उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था की आड़ लेकर नकली नोटों का कारोबार फैलाने की साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और नकद लेन-देन का फायदा उठाकर धार्मिक स्थलों और छोटे दुकानदारों के बीच जाली नोट खपाने की योजना बना रहे एक संगठित गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। पिछले 14 दिनों में तीन बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 12 तस्करों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 2.92 लाख रुपये की नकली करेंसी, नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले प्रिंटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें दूसरे राज्यों तक फैली हुई हैं।

आस्था के शहर को बनाया था आसान निशाना
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने हरिद्वार को इसलिए चुना क्योंकि यहां हर दिन देशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक स्थलों, घाटों और बाजारों में नकद लेन-देन बड़ी मात्रा में होता है। भीड़भाड़ और जल्दबाजी के माहौल में छोटे दुकानदार अक्सर नोटों की बारीकी से जांच नहीं कर पाते। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर आरोपी असली खरीदारी के बदले नकली नोट चलाने की फिराक में थे।पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इस गिरोह का पर्दाफाश नहीं होता, तो बड़ी संख्या में नकली करेंसी बाजार में फैल सकती थी, जिससे आम लोगों के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता।
14 दिन में तीन बड़ी कार्रवाई, एक-एक कर टूटता गया नेटवर्क
इस पूरे मामले की शुरुआत 28 जून को हुई, जब श्यामपुर थाना पुलिस नियमित चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर तीन युवकों को हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान उनके पास से 52,500 रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई। पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया।30 जून को पुलिस ने गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से 50 हजार रुपये के नकली नोट, उन्हें तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला हाई-क्वालिटी प्रिंटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी उपकरण बरामद हुए। इससे साफ हो गया कि गिरोह केवल नकली नोट चला ही नहीं रहा था, बल्कि खुद उनकी छपाई भी कर रहा था।इसके बाद 6 जुलाई को नगर कोतवाली पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 84,500 रुपये की जाली करेंसी बरामद हुई। लगातार मिल रही सफलता से पुलिस को यह भरोसा हो गया कि वह एक बड़े नेटवर्क तक पहुंच चुकी है।
पंजाब तक पहुंची जांच, दो और तस्कर गिरफ्तार
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब 11 जुलाई को पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए। पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर हरिद्वार पुलिस की विशेष टीम पंजाब पहुंची और वहां छापेमारी कर गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।पंजाब से गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 1.05 लाख रुपये की नकली करेंसी, एक प्रिंटर और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही कार बरामद हुई। इससे स्पष्ट हो गया कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और विभिन्न राज्यों में नकली नोटों की सप्लाई का नेटवर्क तैयार कर चुका था।
आधुनिक उपकरणों से तैयार हो रहे थे नकली नोट
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी आधुनिक प्रिंटर और डिजिटल उपकरणों की मदद से नकली नोट तैयार करते थे। शुरुआती जांच के मुताबिक, गिरोह असली नोटों जैसी दिखने वाली करेंसी तैयार कर उन्हें छोटे दुकानदारों, अस्थायी बाजारों और धार्मिक मेलों में खपाने की योजना पर काम कर रहा था।बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा अब तक कितनी मात्रा में नकली नोट बाजार में पहुंचाए जा चुके हैं।
व्यापारियों और श्रद्धालुओं के लिए राहत
हरिद्वार के व्यापारियों का कहना है कि पुलिस की इस कार्रवाई से बड़ी राहत मिली है। धार्मिक नगरी में प्रतिदिन लाखों रुपये का नकद कारोबार होता है। यदि यह गिरोह लंबे समय तक सक्रिय रहता, तो स्थानीय व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था।पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को संदिग्ध नोट मिले या किसी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध लगे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। साथ ही नकद लेन-देन के दौरान नोटों की अच्छी तरह जांच करने की सलाह भी दी गई है।
पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उनके अन्य साथियों, सप्लाई चेन और नकली नोट तैयार करने वाले नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े हर व्यक्ति तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क का सफाया किया जाएगा।हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के समय में नकली करेंसी के खिलाफ सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। लगातार तीन ऑपरेशन और 12 आरोपियों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि धर्मनगरी को निशाना बनाने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस सख्त अभियान चला रही है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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