लखनऊ मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ती न्यूरोलॉजिकल बीमारियों और स्ट्रोक के खतरे को लेकर चिंता जताई। डॉक्टरों ने कहा कि बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठे रहना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और तंबाकू का सेवन न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के प्रमुख जोखिम कारक बन रहे हैं। विशेषज्ञों ने समय पर जांच, बीमारी की शुरुआती पहचान और बेहतर इलाज को बेहद जरूरी बताया।
- युवाओं में भी बढ़ रहा स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा
- भारत में बढ़ रहा न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बोझ
- उत्तर प्रदेश में हाई ब्लड प्रेशर बड़ी चुनौती
- मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में आधुनिक इलाज पर चर्चा
- स्ट्रोक के इलाज में समय सबसे महत्वपूर्ण
- न्यूरोसर्जरी और न्यूरो इमेजिंग में नई तकनीकों पर मंथन
- डॉ. राकेश कपूर ने बताया कॉन्क्लेव का उद्देश्य
- इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
- जागरूकता से कम हो सकता है न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा
युवाओं में भी बढ़ रहा स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा
लखनऊ में आयोजित मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में देशभर से आए न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट और न्यूरो क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों ने न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि दिमाग और नसों से जुड़ी बीमारियां अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई हैं। युवाओं में भी स्ट्रोक और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के मामले देखने को मिल रहे हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियों की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और तंबाकू का सेवन स्ट्रोक समेत कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसे में लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की जरूरत है।

भारत में बढ़ रहा न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बोझ
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) स्टडी के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां दुनियाभर में खराब स्वास्थ्य और विकलांगता का एक बड़ा कारण बन चुकी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में बड़ी संख्या में लोग दिमाग और नसों से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित हैं।भारत में भी स्ट्रोक एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आया है। देश में हर साल करीब 18 से 20 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के कई जोखिम कारकों की समय रहते पहचान करके इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में हाई ब्लड प्रेशर बड़ी चुनौती
देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में भी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बोझ लगातार चिंता का विषय बन रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तंबाकू का सेवन और समय पर विशेषज्ञ इलाज तक नहीं पहुंच पाना स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब हर चार में से एक वयस्क को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। हाई ब्लड प्रेशर को स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में गिना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित ब्लड प्रेशर जांच और समय पर उपचार से गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में आधुनिक इलाज पर चर्चा
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मेदांता लखनऊ की ओर से मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में देशभर के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और न्यूरो क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।कार्यक्रम में स्ट्रोक के आधुनिक इलाज, मिर्गी, मूवमेंट डिसऑर्डर, न्यूरो ऑन्कोलॉजी, न्यूरो इमेजिंग, दिमाग और रीढ़ की कम चीरा लगाने वाली सर्जरी और मरीजों की रिकवरी से जुड़े उपचार के नए तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।कॉन्क्लेव का नेतृत्व डॉ. अनूप कुमार ठक्कर, डायरेक्टर न्यूरोलॉजी; डॉ. रतीश जुयाल, डायरेक्टर न्यूरोलॉजी; डॉ. रवि शंकर, डायरेक्टर न्यूरोसर्जरी; डॉ. कमलेश सिंह भैसोरा, डायरेक्टर न्यूरोसर्जरी और डॉ. रोहित अग्रवाल, डायरेक्टर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ने किया। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे विशेषज्ञों ने जटिल मरीजों के मामलों और आधुनिक इलाज की तकनीकों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
स्ट्रोक के इलाज में समय सबसे महत्वपूर्ण
कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के मरीजों के लिए समय पर इमरजेंसी उपचार की व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द से जल्द विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।आधुनिक न्यूरो इमेजिंग तकनीकों के जरिए बीमारी की जल्द पहचान और सही उपचार रणनीति तय करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ और मरीज की रिकवरी से जुड़े विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
न्यूरोसर्जरी और न्यूरो इमेजिंग में नई तकनीकों पर मंथन
वैज्ञानिक सत्रों में दिमाग और रीढ़ की कम चीरा लगाने वाली सर्जरी, मिर्गी के इलाज, गंभीर न्यूरोलॉजिकल मरीजों की देखभाल, न्यूरो इमेजिंग और दिमाग की कार्यप्रणाली से जुड़ी सर्जरी में हो रही प्रगति पर चर्चा हुई।विशेषज्ञों ने कहा कि न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में लगातार नई तकनीकें सामने आ रही हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य बीमारी की सटीक पहचान, कम जोखिम के साथ उपचार और मरीज की बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना है।
डॉ. राकेश कपूर ने बताया कॉन्क्लेव का उद्देश्य
मेदांता लखनऊ के मेडिकल डायरेक्टर और डायरेक्टर, यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां हर उम्र के लोगों में तेजी से आम हो रही हैं और आने वाले वर्षों में इनका बोझ बढ़ने की संभावना है।उन्होंने कहा कि न्यूरो कॉन्क्लेव का उद्देश्य देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना, जटिल मरीजों के मामलों पर चर्चा करना और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में हुई नई प्रगति को मरीजों तक पहुंचाने के तरीकों पर विचार करना है। उन्होंने बेहतर इलाज के लिए बीमारी की समय पर पहचान, विशेषज्ञ देखभाल और समय पर उपचार को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों ने लोगों को स्ट्रोक और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के संभावित लक्षणों को लेकर जागरूक रहने की सलाह दी। शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, शरीर का संतुलन बिगड़ना, अचानक तेज सिरदर्द या बेहोशी जैसे लक्षण सामने आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की जरूरत है।डॉक्टरों ने लोगों से नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने, तंबाकू से दूर रहने और नियमित शारीरिक गतिविधि करने की अपील की।
जागरूकता से कम हो सकता है न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से बचाव के लिए सिर्फ आधुनिक अस्पताल और तकनीक ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लोगों में जागरूकता भी जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और बीमारी के शुरुआती संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद महत्वपूर्ण है।मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि समय पर जांच, स्ट्रोक की तुरंत पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र तक जल्द पहुंच और मल्टी-स्पेशियलिटी इलाज से मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ लोगों को जागरूक करना भी बेहद जरूरी है।
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