लखनऊ सावन के तीसरे सोमवार, 17 अगस्त को राजधानी लखनऊ में भगवान शिव की भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। चौक कोतवाली स्थित प्रसिद्ध श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर से बाबा श्री कोतवालेश्वर महादेव की भव्य नगर भ्रमण यात्रा निकाली गई। इस दौरान भगवान शिव को विशेष रूप से तैयार की गई चांदी की पालकी में विराजमान कराया गया। बाबा के नगर भ्रमण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।
चांदी की पालकी में विराजमान हुए बाबा कोतवालेश्वर
सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटने लगी थी। विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्री कोतवालेश्वर महादेव को चांदी की पालकी में विराजमान कराया गया। इसके बाद मंदिर के महंत विशाल गौड़ ने बाबा की विधिवत आरती की।बाबा के नगर भ्रमण के लिए मंदिर से पालकी के बाहर निकलते ही वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रशासन की ओर से बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। होमगार्ड बैंड ने धार्मिक धुनों के साथ बाबा को नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान कराया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा करते हुए बाबा का स्वागत किया।

हरि से हर का हुआ अद्भुत मिलन
श्री कोतवालेश्वर महादेव की नगर भ्रमण यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण हरि से हर का मिलन रहा। मंदिर से यात्रा खुनखुन जी रोड होते हुए कोणेश्वर मंदिर पहुंची। यहां विराजमान भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव के इस प्रतीकात्मक मिलन के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।इसके बाद नगर भ्रमण यात्रा कोणेश्वर चौराहा, चौक चौराहा, कंचन मार्केट, चरक चौराहा और कमला नेहरू मार्ग से होते हुए वापस श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया। मंदिर वापस पहुंचने के बाद भव्य आतिशबाजी के साथ नगर भ्रमण यात्रा का समापन हुआ।

उज्जैन की तर्ज पर दिखी भव्यता
श्री कोतवालेश्वर महादेव की इस नगर भ्रमण यात्रा को उज्जैन की धार्मिक परंपराओं की तर्ज पर भव्य स्वरूप दिया गया। यात्रा में धार्मिक झांकियों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। महाराष्ट्र से आए रंगोली कलाकारों ने यात्रा के पूरे मार्ग पर आकर्षक रंगोलियां बनाईं। रंगोलियों और पुष्प सज्जा से यात्रा मार्ग का दृश्य बेहद मनमोहक नजर आया।यात्रा में प्रशासनिक घोड़े, लिल्ली घोड़ी, हाथी और ऊंट भी शामिल रहे। इसके अलावा विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। डीजे इलु मस्ताना झांकी, ब्रास बैंड, बग्घियां, डमरू ग्रुप, बनारस की झांकी और झंकार बैंड ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।यात्रा में भगवान शंकर की करीब 11 फीट ऊंची प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पीले वस्त्रों में महिलाओं का समूह झांझ बजाते हुए भक्ति गीत गा रहा था। जगह-जगह श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारे लगाते नजर आए।

श्रद्धालुओं ने की पुष्पवर्षा
नगर भ्रमण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा कोतवालेश्वर के दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर मौजूद रहे। जैसे ही चांदी की पालकी में बाबा की सवारी आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। कई स्थानों पर लोगों ने भगवान शिव की आरती उतारी और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।पूरे यात्रा मार्ग पर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह नगर भ्रमण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भगवान शिव से जुड़ने और उनकी कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर रहा।
कई प्रमुख हस्तियां भी हुईं शामिल
श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विशाल गौड़ ने बताया कि नगर भ्रमण यात्रा में कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी सहभागिता की। इनमें उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, भाजपा नेत्री एवं समाजसेविका अपर्णा यादव, भाजपा नेता नीरज सिंह, राज्यसभा सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय कटियार सहित अन्य प्रमुख लोग शामिल हुए।आयोजन में श्री कोतवालेश्वर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रस्ट से जुड़े अजय अग्रवाल, सोनू अग्रवाल, आनंद रस्तोगी, अजय खन्ना, संदीप अग्रवाल, अंकुर दीक्षित, पंकज अग्रवाल, अवध अग्रवाल, आशीष मिश्रा, डॉ. राज कुमार वर्मा, अनुराग मिश्रा और निखिल अग्रवाल सहित कई लोग मौजूद रहे।इसके अलावा आचार्य पं. विजेंद्र नाथ गौड़, पं. हर्षित तिवारी, पं. शशांक वशिष्ठ, राजेश शुक्ला और नीरज अवस्थी समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं श्रद्धालु नगर भ्रमण यात्रा में शामिल हुए।
सावन के तीसरे सोमवार पर आस्था का महासंगम
सावन के तीसरे सोमवार पर निकली श्री कोतवालेश्वर महादेव की यह नगर भ्रमण यात्रा लखनऊ में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का बड़ा उदाहरण बनी। चांदी की पालकी में विराजमान बाबा कोतवालेश्वर के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ ने पूरे आयोजन को भव्य बना दिया।श्रद्धालुओं का मानना रहा कि नगर भ्रमण के माध्यम से बाबा स्वयं नगर का हाल-चाल जानने और अपने भक्तों को आशीर्वाद देने निकले। यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़, धार्मिक झांकियां, बैंड-बाजे, डमरू दल, पुष्पवर्षा और शिवभक्ति के जयघोष ने राजधानी के माहौल को पूरी तरह शिवमय कर दिया। भव्य आतिशबाजी के साथ यात्रा के समापन ने सावन के इस विशेष दिन को यादगार बना दिया।
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