पटना बिहार की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर उठी अंदरूनी कलह ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बार विवाद किसी विपक्षी दल से नहीं, बल्कि पार्टी के अपने ही फैसले को लेकर सामने आया है। सारण जिले के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव को छह वर्षों के लिए निष्कासित किए जाने के बाद लालू प्रसाद यादव की बेटी और सारण से महागठबंधन की पूर्व प्रत्याशी रोहिणी आचार्या खुलकर अपनी ही पार्टी के खिलाफ मैदान में उतर आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे सवाल उठाए हैं, जिनसे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राजद के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा?
हरेलाल यादव के निष्कासन से मचा बवाल
राजद की बिहार प्रदेश इकाई ने प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के हस्ताक्षर से जारी आदेश में सारण के प्रवक्ता हरेलाल यादव को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। पार्टी का आरोप है कि हरेलाल यादव ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसे अनुशासनहीनता और दल-विरोधी गतिविधि माना गया।राजद के आदेश में कहा गया कि हरेलाल यादव का व्यवहार पार्टी की मर्यादा के विपरीत था और उनके मन में नेतृत्व के प्रति सम्मान का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है। इसी कारण पार्टी ने उनसे किसी प्रकार का स्पष्टीकरण मांगना भी आवश्यक नहीं समझा और तत्काल प्रभाव से छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया।लेकिन यहीं से शुरू हुआ सियासी तूफान…
अपनी ही पार्टी पर बरसीं रोहिणी आचार्या
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने पूछा कि क्या अब पार्टी में सच बोलने वालों, ईमानदारी से संगठन के लिए काम करने वालों और जनता के बीच सक्रिय कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नहीं बची है?रोहिणी ने आरोप लगाया कि अनुशासनहीनता का बहाना बनाकर ऐसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो पार्टी को मजबूत करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग संगठन पर हावी हो चुके हैं, जो चुनाव के समय भी पार्टी के हित में काम नहीं करते, लेकिन कार्रवाई हमेशा उन लोगों पर होती है जो जमीन पर सक्रिय रहते हैं।

सारण संगठन पर लगाए गंभीर आरोप
रोहिणी आचार्या ने सिर्फ निष्कासन पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि सारण जिले के संगठन की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिले का संगठन ऐसे लोगों के कब्जे में चला गया है, जो केवल पद पर बने रहने के लिए पार्टी में हैं। चुनाव के समय यही लोग विरोधियों के इशारों पर काम करते हैं, जबकि जनता के बीच संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया जाता है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिले के कई विधायक और पदाधिकारी जनता से कट चुके हैं। इसके बावजूद कार्रवाई उन्हीं नेताओं और कार्यकर्ताओं पर होती है जो लगातार पार्टी के लिए मेहनत करते हैं।
‘मैं लालू यादव की बेटी हूं, गलत के आगे नहीं झुकूंगी’
रोहिणी आचार्या ने अपने पोस्ट में बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज अपनाते हुए कहा कि यदि कार्रवाई करनी ही है तो पहले उन नेताओं पर की जाए जिन पर वर्षों से गंभीर आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि वह आज भी पार्टी में हैं और संगठन को गलत तत्वों से मुक्त कराने के लिए आगे भी आवाज उठाती रहेंगी।
उन्होंने कहा,
“मैं लालू प्रसाद यादव की बेटी हूं। गलत के सामने कभी नहीं झुकूंगी। मेरे साथ खड़े कार्यकर्ता किसी भी निष्कासन की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।”
इस बयान को राजनीतिक गलियारों में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार लालू परिवार का कोई सदस्य सार्वजनिक मंच पर अपनी ही पार्टी की कार्यप्रणाली पर इतने तीखे सवाल उठाता दिखाई दिया है।

क्या राजद में बढ़ रही है अंदरूनी नाराजगी?
रोहिणी आचार्या की नाराजगी ऐसे समय सामने आई है जब बिहार की राजनीति आगामी चुनावों की तैयारियों में जुटी हुई है। पार्टी के भीतर इस तरह के सार्वजनिक मतभेद विपक्ष को बड़ा राजनीतिक मुद्दा देने का काम कर सकते हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संगठन के भीतर असंतोष इसी तरह खुलकर सामने आता रहा, तो इसका असर पार्टी की एकजुटता और चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है। खासकर तब, जब यह आवाज पार्टी के संस्थापक लालू प्रसाद यादव के परिवार से ही उठ रही हो।
स्पष्टीकरण का मौका भी नहीं मिला
इस पूरे विवाद का एक और बड़ा पहलू यह है कि पार्टी ने हरेलाल यादव को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया और न ही उनका पक्ष जानने की कोशिश की। सीधे छह वर्षों के निष्कासन का फैसला लिया गया। इसी मुद्दे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या संगठन में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।हालांकि पार्टी का कहना है कि फेसबुक पर की गई टिप्पणी इतनी गंभीर थी कि स्पष्टीकरण मांगने की आवश्यकता ही नहीं थी।
बिहार की राजनीति में नई बहस
रोहिणी आचार्या के बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या राजद के भीतर असहमति की आवाजों को दबाया जा रहा है, या फिर पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठा रही है?आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व रोहिणी आचार्या के आरोपों पर क्या रुख अपनाता है। क्या संगठन इस विवाद को शांत करेगा या फिर यह अंदरूनी टकराव और बड़ा राजनीतिक संकट बन जाएगा?फिलहाल इतना तय है कि हरेलाल यादव के निष्कासन ने राजद के भीतर की खामोश नाराजगी को सार्वजनिक बहस में बदल दिया है। लालू परिवार की सदस्य द्वारा अपनी ही पार्टी पर उठाए गए सवाल बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों तक चर्चा का बड़ा विषय बने रहेंगे।
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