बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर गरमाई सियासत, कांग्रेस के आरोपों पर बीकेटीसी अध्यक्ष का पलटवार

Editorial
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 उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावा हेराफेरी के मामले ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल लगातार बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने उनके आरोपों का करारा जवाब देते हुए कहा है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पास कोई ठोस तथ्य हैं तो उनका जवाब सड़क पर नहीं, बल्कि बदरी विशाल और बाबा केदार के दरबार में दिया जाएगा।चढ़ावा हेराफेरी के मामले ने पहले प्रशासनिक हलकों में हलचल मचाई थी, लेकिन अब यह भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी का कारण बन गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं और पूरे मामले को लेकर जनता के बीच अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘आस्था के मुद्दे पर राजनीति उचित नहीं’

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में इन मंदिरों से जुड़े मामलों को राजनीतिक मंचों या सार्वजनिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के उस आरोप का भी जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि चढ़ावा गणना में तैनात आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति हेमंत द्विवेदी ने की थी।द्विवेदी ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह तथ्यहीन है। उनके अनुसार प्रमोद नौटियाल अप्रैल 2025 से गणना ड्यूटी पर कार्यरत था, जबकि उस समय वे बीकेटीसी के अध्यक्ष नहीं थे। इसलिए उनकी नियुक्ति को उनके कार्यकाल से जोड़ना गलत और भ्रामक है।

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मंदिर निधि को लेकर भी दिया जवाब

हेमंत द्विवेदी ने मंदिर समिति के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बदरी-केदार मंदिर समिति अधिनियम के अनुसार मंदिर कोष का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है। समिति की निधि से अन्य विकास कार्य कराना नियमों के अनुरूप नहीं है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिनसर मंदिर और पोखरी के शिव मंदिर बीकेटीसी के अधीन नहीं आते। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार के समय इन मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए धनराशि जारी की गई थी।

बोर्ड बैठक पर भी उठाए सवाल

बीकेटीसी अध्यक्ष ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि गणेश गोदियाल अपने कार्यकाल में बोर्ड बैठक के जरिए प्रस्ताव पारित होने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके पास ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि उस समय केवल तीन लोगों की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित कराया गया था।उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में समिति के पास पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध हैं। यदि आवश्यकता पड़ी तो उन्हें सार्वजनिक भी किया जा सकता है।

पदोन्नति पर भी उठाए सवाल

द्विवेदी ने कहा कि बीकेटीसी में वैयक्तिक सहायक (Personal Assistant) का पद वर्ष 1983 से अस्तित्व में है, लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नियमों की अनदेखी करते हुए प्रमोद नौटियाल को इस पद पर पदोन्नति दी गई।उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इस मामले की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

चढ़ावा विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा हेराफेरी का मामला अब केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस लगातार मंदिर समिति की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा इसे आस्था के मुद्दे का राजनीतिकरण बता रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चारधाम से जुड़ा यह विवाद आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम का धार्मिक और सामाजिक महत्व अत्यंत व्यापक है।

जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें

फिलहाल चढ़ावा हेराफेरी के मामले में जांच प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या आरोपों की पुष्टि होती है।इस पूरे विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। फिलहाल बदरीनाथ मंदिर का चढ़ावा विवाद उत्तराखंड की राजनीति के सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल हो गया है।

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