चाचा की आंखों के सामने मगरमच्छ ने निगल लिया मासूम’… बहराइच की घटना ने पूरे देश को रुला दिया

Editorial
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बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सरयू नदी के किनारे अपने चाचा के साथ खेत में काम करने गया 12 वर्षीय मासूम सुनील देखते ही देखते मगरमच्छ का शिकार बन गया। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि चाचा अपनी पूरी ताकत लगाकर भी भतीजे को मगरमच्छ के जबड़ों से नहीं छुड़ा सके और बेबस होकर अपनी आंखों के सामने यह भयावह मंजर देखते रह गए।घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। लोगों के दिलों में दहशत है और हर कोई उस दर्दनाक पल को याद कर सिहर उठा है। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में इस हादसे की चर्चा हो रही है।

“मैं 7-8 मिनट तक लड़ता रहा… लेकिन मगरमच्छ नहीं छोड़ा”

मृतक बालक के चाचा विजय राज सिंह ने मीडिया से बातचीत में जो आपबीती सुनाई, उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। उन्होंने बताया कि गुरुवार शाम खेत में धान की नर्सरी लगाने का काम खत्म होने के बाद सुनील हाथ-मुंह धोने के लिए सरयू नदी के किनारे गया था। तभी झाड़ियों में छिपा मगरमच्छ अचानक बिजली की तरह बाहर निकला और सुनील को पकड़कर नदी में खींच ले गया।विजय राज सिंह ने कहा, “भतीजे की चीख सुनते ही मैं नदी में कूद गया। करीब 7 से 8 मिनट तक मैं मगरमच्छ से लड़ता रहा। उसकी पकड़ से सुनील को छुड़ाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह लगातार उसे गहरे पानी की ओर खींचता रहा। उसने कई बार बच्चे को पानी से बाहर उछाला और फिर अंदर ले गया। आखिरकार मेरी आंखों के सामने ही वह उसे लेकर गहरे पानी में गायब हो गया।”

3 घंटे बाद मिला मासूम का शव

घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने बांस और रस्सियों की मदद से बच्चे की तलाश शुरू कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस, वन विभाग और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। घंटों चले सर्च ऑपरेशन के बाद करीब तीन घंटे बाद नदी में बच्चे का शव उतराता हुआ मिला।शुक्रवार को पोस्टमॉर्टम के बाद मासूम का अंतिम संस्कार किया गया। पूरे गांव की आंखें नम थीं। अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति इस दर्दनाक घटना को याद कर भावुक हो उठा।

ग्रामीण बोले- मगरमच्छ कई बार बाहर आया, फिर पानी में ले गया

घटना के प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मगरमच्छ बच्चे को अपने जबड़े में दबाकर कई बार पानी से बाहर आया। उसने बच्चे को कई बार झटका दिया और फिर दोबारा नदी के अंदर चला गया। ग्रामीण लगातार उसे भगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन मगरमच्छ बेहद आक्रामक था और किसी को पास नहीं आने दे रहा था।ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा भयावह दृश्य उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।

पहले ही अनाथ था सुनील, अब तीन भाई-बहनों का सहारा भी छिन गया

इस घटना ने इसलिए भी लोगों को भावुक कर दिया क्योंकि सुनील पहले से ही अनाथ था। उसकी मां का सात वर्ष पहले और पिता का पांच वर्ष पहले बीमारी के कारण निधन हो चुका था। माता-पिता के गुजर जाने के बाद वह अपने चाचा विजय राज सिंह के साथ रहकर पढ़ाई करता था और खेती-किसानी में भी हाथ बंटाता था।परिवार में अब 14 वर्षीय बहन सुमन, 10 वर्षीय भाई संजय और सात वर्षीय बहन सीमा ही बचे हैं। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर इस परिवार के सामने अब बच्चों के पालन-पोषण का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गांव के लोग परिवार की मदद के लिए आगे आ रहे हैं और आर्थिक सहयोग भी जुटाया जा रहा है।

स्कूल से लौटकर गया था खेत, नहीं पता था मौत इंतजार कर रही है

बताया जा रहा है कि सुनील गांव के जूनियर हाई स्कूल में कक्षा छह का छात्र था। गुरुवार को स्कूल से लौटने के बाद वह रोज की तरह अपने चाचा के साथ खेत में धान की नर्सरी लगाने गया था। काम पूरा होने के बाद हाथ-पैर धोने के लिए वह नदी किनारे पहुंचा, जहां झाड़ियों में पहले से घात लगाए बैठे मगरमच्छ ने अचानक हमला कर दिया।कुछ ही सेकंड में खुशमिजाज मासूम मौत के मुंह में समा गया और पूरा परिवार बिखर गया।

गांव में दहशत, नदी किनारे जाने से डर रहे लोग

इस दर्दनाक हादसे के बाद तिंकुरी और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। किसान अब नदी किनारे खेतों में जाने से डर रहे हैं। अभिभावकों ने बच्चों को नदी के पास जाने से पूरी तरह रोक दिया है।ग्रामीणों का कहना है कि सरयू नदी में मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। लोगों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

वन विभाग अलर्ट, मगरमच्छ पकड़ने के लिए शुरू हुई कार्रवाई

वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद शाकिब ने बताया कि घटना के बाद पूरे इलाके में मुनादी कराकर लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए विशेष टीम लगाई गई है। नदी किनारे जाल बिछाए जा रहे हैं, अतिरिक्त गश्त बढ़ाई गई है और चेतावनी बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं।वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारे अकेले न जाएं और बच्चों को बिल्कुल भी पानी के पास न जाने दें।

एक सवाल, जिसका जवाब आज भी नहीं मिला…

12 साल का सुनील अब इस दुनिया में नहीं है। वह मासूम, जिसने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया था, अब मगरमच्छ का शिकार बन गया। उसकी अंतिम चीख आज भी उसके चाचा के कानों में गूंज रही है। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन सभी नदी किनारे बसे गांवों के लिए चेतावनी है, जहां इंसान और वन्यजीवों का संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है।आज पूरा गांव यही पूछ रहा है—क्या सुनील की मौत के बाद ही सुरक्षा के इंतजाम होंगे, या फिर किसी और मासूम की जान जाने का इंतजार किया जाएगा?

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