एम्स रायबरेली में पांच दिवसीय चिकित्सा शिक्षा संकाय विकास कार्यक्रम का सफल आयोजन

Editorial
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रायबरेली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली की चिकित्सा शिक्षा इकाई (MEU) की ओर से संस्थान की सतत संकाय विकास पहल के अंतर्गत पांच दिवसीय चिकित्सा शिक्षा संकाय विकास कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संकाय सदस्यों को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा की बदलती आवश्यकताओं से परिचित कराना और सक्षमता-आधारित चिकित्सा शिक्षा (CBME) से जुड़ी उनकी दक्षताओं को और मजबूत करना रहा।इस संकाय विकास कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्यों के लिए करिकुलम अपग्रेडेशन प्रोग्राम (CAP) और कनिष्ठ संकाय सदस्यों के लिए फाउंडेशन कोर्स इन मेडिकल एजुकेशन (FCME) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा विभाग, जिपमेर (JIPMER), पुद्दुचेरी के शैक्षणिक सहयोग से संपन्न हुआ।

CBME से जुड़ी दक्षताओं को मजबूत करने पर जोर

पांच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा शिक्षा में Competency-Based Medical Education (CBME) के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संकाय सदस्यों को प्रभावी अध्यापन, मूल्यांकन और पाठ्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आवश्यक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करना रहा।कार्यक्रम में पाठ्यक्रम नियोजन, पाठ्यक्रम क्रियान्वयन, पाठ्यक्रम एकीकरण और मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा Curriculum Governance यानी पाठ्यक्रम संचालन की प्रभावी व्यवस्था पर भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई।विशेषज्ञों ने शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण-अधिगम विधियों पर भी जोर दिया। इसके तहत ऐसी शिक्षण पद्धतियों पर चर्चा की गई, जिनमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो और वे केवल जानकारी प्राप्त करने के बजाय सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

AETCOM और Self-Directed Learning पर विशेष सत्र

कार्यक्रम में AETCOM (Attitude, Ethics and Communication) से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया। चिकित्सा शिक्षा में विद्यार्थियों के व्यवहार, नैतिक मूल्यों और प्रभावी संवाद कौशल के महत्व पर चर्चा की गई।इसके साथ ही Self-Directed Learning (स्व-निर्देशित अधिगम) को भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। प्रतिभागियों को इस बात से अवगत कराया गया कि चिकित्सा क्षेत्र में लगातार बदलते ज्ञान और तकनीक के बीच विद्यार्थियों में स्वयं सीखने और अपनी क्षमताओं को लगातार विकसित करने की आदत किस प्रकार विकसित की जा सकती है।

माइक्रोटीचिंग और लेसन प्लानिंग से बढ़ी व्यावहारिक समझ

पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहते हुए व्यावहारिक गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों के लिए Lesson Planning (पाठ योजना निर्माण) और Microteaching (माइक्रोटीचिंग) से जुड़े अभ्यास आयोजित किए गए।इन गतिविधियों के माध्यम से संकाय सदस्यों को प्रभावी पाठ योजना तैयार करने, कक्षा में विषय को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने और विद्यार्थियों की सीखने की जरूरतों के अनुरूप अध्यापन तकनीकों का उपयोग करने का अवसर मिला।कार्यक्रम में Mentoring (मेंटरिंग) की भूमिका पर भी चर्चा हुई। चिकित्सा शिक्षा में विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास के लिए एक प्रभावी मेंटर की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, इस विषय पर प्रतिभागियों के साथ संवाद किया गया।

शैक्षिक प्रौद्योगिकी और कक्षा संचालन पर भी चर्चा

वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए कार्यक्रम में Educational Technology (शैक्षिक प्रौद्योगिकी) से जुड़े सत्र भी आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और संवादात्मक बनाने में तकनीकी संसाधनों के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।इसके अलावा Effective Classroom Facilitation (प्रभावी कक्षा संचालन) पर भी विशेष सत्र आयोजित हुआ। इसमें कक्षा के वातावरण को अधिक सहभागितापूर्ण बनाने, विद्यार्थियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने और शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित करने के तरीकों पर चर्चा की गई।

संवादात्मक चर्चाओं और व्यावहारिक गतिविधियों से हुआ प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को केवल व्याख्यान के माध्यम से जानकारी देने के बजाय इंटरैक्टिव चर्चाओं, व्यावहारिक गतिविधियों और Reflective Learning (चिंतनपरक अधिगम) का अवसर प्रदान किया गया।इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने शिक्षण अनुभवों पर चिंतन किया और यह समझने का प्रयास किया कि कक्षा में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को किस प्रकार और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इस तरह कार्यक्रम ने संकाय सदस्यों के ज्ञान के साथ-साथ उनके व्यावहारिक शिक्षण कौशल को भी मजबूत करने में योगदान दिया।

प्रो. (डॉ.) अमिता जैन के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन

यह संकाय विकास कार्यक्रम एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन में आयोजित किया गया। संस्थान की चिकित्सा शिक्षा इकाई ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विशेषज्ञों, आयोजन समिति के सदस्यों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।MEU की ओर से प्रो. (डॉ.) नीरज कुमारी, अध्यक्षा, चिकित्सा शिक्षा इकाई, चिकित्सा शिक्षा विभाग, जिपमेर, पुद्दुचेरी तथा जिपमेर के विशेषज्ञ संकाय सदस्यों के शैक्षणिक सहयोग की सराहना की गई।इसके साथ ही कार्यक्रम के आयोजन में योगदान देने वाली MEU टीम, आयोजन समिति और सभी प्रतिभागियों के उत्साहपूर्ण सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया गया।

चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में होगा योगदान

एम्स रायबरेली में आयोजित यह पांच दिवसीय कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में संकाय सदस्यों की क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। CBME आधारित चिकित्सा शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशिक्षित और सक्षम संकाय की भूमिका महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम के माध्यम से अध्यापन, मूल्यांकन, पाठ्यक्रम नियोजन, कक्षा संचालन और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में संकाय सदस्यों की समझ को मजबूत किया गया। इससे भविष्य में विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।एम्स रायबरेली की चिकित्सा शिक्षा इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने संकाय विकास, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और CBME के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

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