रिपोर्ट : दीपचंद दीक्षित
फर्रुखाबाद पांचाल घाट स्थित गंगा तट पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक श्रीरामनगरिया मेला एवं विकास प्रदर्शनी-2027 को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज करने की कवायद शुरू कर दी है। मेले में साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन का जोर साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर रहेगा। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मेले से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की समय रहते कार्ययोजना तैयार की जाए और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार, फतेहगढ़ में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मेला समिति के सदस्यों और संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मेले की तैयारियों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और गंगा घाटों की स्वच्छता सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। समिति के सदस्यों ने भी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव रखे।प्रशासन के अनुसार, रामनगरिया मेला-2027 का आयोजन 22 जनवरी से 20 फरवरी 2027 तक किया जाएगा। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों को अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।


श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर रहेगा विशेष जोर
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने स्पष्ट किया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। इसके लिए मेला क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, अस्थायी शौचालय और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि वे अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करें और आपसी समन्वय के साथ काम करें।गंगा तट पर लगने वाले इस मेले में कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचने वाले लोगों की सुविधाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। ऐसे में मेला क्षेत्र की स्वच्छता और व्यवस्थित आवागमन के साथ जरूरी नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।प्रशासन की ओर से विभागवार कार्ययोजना तैयार करने की बात कही गई है, ताकि मेले के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखा जा सके। तैयारियों में किसी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए अधिकारियों को समय से जरूरी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा में दूषित पानी का प्रवाह रोकने की मांग
बैठक में गंगा नदी की स्वच्छता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मेला समिति के सदस्यों ने मांग की कि मेले के दौरान गंगा में गंदे और दूषित पानी का प्रवाह रोकने के लिए संबंधित विभाग प्रभावी कदम उठाएं। इसके साथ ही गंगा घाटों पर नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया।गंगा तट पर आयोजित होने वाले रामनगरिया मेले में स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। ऐसे में घाटों की स्वच्छता बनाए रखना श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ नदी की स्वच्छता के लिहाज से भी अहम है। समिति के सदस्यों ने इस दिशा में संबंधित विभागों की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया।अब इस सुझाव पर संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आगे की कार्ययोजना में स्पष्ट होगा। प्रशासन के सामने मेले के दौरान घाटों को स्वच्छ रखने और श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी रहेगी।
अराजक तत्वों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
रामनगरिया मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। समिति के सदस्यों ने नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों, मनचलों और अराजक तत्वों पर पुलिस की निगरानी मजबूत रखने का सुझाव दिया। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया।धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस लिहाज से पुलिस और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की जरूरत पर बल दिया गया। मेले में आने वाले लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रखने की बात कही गई।समिति के सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मेला क्षेत्र में अन्ना पशुओं पर रोक लगाने का सुझाव
बैठक में मेला क्षेत्र में अन्ना पशुओं के विचरण का मुद्दा भी उठाया गया। समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि मेले के दौरान आवारा पशुओं को क्षेत्र में घूमने से रोकने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। इससे श्रद्धालुओं के आवागमन में बाधा कम करने और मेला क्षेत्र को व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।मेले में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही को देखते हुए रास्तों और सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित रखना जरूरी है। ऐसे में अन्ना पशुओं की समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने का सुझाव दिया गया।
पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक होता है आयोजन
अपर जिलाधिकारी न्यायिक दिनेश कुमार ने बताया कि पांचाल घाट पर प्रतिवर्ष पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक रामनगरिया मेला एवं विकास प्रदर्शनी का आयोजन होता है। इस बार मेले की अवधि 22 जनवरी से 20 फरवरी 2027 निर्धारित की गई है।रामनगरिया मेला फर्रुखाबाद की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। गंगा तट पर लगने वाले इस मेले में साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है। धार्मिक गतिविधियों के साथ मेले से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना प्रशासन और मेला समिति की प्राथमिकताओं में शामिल है।
जिलाधिकारी ने विभागवार कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश
बैठक में सामने आए सुझावों पर जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को विभागवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रामनगरिया मेला जनपद की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इसलिए तैयारियों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।बैठक में नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार, अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार, परियोजना निदेशक डीआरडीए कपिल कुमार, क्षेत्राधिकारी नगर अभय वर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और मेला समिति के सदस्य उपस्थित रहे।रामनगरिया मेला-2027 को लेकर जिला प्रशासन ने शुरुआती तैयारियों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में सफाई, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और गंगा घाटों की व्यवस्था को लेकर विभागों की भूमिका अहम रहेगी। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बैठक में दिए गए निर्देशों और समिति के सुझावों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है, ताकि 22 जनवरी से शुरू होने वाले मेले में श्रद्धालुओं को सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
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