सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में महिला थाना पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर एक मामले में वांछित अभियुक्त के खिलाफ उद्घोषणा की कार्रवाई की है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/एफटीसी प्रथम, सिद्धार्थनगर के आदेश के क्रम में पुलिस टीम ग्राम करीमपुर बर्डपुर-11 पहुंची, लेकिन अभियुक्त निजाम अहमद अंसारी अपने घर पर नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने न्यायालय के आदेश की प्रति उसके घर के दरवाजे पर चस्पा की और गांव में मुनादी कराई। पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।पुलिस के अनुसार, अभियुक्त निजाम अहमद अंसारी पुत्र शकील अहमद, निवासी ग्राम करीमपुर बर्डपुर-11, थाना व जनपद सिद्धार्थनगर, महिला थाना में दर्ज मुकदमे में वांछित है। न्यायालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 184 के अंतर्गत उसे फरार घोषित करने की उद्घोषणा जारी की गई थी। इसी आदेश के अनुपालन में महिला थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की।
महिला थाना प्रभारी भाग्यवती पाण्डेय के नेतृत्व में कार्रवाई
पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महिला थाना प्रभारी निरीक्षक श्रीमती भाग्यवती पाण्डेय पुलिस टीम के साथ न्यायालय के आदेश का तामिला कराने के लिए अभियुक्त के गांव पहुंचीं। टीम ने ग्राम करीमपुर बर्डपुर-11 स्थित उसके आवास पर पहुंचकर तलाश की, लेकिन अभियुक्त वहां मौजूद नहीं मिला।इसके बाद पुलिस ने गांव के संभ्रांत व्यक्तियों की मौजूदगी में न्यायालय के आदेश की प्रति अभियुक्त के घर के दरवाजे पर चस्पा की। साथ ही गांव में मुनादी कराकर उद्घोषणा की जानकारी दी गई। पुलिस ने कार्रवाई को दर्ज करने के लिए फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई।पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य न्यायालय के आदेश का पालन कराना और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। हालांकि, अभियुक्त की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्रवाई के संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

किन धाराओं में दर्ज है मुकदमा?
पुलिस के मुताबिक, महिला थाना सिद्धार्थनगर में मुकदमा अपराध संख्या 39/2025 दर्ज है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, 115(2) और 352 के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 तथा मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज किया गया है।इन धाराओं के तहत दर्ज मुकदमे में निजाम अहमद अंसारी वांछित है। पुलिस ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उसके घर पर उद्घोषणा की प्रति चस्पा कराई और गांव में मुनादी कराई।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी मामले में आरोपी या अभियुक्त का नाम दर्ज होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होता है।

न्यायालय के आदेश पर घर के बाहर चस्पा किया गया नोटिस
महिला थाना पुलिस के अनुसार, न्यायालय की ओर से जारी उद्घोषणा के आदेश का तामिला कराने के लिए पुलिस टीम निर्धारित पते पर पहुंची थी। अभियुक्त के नहीं मिलने पर आदेश की प्रति उसके घर के दरवाजे पर चस्पा की गई। यह कार्रवाई गांव के संभ्रांत लोगों की मौजूदगी में की गई।इसके साथ ही गांव में मुनादी कराकर लोगों को न्यायालय के आदेश की जानकारी दी गई। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि कार्रवाई का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके।न्यायालय के आदेशों का अनुपालन आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस इकाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाती है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
सिद्धार्थनगर महिला थाना पुलिस की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। पुलिस के मुताबिक, अभियुक्त के घर पर उद्घोषणा की प्रति चस्पा करने और गांव में मुनादी कराने की कार्रवाई पूरी कर ली गई है।फिलहाल, उपलब्ध पुलिस जानकारी में अभियुक्त की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह संबंधित न्यायालय के आदेशों और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।सिद्धार्थनगर में न्यायालय के आदेश पर हुई इस कार्रवाई में महिला थाना प्रभारी भाग्यवती पाण्डेय की टीम ने अभियुक्त के घर पर उद्घोषणा की प्रति चस्पा कराई और गांव में मुनादी कराई। पुलिस ने पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराते हुए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया।
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