
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में हर दिन नए खुलासे और नए दावे सामने आ रहे हैं। अब इस बहुचर्चित मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा के परिवार ने जांच और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लवकुश मिश्रा के दादा ने दावा किया है कि पूरे प्रकरण में बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा गया है। उनका कहना है कि जिन लोगों की भूमिका सबसे अहम है, उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।लवकुश मिश्रा के दादा ने कहा कि उनका पोता पिछले कई वर्षों से मंदिर परिसर में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था। वह केवल अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करता था। यदि चढ़ावे की रकम में किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों पर नहीं डाली जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे सिस्टम में जो लोग फैसले लेने की स्थिति में थे, उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है और छोटे कर्मचारियों को जेल भेजकर मामले को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।परिवार का कहना है कि जांच एजेंसियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को आरोपी बनाकर कार्रवाई पूरी नहीं मान लेनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगाया जा रहा है तो यह संभव नहीं कि इसकी जानकारी केवल कुछ कर्मचारियों तक ही सीमित रही हो। इसलिए जांच की दिशा उन लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए जो प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों से जुड़े थे।इस बीच एसआईटी और पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुलिस पहले ही इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ जारी है। जांच अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आए सीसीटीवी फुटेज और बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। इन्हीं के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित गबन में किसकी कितनी भूमिका रही। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि यह कथित अनियमितता कब से चल रही थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।दूसरी ओर लवकुश मिश्रा के परिवार का कहना है कि उनके बेटे को बिना पूरे तथ्य सामने आए दोषी मान लिया गया है। उनका आरोप है कि मीडिया ट्रायल और शुरुआती कार्रवाई के कारण परिवार सामाजिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक किसी भी आरोपी को अंतिम रूप से दोषी न माना जाए और सभी तथ्यों को निष्पक्ष तरीके से सामने लाया जाए।राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला पहले से ही देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में हर नए खुलासे के साथ सवाल भी बढ़ते जा रहे हैं। अब लवकुश मिश्रा के दादा के इस बयान ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। उनका आरोप है कि “बड़ों को बचाने के लिए छोटों को जेल भेजा गया है”, जिससे जांच की निष्पक्षता पर भी बहस तेज हो गई है।फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां परिवार के आरोपों को किस तरह परखती हैं और क्या जांच का दायरा आगे बढ़ाकर उन सभी लोगों तक पहुंचाया जाता है जिनकी भूमिका इस पूरे प्रकरण में सामने आ सकती है। आने वाले दिनों में एसआईटी की रिपोर्ट और आगे की गिरफ्तारियां इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेंगी।
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