वाराणसी “जिस वर्दी पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, अगर वही वर्दी डर और दबाव का कारण बन जाए तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?” वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि चौबेपुर थाने में तैनात SI रोशनी ने एक महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की भूमिका और महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।बताया जा रहा है कि मामला चौबेपुर थाना क्षेत्र का है, जहां किसी विवाद को लेकर पुलिस पहुंची थी। इसी दौरान महिला और पुलिसकर्मियों के बीच कहासुनी हुई। आरोप है कि इसी दौरान सब-इंस्पेक्टर रोशनी ने महिला के साथ कथित रूप से मारपीट की। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और लोगों ने पुलिस के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई।
महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल
उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार महिला सुरक्षा, मिशन शक्ति और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के दावे करती रही है। लेकिन इस तरह के आरोप सामने आने के बाद सवाल उठता है कि आखिर पुलिस के अंदर ही महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर संवेदनशीलता कितनी है?अगर किसी आम नागरिक के साथ विवाद होता है तो पुलिस से उम्मीद की जाती है कि वह कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करेगी। पुलिस को संयम, धैर्य और निष्पक्षता के साथ काम करने की जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन जब पुलिस पर ही अभद्रता या मारपीट के आरोप लगते हैं तो जनता का भरोसा प्रभावित होता है।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने पुलिस विभाग से कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या किसी भी परिस्थिति में पुलिसकर्मी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है?लोगों का कहना है कि पुलिस की ताकत जनता की सुरक्षा के लिए है, किसी को डराने या दबाने के लिए नहीं। वहीं, मामले में पुलिस अधिकारियों की ओर से जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कही जा सकती है।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
हालांकि किसी भी पक्ष पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा। पुलिस विभाग में भी यह नियम है कि किसी भी शिकायत या आरोप की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाए।इस मामले में भी अब सभी की नजरें वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग अपने ही अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच करेगा? क्या पीड़ित महिला को न्याय मिलेगा? और क्या वर्दी की आड़ में किसी भी तरह के कथित दुर्व्यवहार पर सख्त संदेश दिया जाएगा?
वर्दी सम्मान की पहचान है, दबाव की नहीं
पुलिस की वर्दी सिर्फ एक कपड़ा नहीं बल्कि जनता के भरोसे की पहचान होती है। एक पुलिसकर्मी का व्यवहार पूरे विभाग की छवि बनाता है। ऐसे में अगर किसी अधिकारी पर ही मारपीट या अभद्रता के आरोप लगते हैं तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।वाराणसी के चौबेपुर मामले ने एक बार फिर यही बहस छेड़ दी है कि क्या पुलिस की ताकत जनता की रक्षा के लिए इस्तेमाल हो रही है या कहीं-कहीं यही ताकत आम लोगों के लिए परेशानी बन रही है?अब देखना होगा कि इस मामले में पुलिस विभाग क्या कदम उठाता है और क्या दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होती है या नहीं। क्योंकि जनता का भरोसा सिर्फ दावों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष कार्रवाई से कायम होता है।
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