेता प्रतिपक्ष रहने का उल्लेख मिलता है।नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाई। सदन में उनके भाषणों, सवालों और सरकार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर हस्तक्षेप को उनके लंबे राजनीतिक अनुभव से जोड़कर देखा जाता रहा। विधानसभा रिकॉर्ड के मुताबिक उनके नाम से सैकड़ों प्रश्न और चर्चाएं दर्ज हैं।

2022 में बांसडीह सीट से मिली हार

लंबे समय तक चुनावी राजनीति में सक्रिय रहने वाले राम गोविंद चौधरी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बांसडीह सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह से हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही लंबे समय तक विधानसभा में उनकी चुनावी मौजूदगी का सिलसिला थम गया।हालांकि चुनावी राजनीति से दूरी के बावजूद समाजवादी पार्टी में उनका महत्व बना रहा। वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे और बलिया की राजनीति में उनकी अलग पहचान कायम रही।

लंबे समय की राजनीतिक विरासत छोड़ गए राम गोविंद चौधरी

राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन करीब पांच दशक तक फैला रहा। छात्र राजनीति से लेकर आठ बार विधायक बनने, मंत्री पद संभालने और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने तक उनका सफर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबा और महत्वपूर्ण रहा।उनकी पहचान विशेष रूप से बलिया के समाजवादी नेता के तौर पर रही। उन्होंने लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद तक पहुंचने का मौका भले नहीं पाया, लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा। मंत्री और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी भूमिका निभाई।शुक्रवार रात लखनऊ के PGI में उनके निधन की खबर के बाद समाजवादी पार्टी और उनके समर्थकों में शोक का माहौल है। पार्टी नेताओं की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।राम गोविंद चौधरी का निधन समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बलिया की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है। आठ बार विधायक, पूर्व मंत्री और विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा लंबे समय तक याद की जाएगी।

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